नाग और मंत्र / मासवार Month-wise Naga /sarp & Mantras:shukl panchmi -vediokt mantr /shabar adhik prabhavi -9424446706 v.k.Tiwari
सर्पदंश-भय, सर्पभय, गृह-सुरक्षा, परिवार-सुख और नागदोष-शान्ति”
सर्प मंत्र (सर्प सूक्तम)
ऋग्वेद (ऋग्वेद खिलेषु/खिल भाग) और यजुर्वेद (जैसे तैत्तिरीय संहिता) से संबंधित है।
(श्री"ॐ नमो अस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु।
ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥" [1]
· पृथ्वी, अंतरिक्ष और आकाश में, तथा सूर्य की किरणों और जल में निवास करने वाले सभी सर्पों को हमारा बारंबार प्रणाम हो
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· १. वैदिक सर्पसूक्त — “नमोऽस्तु सर्पेभ्यो…”
· मूल वैदिक स्रोत: कृष्ण यजुर्वेद —
· तैत्तिरीय संहिता, काण्ड 4, प्रपाठक 2, अनुवाक 8 (4.2.8)।
·
· नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ।
येऽन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· येऽदो रोचने दिवो ये वा सूर्यस्य रश्मिषु ।
येषामप्सु सदः कृतं तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· या इषवो यातुधानानां ये वा वनस्पतीꣳरनु ।
ये वा वटेषु शेरते तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· देवता: सर्पाः / सर्पदेवताः — पृथिवी, अन्तरिक्ष, द्युलोक, सूर्यरश्मि, जल, वनस्पति और वट आदि में स्थित सर्प-शक्तियों को नमस्कार।
· ऋग्वेद-खिलानि 2.14 — सर्प-रक्षा एवं सुख हेतु मंत्र
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· अजगर, कालिय, कर्कोटक आदि सर्पों से संबंधित ऋग्वेद-खिलानि 2.14 के मंत्र सर्पभय तथा सर्पजनित बाधाओं से रक्षा, शान्ति और कल्याण की प्रार्थना के लिए प्रयुक्त परंपरा में आते हैं।
· १. सर्प-रक्षा मंत्र
· ॐ नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ।
येऽन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· अर्थ: पृथ्वी, अन्तरिक्ष और द्युलोक में स्थित सभी सर्पों को नमस्कार है। वे हमारे प्रति शान्त एवं अनुकूल रहें और हमें सर्पभय से रक्षा प्राप्त हो।
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· ग्रंथ: कृष्ण यजुर्वेद — तैत्तिरीय संहिता 4.2.8।
यह मंत्र ऋग्वेद-खिलानि 2.14 का मूल मंत्र कहकर न लिखें; दोनों पाठ-परंपराओं को अलग रखना चाहिए।
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· २. सर्प-शान्ति एवं सुख हेतु
· येऽदो रोचने दिवो ये वा सूर्यस्य रश्मिषु ।
येषामप्सु सदः कृतं तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· अर्थ: जो सर्प द्युलोक के प्रकाशमय प्रदेशों में, सूर्य की किरणों में अथवा जल में निवास करते हैं, उन सभी को नमस्कार। वे शान्त रहें और जीवन में भय-बाधा न उत्पन्न करें।
· ग्रंथ: तैत्तिरीय संहिता 4.2.8
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· ३. वन एवं निवास-स्थान की रक्षा हेतु
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· या इषवो यातुधानानां ये वा वनस्पतीꣳरनु ।
ये वा वटेषु शेरते तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥
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· अर्थ: जो सर्प वनस्पतियों तथा वटवृक्षों में निवास करते हैं, उन सभी सर्पों को नमस्कार। उनसे रक्षा, शान्ति और निर्भयता प्राप्त हो।
· ग्रंथ: तैत्तिरीय संहिता 4.2.8
ऋग्वेद-खिलानि 2.14 — सर्प-संबंधी खिल-मंत्र; इसमें कालिय, अजगर, कर्कोटक आदि सर्पों का वर्णन तथा सर्प-नमस्कार मंत्रों है।
शाबर सर्प-रक्षा:
“हुं क्षूं ठः ठः।” — लोक-प्रचलित सर्पभय-नाशक शाबर मंत्र।
गरुड़-आज्ञा शाबर मंत्र:
“ओइम् ह्रीं ह्रीं गरुड़ाज्ञा ठः ठः।” — लोक-प्रचलित सर्पभय-नाशक प्रयोग।
🌿 नाग पंचमी – Naag Panchami Puja (सांप देवता आराधना)
1️⃣ प्रस्तावना – Introduction
हिंदी:
नाग पंचमी को विशेष रूप से नागदेवताओं की पूजा की जाती है। इस दिन नागों की उपासना से धन, संतान सुख, रोग निवारण, सुरक्षा, आयु और सफलता की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि यह दिन विशेष रूप से सर्प दोष, राहु/केतु, या जन्मकुंडली में शनि/सर्प संबंधी दोष वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
English:
Naag Panchami is dedicated to worshipping the serpent deities. Observing rituals on this day brings wealth, progeny, disease cure, protection, longevity, and success. Scriptures emphasize that it is especially beneficial for individuals with Sarpa Dosh, Rahu/Ketu afflictions, or Shani/serpent-related doshas in their horoscope.
2️⃣ नाग पूजा हेतु आवश्यक राशियाँ – Rashi for Special Benefit
| Rashi / Zodiac | लाभ | Benefit |
|---|---|---|
| Vrishabha / Taurus | धन, संपत्ति की वृद्धि | Wealth enhancement |
| Mithun / Gemini | संतान सुख | Progeny and family harmony |
| Vrishchik / Scorpio | रोग निवारण, शारीरिक सुरक्षा | Health & protection from diseases |
| Dhanu / Sagittarius | सुरक्षा, लंबी आयु | Safety and longevity |
| Kumbh / Aquarius | सफलता, कार्य सिद्धि | Career success & achievements |
ध्यान दें: ये राशियाँ शास्त्रीय दृष्टि से विशेष रूप से लाभप्रद मानी गई हैं।
3️⃣ शास्त्रीय श्लोक और अर्थ – Classical Shloka & Meaning
श्लोक (Bold Font, बड़े अक्षरों में):
“ऊँ नागानां महामन्त्रः सर्वसिद्धिफलं ददाति।
नमो नागाय भस्मभूषिताय वासुकयै नमः॥”
अर्थ (Meaning):
इस मंत्र का जप करने से सभी प्रकार की समस्याएँ, विशेष रूप से सर्पदंश, धन-संपत्ति, संतान सुख, रोग, सुरक्षा, और जीवन में सफलता में वृद्धि होती है।
4️⃣ पूजन विधि – Ritual Method
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स्थान: घर के पूजा कक्ष या शुद्ध मंदिर में।
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सामग्री: नाग तस्वीर/सांप का प्रतिमा, दूध, फूल, चावल, हल्दी, सेंधा नमक, दीपक (सफ़ेद या हरा)।
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समय:
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अशुभ समय से बचें: राहु काल (07:40–09:11 AM), यमघंट (10:42 AM–12:13 PM)
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पूजन विधि:
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दीप प्रज्वलित करें।
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नाग प्रतिमा के समक्ष दूध, जल, पुष्प और हल्दी अर्पित करें।
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ऊँ नमो नागाय मंत्र का 108 बार जप करें।
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अगर संतान सुख चाहते हैं → सिंहासन या चन्द्रमा प्रतिमा के साथ पूजा करें।
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आराधना के बाद प्रसाद व जल नदी/सिंचाई स्थल में विसर्जित करें।
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5️⃣ विशेष लाभ – Specific Benefits
| उद्देश्य / Purpose | लाभ / Benefit |
|---|---|
| धन-संपत्ति | व्यापार और नौकरी में वृद्धि |
| संतान सुख | संतान सुख व गृहस्थ जीवन में सुख |
| रोग निवारण | शारीरिक रोग और मानसिक तनाव से मुक्ति |
| सुरक्षा | शत्रु, दुर्घटना और दुर्घटनाओं से सुरक्षा |
| आयु | दीर्घायु और जीवन में स्थिरता |
| सफलता | कार्य, शिक्षा और व्यवसाय में सफलता |
2️⃣ मासवार नाग और मंत्र / Month-wise Naga & Mantras:
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चैत्र / Chaitra: वासुकी नाग / Vasuki Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Vasukaye Namah
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लाभ / Benefits: घर में संपत्ति, संतान सुख / Wealth and progeny
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वैशाख / Vaishakh: तक्शक नाग / Takshaka Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Takshakaya Namah
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लाभ / Benefits: विष, रोग और शत्रु से सुरक्षा / Protection from poison, diseases, enemies
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ज्येष्ठ / Jyeshtha: पद्म नाग / Padma Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Padmaya Namah
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लाभ / Benefits: धन और समृद्धि / Wealth and prosperity
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आषाढ़ / Ashadha: धृतनाग / Dhritanaga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Dhritanagaya Namah
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लाभ / Benefits: घर की सुरक्षा और शांति / Home protection and peace
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श्रावण / Shravan: अनंत नाग / Ananta Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Anantaya Namah
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लाभ / Benefits: दीर्घायु और संतान सुख / Longevity and progeny
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भाद्रपद / Bhadrapad: कुलिक नाग / Kulik Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Kulikaya Namah
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लाभ / Benefits: रोग निवारण और संपत्ति / Disease protection and wealth
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आश्विन / Ashwin: महापद्म / Manasa नाग / Mahapadma & Manasa Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Mahapadmaya Namah / Om Manasaya Namah
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लाभ / Benefits: संतान सुख और समृद्धि / Progeny and prosperity
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कार्तिक / Kartik: कर्कोटक नाग / Karkotaka Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Karkotakaya Namah
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लाभ / Benefits: घर की सुरक्षा और धन / Home protection and wealth
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मार्गशीर्ष / Margashirsha: शंखपाल नाग / Shankhapala Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Shankhapalaya Namah
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लाभ / Benefits: शत्रु नाश और समृद्धि / Destroy enemies and prosperity
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पौष / Paush: धृतनाग / Dhritanaga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Dhritanagaya Namah
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लाभ / Benefits: रोग निवारण और सुरक्षा / Disease protection and safety
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माघ / Magha: अनंत नाग / Ananta Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Anantaya Namah
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लाभ / Benefits: संतान सुख और शांति / Progeny and peace
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फाल्गुन / Phalguna: शंखपाल नाग / Shankhapala Naga
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Shankhapalaya Namah
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लाभ / Benefits: धन और समृद्धि / Wealth and prosperity
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1️⃣ मासवार पूजन विवरण – नाग और देवता
| माह | नाग / देवता | मंत्र (Mantra) | विशेषता / फल |
|---|---|---|---|
| चैत्र | वासुकी नाग | 🕉️ Om Vasukaye Namah | घर में संपत्ति और संतान सुख |
| वैशाख | तक्शक नाग | 🕉️ Om Takshakaya Namah | रोग, विष और शत्रु से रक्षा |
| ज्येष्ठ | पद्म नाग | 🕉️ Om Padmaya Namah | धन और समृद्धि |
| आषाढ़ | धृतनाग | 🕉️ Om Dhritanagaya Namah | घर की सुरक्षा और शांति |
| श्रावण | अनंत नाग | 🕉️ Om Anantaya Namah | दीर्घायु और संतान सुख |
| भाद्रपद | कुलिक नाग | 🕉️ Om Kulikaya Namah | रोग निवारण और संपत्ति |
| आश्विन | महापद्म नाग / मनसा नाग | 🕉️ Om Mahapadmaya Namah / Om Manasaya Namah | संतान सुख, समृद्धि |
| कार्तिक | कर्कोटक नाग | 🕉️ Om Karkotakaya Namah | घर की सुरक्षा और धन |
| मार्गशीर्ष | शंखपाल नाग | 🕉️ Om Shankhapalaya Namah | शत्रु नाश और समृद्धि |
| पौष | धृतनाग | 🕉️ Om Dhritanagaya Namah | रोग निवारण और सुरक्षा |
| माघ | अनंत नाग | 🕉️ Om Anantaya Namah | संतान सुख और शांति |
| फाल्गुन | शंखपाल नाग | 🕉️ Om Shankhapalaya Namah | धन और समृद्धि |
3️⃣ विशेष देवता पूजन / Special Deity Worship:
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सरस्वती देवी / Goddess Saraswati:
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मास / Month: चैत्र और आश्विन / Chaitra & Ashwin
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मंत्र / Mantra: 🕉️ Om Saraswatyai Namah
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लाभ / Benefits: विद्या, बुद्धि, शिक्षा में सफलता / Success in knowledge, intellect, education
मनसा देवी द्वादशनाम — नागभय निवारण-
( ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति-खण्ड, अध्याय 46, श्लोक 130)
ॐ नमो मनसायै।
जरत्कारु जगद्गौरी मनसा सिद्ध योगिनी।
वैष्णवी नाग भगिनी शैवी नागेश्वरी तथा ॥जरत्कारु प्रियाऽऽस्तीक माता विष हरीति च।
महाज्ञान युता चैव सा देवी विश्व पूजिता ॥अर्थ: मनसा देवी के जरत्कारु, जगद्गौरी, सिद्धयोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जरत्कारुप्रिया, आस्तीकमाता, विषहरी और महाज्ञानयुता आदि नामों का स्मरण किया गया है। इनके पाठ से नागभय से रक्षा का फल बताया गया है।
श्री नाग स्तोत्र — मूल पाठ एवं सरल हिन्दी अर्थ
ॐ अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च ।
सुमन्तु र्जैमिनिश्चैव पञ्चैते वज्रवारकाः ॥ १ ॥अर्थ: अगस्त्य, पुलस्त्य, वैशम्पायन, सुमन्तु और जैमिनि—ये पाँच महर्षि वज्र से होने वाली बाधाओं के निवारक माने गए हैं। इनका स्मरण रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
मुनेः कल्याण मित्रस्य जैमिनेश्चापि कीर्तनात् ।
विद्युदग्नि भयं नास्ति लिखितं गृह मण्डले ॥ २ ॥अर्थ: कल्याणमित्र मुनि और जैमिनि ऋषि के नाम का स्मरण करने तथा इस स्तोत्र को घर के मंडल/पूजा-स्थान में लिखने से बिजली और अग्नि के भय से रक्षा होने की मान्यता कही गई है।
अनन्तो वासुकिः पद्मो महापद्मश्च तक्षकः ।
कुलीरः कर्कटः शङ्खश्चाष्टौ नागाः प्रकीर्तिताः ॥ ३ ॥अर्थ: अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख—ये आठ प्रमुख नाग बताए गए हैं। इनका स्मरण नागदेवताओं की स्तुति एवं संरक्षण के लिए किया जाता है।
यत्राहिशायी भगवान् यत्रास्ते हरिरीश्वरः ।
भङ्गो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा ॥ ४ ॥अर्थ: जहाँ भगवान् श्रीहरि शेषनाग पर शयन करते हैं, जहाँ स्वयं हरि भगवान् विराजमान हैं, वहाँ इन्द्र के वज्र की शक्ति भी निष्फल हो जाती है; फिर साधारण शूल अथवा अन्य बाधा की वहाँ क्या सामर्थ्य है।
पाठ का मुख्य फलार्थ
इस स्तोत्र में ऋषियों तथा अष्टनागों का स्मरण करके नागभय, अग्निभय, विद्युत्भय तथा विभिन्न आकस्मिक बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना की गई है। अंतिम श्लोक में श्रीहरि और शेषनाग की दिव्य सत्ता को सर्वोच्च संरक्षण का आधार माना गया है।
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सूक्त
ब्रह्म लोकेषु ये सर्पाः शेषनागपुरोगमाः ।नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
इन्द्र लोकेषु ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाद्याः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
कद्रवेयश्च ये सर्पाः मातृ भक्ति परायणाः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
सत्य लोकेषु ये सर्पाः वासुकिना च रक्षिताः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
मलये चैव ये सर्पाः कर्कोटक प्रमुखाद्याः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
पृथिव्यां चैव ये सर्पाः ये साकेत वासिताः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति च । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
समुद्र तीरे ये सर्पाः ये सर्पा जल वासिनः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
रसातलेषु ये सर्पाः अनन्तादि महाबलाः । नमोस्तुतेभ्यः सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ॥
नाग को दूध अर्पण करने का शास्त्रीय आधार
नागपञ्चमी पर वास्तविक सर्प को दूध पिलाना और नागदेवता की प्रतिमा/चित्र को दूध अर्पित करना—इन दोनों को अलग रखना चाहिए। शास्त्रीय पूजा-विधि में मुख्यतः नाग-प्रतिमा, नाग-चित्र अथवा नागदेवता को दूध, दधि, अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करने का विधान मिलता है। वास्तविक सर्प को जबरन दूध पिलाना धार्मिक आवश्यकता नहीं है और सर्प के लिए हानिकारक भी हो सकता है।
गरुड़ पुराण के नागपञ्चमी-विधान में घर के दोनों ओर नाग की आकृति बनाकर अनन्त आदि महानागों का पूजन करने का उल्लेख मिलता है।
नारद पुराण में नाग-व्रत का संबंध सर्पभय एवं सर्पदंश से रक्षा से बताया गया है। परंपरागत विवरण में नाग को दूध अर्पण करने का विधान भी मिलता है।
दूध अर्पण का फल परंपरा में सर्पभय-शमन, नागदेवता की प्रसन्नता, परिवार की रक्षा और नागदोष/सर्पदोष की शान्ति से जोड़ा जाता है। लेकिन “दूध पिलाने से निश्चित रूप से कालसर्प दोष समाप्त होता है” ऐसा फल प्रत्येक मूल ग्रंथ में उसी शब्दों में लिखा है, ऐसा दावा नहीं करना चाहिए।
नाग-मंत्र
“Om Sarpaya Namah”
“Om Anantaya Namah”
“Om Vasukaye Namah”
“Om Nagaya Namah”
“Om Prithvidharaya Namah”नागपूजा में इन नाम-मंत्रों का प्रयोग प्रचलित है।
नाग सूक्त का प्रमुख मंत्र
“Brahmalokeshu ye sarpa Sheshanaga purogamah,
Namostu tebhyaḥ sarpebhyaḥ supreeto mama sarvada.”यह सर्प-सूक्त/नाग-स्तुति परंपरा में प्रचलित मंत्र है और नागदेवता की प्रसन्नता तथा सर्पभय-शान्ति के लिए पाठ किया जाता है।
मुख्य द्वार पर सर्प-चित्र का महत्व
गरुड़ पुराण से संबंधित नागपञ्चमी-विधान में गृह-द्वार के दोनों ओर नाग की आकृति बनाकर अनन्त आदि नागों की पूजा का उल्लेख मिलता है।
इसलिए मुख्य द्वार के दोनों पार्श्वों पर नाग-चित्र लगाने की परंपरा का मूल उद्देश्य नागदेवता का आवाहन, पूजन और सर्पभय से रक्षा की धार्मिक भावना है। आधुनिक वास्तु-व्याख्याओं में इसे घर की रक्षा एवं मंगल से जोड़ा जाता है, लेकिन इसे स्वतंत्र प्राचीन वास्तु-सूत्र के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
किस रंग का नाग-चित्र रखें?
पीला/हल्दी रंग — नागपञ्चमी के लिए सबसे उपयुक्त पारंपरिक विकल्प।
लाल/गेरुआ — पूजा एवं शक्ति-भावना के लिए।
चन्दन का हल्का पीला/सफेद — सात्त्विक एवं शांतिपूर्ण विकल्प।
हरा — नाग-प्रकृति से प्रतीकात्मक रूप से जुड़ा रंग, परंतु इसे अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं कहा जा सकता।
काला नाग-चित्र — भयावह अथवा अत्यधिक उग्र आकृति के रूप में घर के मुख्य द्वार पर लगाने से बचना बेहतर है।विशेष रूप से: यदि नागपञ्चमी के दिन द्वार पर चित्र बनाना हो तो हल्दी/चन्दन से पीला नाग, अथवा गेरू से नाग-युगल बनाना पारंपरिक रूप से अधिक उचित है। वास्तविक सर्प को दूध पिलाने के बजाय नाग-प्रतिमा/चित्र को दूध अर्पित करें।
द्वार पर नाग-चित्र कब बनाना चाहिए — ग्रंथ प्रमाण
गरुड़ पुराण, व्रत-विधान में नाग-पञ्चमी के संबंध में स्पष्ट निर्देश मिलता है कि शुक्ल पक्ष की पंचमी को घर के द्वार के दोनों ओर नागों के चित्र बनाकर उनका नामपूर्वक आवाहन और पूजन किया जाए। उपलब्ध अनुवाद में यह विधान भाद्रपद शुक्ल पंचमी के संदर्भ में दिया गया है।
श्लोक/विधान का अर्थ:
“The pictures of these celestial serpents should be drawn on each side of the door of the house under the auspices of the fifth phase of the moon’s increase…” — अर्थात शुक्ल पंचमी के दिन घर के प्रवेश-द्वार के दोनों ओर नागों की आकृतियाँ बनाकर उनका आवाहन एवं पूजन किया जाए। उसी विधान में नाग-चित्रों को दूध और घी अर्पित करने का उल्लेख है तथा इसे सर्पदंश के भय से रक्षा से जोड़ा गया है।किस समय बनाएं?
ग्रंथ में घड़ी-मिनट का कोई निश्चित समय नहीं दिया गया है। इसलिए “सूर्योदय से पहले ही बनाना चाहिए” अथवा कोई निश्चित घंटे का समय गरुड़ पुराण का श्लोक बताकर नहीं लिखना चाहिए।
शास्त्रीय रूप से सही क्रम है:
स्नान → शुद्धि → संकल्प → नाग-चित्र निर्माण → आवाहन → पूजन।
आज 17 अगस्त 2026 की नागपञ्चमी में पंचमी तिथि लगभग 16 अगस्त 2026, 16:55 से 17 अगस्त 2026, 17:00 तक बताई गई है। अतः 17 अगस्त को पंचमी रहते हुए प्रातःकाल पूजा करना उचित है।
नाग का चित्र किससे बनाएं?
नागपञ्चमी की प्रचलित पूजाविधि में हल्दी-मिश्रित चन्दन से दीवार अथवा पूजा-पाट पर नाग अथवा नवनागों का चित्र बनाने का स्पष्ट निर्देश मिलता है।
अतः मुख्य द्वार के दोनों पार्श्वों पर हल्दी-मिश्रित चन्दन से नाग बनाना सबसे उपयुक्त है। गेरू/रक्तचन्दन की परंपरा भी कुछ क्षेत्रों में मिलती है।
चित्र बनाते समय कौन-सा मंत्र बोलें?
सबसे सरल और सीधे पूजन में प्रयुक्त मंत्र:
“Om Anantadim Nagadevataabhyo Namah.”
अर्थ — अनन्त आदि समस्त नागदेवताओं को नमस्कार।
नवनागों का अलग-अलग आवाहन करना हो तो:
“Om Anantaya Namah. Anantam Avahayami.”
“Om Vasukaye Namah. Vasukim Avahayami.”
“Om Sheshaya Namah. Shesham Avahayami.”
“Om Shankhaya Namah. Shankham Avahayami.”
“Om Padmaya Namah. Padmam Avahayami.”
“Om Kambalaya Namah. Kambalam Avahayami.”
“Om Karkotakaya Namah. Karkotakam Avahayami.”
“Om Ashvataraya Namah. Ashvataram Avahayami.”
“Om Dhritarashtraya Namah. Dhritarashtram Avahayami.”
“Om Takshakaya Namah. Takshakam Avahayami.”
“Om Kaliyaya Namah. Kaliyam Avahayami.”
“Om Kapilaya Namah. Kapilam Avahayami.”यह क्रम नागपञ्चमी की पूजाविधि में दिया गया है।
चित्र बनाते समय विशेष नियम:
पहले नाग की आकृति बनाएं, फिर अक्षत लेकर “Om Anantadim Nagadevataabhyo Namah” कहकर आवाहन करें। उसके बाद गन्ध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। दूध चित्र/प्रतिमा को अर्पित किया जा सकता है; वास्तविक जीवित सर्प को दूध पिलाना आवश्यक शास्त्रीय कर्म नहीं है।
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