हिंदू धर्म के शास्त्रों में देवी दुर्गा के दश प्रमुख शक्ति पीठों का विशेष महत्व है। ये वे स्थान हैं जहाँ माता सती के अंग या आभूषण गिरे थे। इन शक्ति पीठों का स्मरण करने से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, सिद्धि और मुक्ति का लाभ प्राप्त होता है।
श्लोक
"लङ्कायां शाङ्करी देवी कामाख्यायां महेश्वरी।
कालिका प्रयागे तु विंध्यवासिनि चामुंडा॥
गौरी
गिरिनिकेतस्थिता भ्रामरी विप्रवासिनी।
महालक्ष्मीश्च कौलंटे क्षेत्रे क्षेत्रे प्रतिष्ठिता॥"
अर्थ:
- लंकायां शाङ्करी देवी – लंका में शंकर की शक्ति स्वरूपा देवी निवास करती हैं।
- कामाख्यायां महेश्वरी – असम के कामाख्या क्षेत्र में महेश्वरी देवी स्थित हैं।
- कालिका प्रयागे तु – प्रयाग (इलाहाबाद) में देवी कालिका प्रतिष्ठित हैं।
- विंध्यवासिनि चामुंडा – विंध्य पर्वत पर देवी चामुंडा का निवास है।
- गौरी गिरिनिकेतस्थिता – गौरी देवी पर्वतों में स्थित हैं।
- भ्रामरी विप्रवासिनी – भ्रामरी देवी ब्राह्मणों के बीच निवास करने वाली हैं।
- महालक्ष्मीश्च कौलंटे – कौलंट क्षेत्र में महालक्ष्मी देवी स्थित हैं।
- क्षेत्रे क्षेत्रे प्रतिष्ठिता – विभिन्न स्थानों पर ये देवी प्रतिष्ठित हैं।
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2-॥ द्वादश देवी तीर्थ स्मरण श्लोक ॥
(त्रिपुरारहस्य, महात्म्य खंड, अध्याय 48, श्लोक 72-75)
श्लोक:
"कांचीपुरे तु कामाक्षी मलये भ्रामरी तथा।
केरले तु कुमारी सा अम्बा अनर्तेषु संस्थिता।।
करवींरे
महालक्ष्मीः कालिका मालवेषु सा।
प्रयागे ललिता देवी विन्ध्ये विन्ध्यनिवासिनि।।
वाराणस्यां
विषालाक्षी गयायां मंगलावती।
वंगेषु सुन्दरी देवी नेपाले गुह्यकेश्वरी।।"
अर्थ:
- कांचीपुरे तु कामाक्षी – कांचीपुर (तमिलनाडु) में माता कामाक्षी देवी प्रतिष्ठित हैं।
- मलये भ्रामरी तथा – मलय पर्वत (दक्षिण भारत) में भ्रामरी देवी स्थित हैं।
- केरले तु कुमारी सा – केरल में कुमारी देवी (कन्याकुमारी) निवास करती हैं।
- अम्बा अनर्तेषु संस्थिता – अनर्त (गुजरात) में अंबा देवी प्रतिष्ठित हैं।
- करवींरे महालक्ष्मीः – करवीर (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) में महालक्ष्मी देवी स्थित हैं।
- कालिका मालवेषु सा – मालवा (मध्य प्रदेश) में कालिका देवी विराजमान हैं।
- प्रयागे ललिता देवी – प्रयाग (इलाहाबाद) में ललिता देवी निवास करती हैं।
- विन्ध्ये विन्ध्यनिवासिनि – विन्ध्य पर्वत क्षेत्र में विन्ध्यवासिनी देवी प्रतिष्ठित हैं।
- वाराणस्यां विषालाक्षी – वाराणसी (काशी) में विषालाक्षी देवी स्थित हैं।
- गयायां मंगलावती – गया (बिहार) में मंगलावती देवी प्रतिष्ठित हैं।
- वंगेषु सुन्दरी देवी – वंग देश (पश्चिम बंगाल) में सुंदरी देवी निवास करती हैं।
- नेपाले गुह्यकेश्वरी – नेपाल में गुह्यकेश्वरी देवी प्रतिष्ठित हैं।
संदर्भ ग्रंथ:
यह श्लोक "त्रिपुरारहस्य" के महात्म्य खंड के अध्याय 48, श्लोक 72-75 में वर्णित है।
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3-. देवी भागवत पुराण (स्कंध 7, अध्याय 30-32)
📜 श्लोक: **"काश्यां अन्नपूर्णा देवी गयाेमृतेश्वरि तथा।
कांची कामाक्षि देवी च प्रारब्धं वाराणसि।।विंध्याचले
विंध्यवासिन्यम्भोजा च प्रयागके।
ज्वालामुख्यां
ज्वालादेवी तारा हिंगुले स्थिता।।
कालिका
द्वारिकायां च ब्रह्माणी च कुरुक्षेत्रे।
भीमेश्वरी च
महाकाली क्षेत्रे क्षेत्रे प्रतिष्ठिता।।"**
📖 अर्थ:
- अन्नपूर्णा देवी – काशी में स्थित हैं।
- अमृतेश्वरि देवी – गया में विराजमान हैं।
- कामाक्षी देवी – कांचीपुरम में स्थित हैं।
- विन्ध्यवासिनी – विन्ध्य क्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं।
- ज्वालादेवी – ज्वालामुखी (हिमाचल प्रदेश) में स्थित हैं।
- तारा देवी – हिंगलाज (पाकिस्तान) में स्थित हैं।
- कालिका देवी – द्वारका में स्थित हैं।
- ब्रह्माणी देवी – कुरुक्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं।
- भीमेश्वरी देवी – भीमाशंकर क्षेत्र में स्थित हैं।
- महाकाली देवी – विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित हैं।
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