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🪔 ऋषि पंचमी व्रत-कथा पूजा विधि 15sep 2026

🌿 ऋषि पंचमी व्रत-कथा प्राचीन समय में विदर्भ देश में एक सदाचारी ब्राह्मण सुमित्र अपनी पत्नी जयश्री के साथ रहता था। दोनों धर्मपरायण थे। उनके एक पुत्र और एक पुत्री थी। एक दिन ब्राह्मण की पुत्री से रजस्वला-अवस्था में अनजाने में धार्मिक नियमों का उल्लंघन हो गया। कुछ समय बाद उसके शरीर पर कष्टदायक प्रभाव दिखाई देने लगे। माता-पिता चिंतित हुए और विद्वान ऋषियों से इसका कारण पूछा। ऋषियों ने बताया कि रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए आचार-दोष के परिमार्जन के लिए ऋषि पंचमी व्रत करना चाहिए। भाद्रपद शुक्ल पंचमी को स्नान करके शुद्ध भाव से सप्तर्षियों तथा माता अरुंधती का पूजन, तर्पण और व्रत-कथा का श्रवण करना चाहिए। पुत्री ने श्रद्धापूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत किया। सप्तर्षियों का पूजन किया, उन्हें अर्घ्य एवं नैवेद्य अर्पित किया तथा अपने अज्ञानजनित दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना की। व्रत के प्रभाव से उसके पूर्वकृत दोषों का परिमार्जन हुआ और उसे शारीरिक तथा मानसिक शांति प्राप्त हुई। इसी कारण ऋषि पंचमी व्रत को ऋषियों के प्रति कृतज्ञता, शुद्ध आचरण और अज्ञानवश हुए दोषों के प्रायश्चित्त का व्रत माना जाता है...

आरती त्रिदेव - जय शिव ओंकारा” ॐ” में एकत्व

  त्रिदेव आरती — “ॐ” जय शिव ओंकारा ” (ॐ की महिमा एवं त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की आरती) ॐ ही सर्वव्यापी एक सत्य — ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव का प्रणव में एकत्व व्याख्याकार पण्डित विजेन्द्र कुमार तिवारी ‘ज्योतिष शिरोमणि’ Blogger • Astrologer • Palmist • Numerologist • Vāstu Consultant कुण्डली निर्माण एवं कुण्डली मिलान विशेषज्ञ ज्योतिष, हस्तरेखा, अंकशास्त्र एवं वास्तु के क्षेत्र में सन् 1972 से सतत अध्ययन एवं अनुभव विशेष सहयोग: डॉ. आर. दीक्षित एवं डॉ. एस. तिवारी मोबाइल: 9424446706 ***************************************************** ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्...

⭐15-June-2026 ⭐ 12 राशि • • नये वस्त्र-आभूषण • कार्य शुभ समय • उपाय⭐🌟 ग्रहों के प्रभाव एवं भविष्यवाणी – वैश्विक संदर्भ

  ⭐ 15-June-2026 ⭐ 12 राशि • • नये वस्त्र-आभूषण • कार्य शुभ समय • उपाय ⭐ 12 Zodiac • Grah Results • Naye Vastr-Abhushan • Auspicious Work Timing • Remedial Tips ⭐ Havan yagya Guidance Sun.Mercury&Venus Effect till 11ajun (BILINGWAL).( IPLSpecial ) । ⚠️ This horoscope is based on astrological calculations. Please consult an expert before making any decisions. 22 june tak- चावल अर्पित करें , तिल का दान करें , घर से निकलते समय दही का सेवन करें। मंत्र : ॐ सोमाय नमः॥ प्रभाव : कार्य सफलता , बुद्धि - वृद्धि , शुभ अवसर एवं मान - सम्मान। * 29 जून तक सूर्य मंत्र — “ ॐ मित्राय नमः ”; *********************************************************************************** ⭐ मार्गदर्शन — 16 जून 2026 ( आर्द्रा नक्षत्र प्रभाव आधारित मुहूर्त ) ⚠️ यह विवरण ज्योतिषीय गणना पर आधारित है। निर्णय से पूर्व विवेक एवं विशेषज्ञ सलाह आवश्यक है। 🌙 आज का खगोलीय स्वरूप आज द्वितीया तिथि , आर्द्रा नक्षत्र ( रुद्र तत्त्व प्रधान ) तथा मि...