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नागराज रहस्य:तक्षकराज के दुर्लभ दर्शन शुभ मुहूर्त-नागपंचमी;9424446706

विश्व के सुप्रसिद्ध छायाकर श्री सुधीर सक्सेना के सौजन्यसे दर्शन सुलभ |नागेश्वर मंदिर उज्जैन-वर्ष मे केवल 24 घंटे के लिए खुलता है |

यह सावन  शुक्ल पंचमी को प्रतिवर्ष विराट रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है।
1-
वर्ष में केवल एक दिन खुलने वाला नाग मंदिर-
परमार राजा भोज द्वारा लगभग 1050 ईसवी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया। इस संदर्भ में एक कथा है कि सर्प तक्षक द्वारा  शिवजी को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया गया था ।और उनके सानिध्य में रहने का निवेदन किया था ।उसके अनुरूप ही  महाकाल मंदिर परिसर में निवास करते हैं।
(
मान्यता नागराज तक्षक मंदिर में रहते हैं)।
वर्ष में एक बार केवल नाग पंचमी के दिन खुलने वाला मंदिर भारतवर्ष में केवल उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर में है, उसका नाम नागचंद्रेश्वर मंदिर है ।
इस मंदिर में सर्प देव के दर्शन वर्ष में केवल एक बार ही हो सकते हैं।
इसकी विशेषता यह है कि नागदेव के दस मुखी फन पर आदि देव महादेव शिव एवं पत्नी जगत माता पार्वती जी विराजित है। यह दुर्लभ दर्शनीय है जिसका छायाचित्र प्रसिद्ध विश्व प्रसिद्ध छाया कर श्री सुधीर सक्सेना जी द्वारा उपलब्ध कराया गया है ।इसके दर्शन आप इस चित्र के माध्यम से कर सकते हैं। आस्था और श्रद्धा ही महत्वपूर्ण होती है।
2- 16
एकड़ में मन्नार शला 30हजार नाग -
   
केरल  के अलप्पुषा़ जिले के हरिपद गांव में स्थित मन्नारसाला मंदिर विश्व का एक अद्भुत क्षेत्र है ।यहां पर नागराज और नागयक्षी देवी की प्रतिमा दर्शनीय है। यहां पर विशिष्ट पूजा उरुली काम नामक की जाती है।  संतान हीन महिलाओं के लिए यह विशेष सुप्रसिद्ध है ।
शेष नाग ,तक्षक ,कर्कोटक आदि ने भगवान शिव की यहां पर तपस्या की थी एवं भगवान शिव को नागेश्वर के नाम से यहां पूजा जाता है ।
शिवजी मैं उनका वरदान दिया तथा राहु के भी मूर्ति यहां पर उपलब्ध है क्योंकि ज्योतिष में राहु का मुख सर्प का माना जाता है।
ऐसा कथानक है कि परशुराम भगवान  हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए केरल के इस स्थान पर गए और उन्होंने इस भूमि को दान किया। नाग राज ने परशुराम की इच्छा के अनुसार यहां पर निवास का निर्णय लिया इस प्रकार यह मंदिर 16 एकड़ क्षेत्र में हरे-भरे जंगलों से युक्त है ।यहां पर स्थान स्थान पर नागराज की प्रतिमाएं दर्शन हेतुलगभग30हजार सुलभ हैं।
3-
नागराज स्वयं शिव पूजा करने आते हैं-
आगरा के पास सलेमाबाद क्षेत्र में एक अति प्राचीन शिव मंदिर अत्यधिक चर्चित है।  यहां पर भगवान शिव की पूजा या दर्शन के लिए प्रतिदिन एक विशाल नागराज प्रातः 10:00 आते हैं एवं अपराहन 3:00 बजे प्रस्थित हो जाते हैं। यह 15 साल से अधिक वर्षों से नियत क्रम बना हुआ है ।इस अवधि में मंदिर के द्वार बंद कर कर दिए जाते हैं तथा किसी को भी दर्शन की अनुमति नहीं होती है।         भारतवर्ष में अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर  उपस्थित होते ही जहर उतर जाता है ,जैसे बिहार में दशहरा में देवी मंदिर है। क्षेत्र में प्रवेश करते हुए सर्प के काटे हुए का विष उतर जाता है।
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उत्तराखंड में जौनसार बावर गांव में 13 अप्रैल को प्रतिवर्ष पूजा होती है और आज तक यहां पर किसी की सर्प के काटने से मृत्यु नहीं हुई है ।
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जयपुर का भी एक मंदिर इस बात के लिए चर्चित है कि सावन से ठीक पहले एक सर्प उस मंदिर में वर्षो से प्रवेश करता है।
बिहार के समस्तीपुर क्षेत्र में विभूतिपुर में नाग पंचमी से 1 दिन पहले इस गांव के सभी लोग सर्पों को हाथ में लेकर एक जुलूस निकालते हैं। यह विशाल सांपों का मेला होता है ।
इस प्रकार भारत में सर्प की पूजा का विधान है तथा अनेक रहस्य यहां पर सर्पों से संबंधित है।नाग पंचमी : नाग पूजा-विधान, मासानुसार नागदेवता, मंत्र एवं फल

श्रावण शुक्ल पंचमीसोमवार, 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस वर्ष नाग पंचमी और श्रावण सोमवार का संयोग है। पंचमी तिथि 16 अगस्त को सायं लगभग 04:52 बजे आरम्भ होकर 17 अगस्त को सायं लगभग 05:00 बजे समाप्त होती है।

उज्जैन के श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में वर्ष में केवल एक बार नाग पंचमी पर दर्शन होते हैं; 17 अगस्त 2026 को इस दुर्लभ दर्शन का विशेष अवसर है।

नाग पंचमी का शास्त्रीय आधार

नाग पंचमी का विधान श्रावण शुक्ल पंचमी से सम्बद्ध है। नाग पूजा का उल्लेख वैदिक साहित्य में भी मिलता है; तैत्तिरीय संहिता में नाग-पूजन का संदर्भ तथा पुराणों में अनन्त, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक आदि नागदेवताओं की उपासना का वर्णन मिलता है।

गरुड़ पुराण-परम्परा में प्रसिद्ध नाग-स्तुति में प्रमुख नागों का स्मरण किया जाता है:

“Anantam Vasukim Shesham Padmanabham Cha Kambalam,
Shankhapalam Dhritarashtram Takshakam Kaliyam Tatha.”

इसका उद्देश्य नागदेवताओं का सामूहिक आवाहन एवं नमस्कार है।

नाग पंचमी पूजा-विधान

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को शुद्ध करके हल्दी, चन्दन या गेरू से नागदेवता का चित्र, अथवा मिट्टी/धातु की नागप्रतिमा स्थापित करें। परम्परा में पंचफणी या सप्तफणी नाग का चित्र भी बनाया जाता है।

संकल्प के बाद पहले श्री गणेश पूजन, फिर नागदेवता का आवाहन करें। नागदेवता को गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप, नैवेद्य और जल अर्पित करें। नागप्रतिमा पर दूध अर्पित करना पारम्परिक पूजा-विधि में मिलता है, परन्तु जीवित साँप को दूध पिलाएँ; पूजा प्रतिमा अथवा चित्र पर ही करें।

मुख्य मंत्र के रूप में “Om Nagebhyo Namah” तथा “Om Nagarajaya Namah” का जप किया जा सकता है। भगवान शिव को भी “Om Namah Shivaya” से पूजें, क्योंकि नागदेवता और भगवान शिव का सम्बन्ध नागाभूषण स्वरूप से स्थापित है।

पूजा के अंत में नाग पंचमी कथा, नाग स्तुति, आरती और क्षमा-प्रार्थना करें। पारम्परिक प्रार्थना का भाव है कि नागदेवता प्रसन्न होकर कुल में सर्पभय का निवारण और सुख-शान्ति प्रदान करें।

मासानुसार नागदेवता एवं विशेष मंत्र

आपके दिए हुए मासवार नाग-मंत्र विधान के अनुसार प्रत्येक मास में सम्बद्ध नागदेवता का स्मरण किया जा सकता है। पूजा में उस नागदेवता के नाम के साथ “Om [Naga Name] Namah” का जप करें।

चैत्रवासुकि नाग
मंत्र“Om Vasukaye Namah”
फलभय-शमन, संरक्षण तथा विष-संबंधी भय से रक्षा के लिए नागदेवता की उपासना।

वैशाखतक्षक नाग
मंत्र“Om Takshakaya Namah”
फलसर्पभय, आकस्मिक संकट और शत्रुजनित भय की शान्ति के लिए।

ज्येष्ठपद्म नाग
मंत्र“Om Padmaya Namah”
फलसुख, समृद्धि और पारिवारिक मंगल की कामना से पूजन।

आषाढ़धृतनाग
मंत्र“Om Dhritanagaya Namah”
फलस्थिरता, संरक्षण तथा संकटों से बचाव की प्रार्थना।

श्रावणअनन्त नाग
मंत्र“Om Anantaya Namah”
फलदीर्घस्थायी सुख, पारिवारिक रक्षा और जीवन में स्थिरता के लिए विशेष पूजन। नाग पंचमी का श्रावण मास से विशेष सम्बन्ध होने के कारण अनन्त नाग का स्मरण विशेष महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है।

भाद्रपदकुलिक नाग
मंत्र“Om Kulikaya Namah”
फलकष्ट, भय तथा अशान्ति के शमन की कामना।

आश्विनमहापद्म / मनसा
मंत्र“Om Mahapadmaya Namah”, “Om Manasadevyai Namah”
फलसंतान, परिवार, सुख-समृद्धि तथा नागदोषजन्य भय की शान्ति की कामना।

कार्तिककर्कोटक नाग
मंत्र“Om Karkotakaya Namah”
फलविपत्ति से रक्षा, शत्रु-बाधा शमन और संकट से सुरक्षा

मार्गशीर्षशंखपाल नाग
मंत्र“Om Shankhapalaya Namah”
फलगृह-सुरक्षा, शान्ति और परिवार की रक्षा

पौषधृतनाग
मंत्र“Om Dhritanagaya Namah”
फलस्थिरता, सुरक्षा और बाधा-शमन

माघअनन्त नाग
मंत्र“Om Anantaya Namah”
फलदीर्घकालीन मंगल, संरक्षण एवं स्थिरता

फाल्गुनशंखपाल नाग
मंत्र“Om Shankhapalaya Namah”
फलशान्ति, गृह-सुख और संकट-निवारण की प्रार्थना।

नाग पंचमी के विशेष फल

शास्त्रीय नाग पंचमी कथा में नागपूजन को सर्पभय से अभय प्रदान करने वाला बताया गया है। नागों को पूजने वाले के कुल की रक्षा तथा सर्पभय की शान्ति का वर्णन मिलता है। कथा में घृत, पायस (खीर) और गुग्गुल से नागों की पूजा का भी उल्लेख है।

नाग पंचमी पर नागदेवता + भगवान शिव की संयुक्त उपासना विशेष रूप से की जाती है। इससे भय-शान्ति, पारिवारिक मंगल, मानसिक शान्ति, संकट-निवारण और आध्यात्मिक संरक्षण की प्रार्थना की जाती है। आधुनिक ज्योतिषीय परम्पराओं में इसे सर्पदोष/कालसर्प सम्बन्धी शान्ति-उपायों से भी जोड़ा जाता है, हालांकि ऐसे ज्योतिषीय फल को जन्मकुंडली के विशिष्ट योगों के अनुसार अलग से देखना चाहिए।

 — उज्जैन में विशेष नाग दर्शन

 सोमवार को नाग पंचमी के अवसर पर श्री नागचंद्रेश्वर दर्शन विशेष महत्त्व रखते हैं। मंदिर महाकालेश्वर परिसर के ऊपरी भाग में स्थित है और इसके कपाट सामान्यतः वर्षभर बंद रहते हैं तथा नाग पंचमी पर ही दर्शन के लिए खोले जाते हैं

नाग दर्शननाग पूजाभगवान शिव दर्शननाग मंत्र-जपनाग पंचमी कथाआरती एवं प्रार्थनाइस क्रम से पूजा करना श्रद्धापूर्वक और व्यवस्थित विधान रहेगा।


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