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Vastu द्वार पर शुभ चिन्ह Main Door lucky and remooval -vastu dosh

Vastu द्वार पर शुभ चिन्ह

-By V.K.Tiwari. (Horo ,Palm & Vastu.Since 1972-(Hospital,School More then 10thousand )

                                                     &

Dr .R.Dixit (vastu)

9424446706  Bangalore 560102

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📜 द्वार सज्जा एवं शुभ चिन्ह स्थापना — महत्त्व (Prastavna / Introduction)

  1. गृहद्वार देवप्रवेश स्थान माना गया है, अतः वहाँ शुभ चिन्ह, तोरण व सजावट करने से मंगल ऊर्जा प्रवेश करती है।
    Main entrance is considered the seat of divine entry; auspicious symbols invite positive energy.
  2. वास्तुशास्त्र अनुसार द्वार अलंकरण लक्ष्मी-आकर्षण का कारण तथा दरिद्रता एवं नकारात्मक स्पंदनों को दूर करता है।
    As per Vastu, doorway decoration attracts prosperity and reduces negative vibrations.
  3. “द्वारं शुभलक्षणयुक्तं कुर्यात्” — शुभ चिह्नयुक्त द्वार सौभाग्यवृद्धि करता है। (Mayamata)
    A doorway marked with auspicious symbols increases fortune.
  4. तोरण, स्वस्तिक, दीप एवं मंगल चिन्ह ग्रहदोष, दृष्टिदोष एवं वास्तुदोष शमन में सहायक बताए गए हैं।
    Sacred symbols help neutralize planetary, evil-eye, and Vastu defects.
  5. “अलंकृतं गृहद्वारं लक्ष्म्याः स्थैर्यकारणम्” — सुसज्जित प्रवेशद्वार से लक्ष्मी का स्थायित्व होता है। (Brihat Samhita)
    A decorated entrance stabilizes prosperity and harmony.
  6. इसलिए द्वार सज्जा केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि ऊर्जा शुद्धि, रक्षा और समृद्धि हेतु अनिवार्य मानी गई है।
    Thus, doorway decoration is not merely aesthetic but essential for protection, purification, and prosperity.
-📜 द्वार सज्जा एवं शुभ चिन्ह स्थापना — महत्त्व (Prastavna / Introduction)
  1. गृहद्वार देवप्रवेश स्थान माना गया है, अतः वहाँ शुभ चिन्ह, तोरण व सजावट करने से मंगल ऊर्जा प्रवेश करती है।
    Main entrance is considered the seat of divine entry; auspicious symbols invite positive energy.
  2. वास्तुशास्त्र अनुसार द्वार अलंकरण लक्ष्मी-आकर्षण का कारण तथा दरिद्रता एवं नकारात्मक स्पंदनों को दूर करता है।
    As per Vastu, doorway decoration attracts prosperity and reduces negative vibrations.
  3. “द्वारं शुभलक्षणयुक्तं कुर्यात्” — शुभ चिह्नयुक्त द्वार सौभाग्यवृद्धि करता है। (Mayamata)
    A doorway marked with auspicious symbols increases fortune.
  4. तोरण, स्वस्तिक, दीप एवं मंगल चिन्ह ग्रहदोष, दृष्टिदोष एवं वास्तुदोष शमन में सहायक बताए गए हैं।
    Sacred symbols help neutralize planetary, evil-eye, and Vastu defects.
  5. “अलंकृतं गृहद्वारं लक्ष्म्याः स्थैर्यकारणम्” — सुसज्जित प्रवेशद्वार से लक्ष्मी का स्थायित्व होता है। (Brihat Samhita)
    A decorated entrance stabilizes prosperity and harmony.
  6. इसलिए द्वार सज्जा केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि ऊर्जा शुद्धि, रक्षा और समृद्धि हेतु अनिवार्य मानी गई है।
    Thus, doorway decoration is not merely aesthetic but essential for protection, purification, and prosperity.

मुख्य द्वार पर शुभ चिन्ह लगाने की परंपरा के ग्रंथ प्रमाण,  तथा विभिन्न  देशों की परंपराएँ

🪔 1. वैदिक एवं पुराण प्रमाण (Hindu Scriptural References)

🔶 (A) स्कन्द पुराण प्रमाणस्वस्तिक मंगल चिन्ह

श्लोक

स्वस्तिकं मंगलं नित्यं लक्ष्म्याः स्थानं प्रकीर्तितम्।
यत्र स्वस्तिक चिन्हं स्यात् तत्र श्रीर्नित्यवासिनी॥

अर्थ
जहाँ स्वस्तिक चिन्ह स्थापित होता है, वहाँ लक्ष्मी का स्थायी निवास माना गया है और मंगल ऊर्जा बनी रहती है।

📖 ग्रंथ: Skanda Purana, Nagar Khanda (मंगल प्रतीक वर्णन)

🔶 (B) पद्म पुराणद्वार शुद्धि मंगल चिह्न

श्लोक

द्वारेषु मंगलं कुर्यात् चिन्हैः शुभफलप्रदैः।
ततो गृहं प्रविशन्ति देवाः सौख्यप्रदायकाः॥

अर्थ
मुख्य द्वार पर शुभ चिन्ह बनाने से देवतुल्य शुभ ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।

📖 ग्रंथ: Padma Purana, Srishti Khanda

🔶 (C) अथर्ववेदगृह सुरक्षा सिद्धांत

मंत्र

शं नो द्वारः शं नो अस्तु प्रवेशः।

अर्थ
हमारे द्वार से शुभता और सुरक्षा का प्रवेश हो।

📖 Atharva Veda 7.60

👉 वैदिक काल से द्वार को ऊर्जा प्रवेश बिंदु माना गया।

🔱 2. तांत्रिक ग्रंथ प्रमाण

रुद्रयामल तंत्र

श्लोक

द्वारदेशे शुभं चिन्हं रक्षार्थं विनियोजयेत्।

अर्थ
द्वार पर शुभ चिन्ह रक्षा कवच के रूप में स्थापित करना चाहिए।

तांत्रिक मत: चिन्ह = ऊर्जा यंत्र।

🪷 3. ज्योतिष शास्त्र प्रमाण

बृहत्संहिता (वराहमिहिर)

श्लोक

शुभ लक्षण युक्तं द्वारं धन धान्य विवर्धनम्।

अर्थ
शुभ चिह्नों से युक्त द्वार धन और सुख बढ़ाने वाला होता है।

📖 Brihat Samhita — Griha Lakshan Adhyaya

🕉 4. जैन धर्म प्रमाण

तत्त्वार्थ सूत्र व्याख्या

स्वस्तिक =
चार गति (देव, मनुष्य, तिर्यंच, नरक) का प्रतीक।

अर्थ
द्वार पर स्वस्तिक आत्मकल्याण शुभ कर्म प्रवेश का संकेत।

जैन मंदिरों में प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अनिवार्य।

5. बौद्ध धर्मशुभ चिन्ह (Bauddh Symbols)

अष्टमंगल (Eight Auspicious Symbols)

चिन्ह

अर्थ

स्वस्तिक

शुभ प्रवाह

युगल मीन

निर्भयता समृद्धि

धर्मचक्र

धर्म ऊर्जा

अनंत गाँठ

संतुलन

📖 ललितविस्तर सूत्र, महावस्तु

बौद्ध मान्यता:
द्वार पर शुभ प्रतीक = कर्म बाधा कम।

🌏 6. विदेशों में द्वार सुरक्षा परंपरा (Global Traditions)

🇯🇵 जापान (Shinto Tradition)

उपाय: Shimenawa Rope

  • पवित्र रस्सी द्वार पर बाँधी जाती है।
  • नकारात्मक आत्माओं को रोकने हेतु।

📖 Kojiki & Nihon Shoki ग्रंथ उल्लेख।

🇨🇳 चीन (Feng Shui)

Door Guardians (Menshen)

  • द्वार देवताओं की चित्र स्थापना।
  • Yin-Yang संतुलन।

📖 Feng Shui Classic — Zang Shu (Book of Burial)

लाल रंग द्वार = समृद्धि आकर्षण।

- तिब्बत

Prayer Symbols & Fish Symbol

  • युगल मीन = सौभाग्य
  • बुरी ऊर्जा प्रवेश रोकना।

🇦🇫 / मध्य एशिया / अफ्रीका

Protective Symbols

  • ज्यामितीय चिन्ह
  • सर्प या आँख प्रतीक

📖 African Tribal Spiritual Architecture Studies

विश्वास:
द्वार = आत्मिक सीमा (Spiritual Boundary)

🧿 7. सार्वभौमिक सिद्धांत (Common Principle Worldwide)

लगभग सभी संस्कृतियों में 3 समान नियम:

1.  द्वार ऊर्जा प्रवेश बिंदु है

2.  प्रतीक सुरक्षा कवच हैं

3.  लाल/पवित्र चिन्ह नकारात्मकता रोकते हैं

🪔 मुख्य द्वार चिन्ह व्यवस्था (शास्त्रीय मार्गदर्शन)

1 शास्त्रीय आधार (Why symbols on main door)

पौराणिक दृष्टि (Skanda Purana & Padma Purana)

  • स्वस्तिक को दैवी मंगल, लक्ष्मी आगमन एवं बाधा नाशक कहा गया है।
  • मुख्य द्वार को गृह का मुख माना गया हैयहीं से ऊर्जा प्रवेश करती है।
  • शुभ चिन्ह लगाने से
    • अलक्ष्मी प्रवेश नहीं करती
    • दुष्ट दृष्टि रुकती है
    • देव ऊर्जा स्थिर रहती है।

वैदिक दृष्टि

  • द्वार = ऊर्जा संक्रमण बिंदु (Energy Transition Point)
  • प्रतीक = बीज मंत्र का दृश्य रूप।
  • चिन्ह ग्रहों दिशाओं की तरंगों को संतुलित करते हैं।

तांत्रिक दृष्टि

  • द्वार पर चिन्ह = सुरक्षा कवच (Protective Yantric Seal)
  • नकारात्मक शक्तियाँ सीमा पार नहीं करतीं।

जैन परंपरा

  • स्वस्तिक = चार गति + आत्मोन्नति
  • क्षेम (कल्याण) एवं मंगल प्रवेश का प्रतीक।

ज्योतिष दृष्टिकोण

  • द्वार दिशा = ग्रह प्रभाव
  • चिन्ह = ग्रह संतुलन उपाय

🚪 2     द्वार की मूल संरचना (Door Specification)

  • दरवाज़ा आकार: 3 ft × 6 ft
  • सामग्री: लकड़ी श्रेष्ठ
  • दिशा: अंदर खुलने वाला शुभ
  • दहलीज (Threshold) अवश्य हो

🧭 3      कौन-सा चिन्ह कहाँ लगे (Correct Order)

🔶 मुख्य नियम

घर के बाहर खड़े होकर द्वार देखें।

LEFT SIDE (बाईं ओर)

👉 क्षेम (Kshem)
क्यों?

  • बायाँ भाग = चंद्र ऊर्जा
  • शांति, सुरक्षा, स्थिरता
  • परिवार रक्षा

अर्थ: “सुरक्षा एवं कल्याण

RIGHT SIDE (दाईं ओर)

👉 शुभ-लाभ (Shubh-Laabh)

क्यों?

  • दायाँ भाग = सूर्य ऊर्जा
  • सफलता, धन, अवसर

अर्थ:

  • शुभ = मंगल आरंभ
  • लाभ = समृद्धि

 

CENTER TOP (ऊपर मध्य)

👉 स्वस्तिक

क्यों?

  • ब्रह्म स्थान
  • चार दिशा संतुलन
  • देव प्रवेश संकेत

BELOW SWASTIK

👉 युगल मीन (Double Fish)

क्यों?

  • दांपत्य सुख
  • लक्ष्मी स्थिरता
  • जल तत्व संतुलन

LOWER SIDE (दोनों ओर नीचे)

👉 सर्प जोड़ा

क्यों?

  • तांत्रिक रक्षा
  • नकारात्मक ऊर्जा रोकना
  • राहु-केतु संतुलन

📐 4 ऊँचाई दूरी (Exact Placement)

दरवाज़ा ऊँचाई = 6 ft (72 inch)

चिन्ह

जमीन से दूरी

आकार

सर्प जोड़ा

12–15 inch

3–4 inch

शुभ-लाभ / क्षेम

36–40 inch

4–5 inch

युगल मीन

58 inch

4 inch

स्वस्तिक

64–66 inch

5–6 inch

👉 स्वस्तिक हमेशा सबसे ऊपर।

🎨 5 रंग नियम (Colours)

चिन्ह

रंग

स्वस्तिक

सिंदूर लाल / गेरुआ

शुभ लाभ

लाल + पीला

क्षेम

हल्दी पीला

युगल मीन

लाल या स्वर्ण

सर्प

हल्का काला या गेरुआ

काला स्वस्तिक नहीं।

🕰 6     कब लगाना चाहिए (Best Time / Lagna)

श्रेष्ठ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय पूर्व)
  • गुरुवार / शुक्रवार / सोमवार

शुभ लग्न

  • वृष
  • कर्क
  • सिंह
  • तुला

राहुकाल, अमावस्या रात्रि, ग्रहण समय नहीं।

 🔱 7      लगाने की विधि

1.  द्वार साफ करें।

2.  गंगाजल छिड़कें।

3.  हल्दी-कुमकुम मिश्रण बनाएं।

4.  दीपक जलाएँ।

5.  पहले स्वस्तिक बनाएं।

6.  फिर दाएँ शुभ-लाभ।

7.  बाएँ क्षेम।

8.  अंत में मीन सर्प।


🪷 8     आध्यात्मिक कारण (Deep Reason)

  • स्वस्तिक ब्रह्म ऊर्जा सक्रिय
  • शुभ लाभ भौतिक उन्नति
  • क्षेम सुरक्षा कवच
  • युगल मीन वैवाहिक संतुलन
  • सर्प जोड़ा अदृश्य रक्षा

👉 यह क्रम ऊर्जा प्रवाह को ऊपर से नीचे और बाहर से अंदर संतुलित करता है।

🔑 8. चिन्ह क्रम का शास्त्रीय तर्क

चिन्ह

कारण

स्वस्तिक

ब्रह्म ऊर्जा

शुभ-लाभ

भौतिक उन्नति

क्षेम

सुरक्षा

युगल मीन

दांपत्य संतुलन

सर्प

तांत्रिक रक्षा

ऊपर देव ऊर्जा
मध्य जीवन ऊर्जा
नीचे रक्षा ऊर्जा

📜 निष्कर्ष (Scriptural Summary)

  • वेद द्वार = शुभ प्रवेश
  • पुराण चिन्ह = लक्ष्मी निवास
  • तंत्र चिन्ह = रक्षा यंत्र
  • ज्योतिष ग्रह संतुलन
  • बौद्ध/जैन कर्म शुद्धि
  • विश्व परंपरा ऊर्जा सुरक्षा

👉 इसलिए मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीक लगाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सर्वसंस्कृतिक आध्यात्मिक सिद्धांत है।



रंग: स्वर्ण / लाल
आकार: 4–5 inch

मंत्र:

मत्स्यरूपाय नमः॥

स्थान:

  • स्वस्तिक के नीचे
  • ऊँचाई: 56–58 inch

कारण:
जल तत्व संतुलन गृह शांति।



  3. धर्मचक्र (Dharmachakra)

अर्थ: धर्म ऊर्जा, जीवन दिशा

रंग: स्वर्ण + नीला
आकार: 4 inch

मंत्र:

मणि पद्मे हुं॥

स्थान:

  • दाईं ओर (Right panel)
  • ऊँचाई: 38–40 inch

क्यों:
दायाँ भाग = कर्म एवं क्रिया शक्ति।

♾️ 4. अनंत गाँठ (Endless Knot)

  
अर्थ: संतुलन, दीर्घ संबंध, कर्म समन्वय

रंग: लाल / स्वर्ण
आकार: 4 inch

मंत्र:

प्रतीत्यसमुत्पादाय नमः॥

स्थान:

  • बाईं ओर (Left panel)
  • ऊँचाई: 38–40 inch

क्यों:
बायाँ भाग = चंद्र ऊर्जा संबंध स्थिरता।

- जापानShinto Tradition (Shimenawa Rope)

 

क्या है?

पवित्र रस्सी (Rice-straw rope) जो द्वार पर बाँधी जाती है।

ग्रंथ आधार: Kojiki, Nihon Shoki

उद्देश्य:

  • अशुद्ध ऊर्जा रोकना
  • पवित्र क्षेत्र घोषित करना

कैसे बाँधें (3×6 Door)

  • दरवाज़े के बाहरी ऊपरी भाग पर
  • चौखट के ठीक नीचे
  • ऊँचाई: 68–70 inch
  • हल्का U-shape

लंबाई: 3 ft (door width अनुसार)

मंत्र (शुद्धि हेतु):

अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।

🧭 वास्तु पूजन के बाद स्थापना क्रम

1.  द्वार धुलाई (गंगाजल)

2.  दीपक पूर्व दिशा में

3.  स्वस्तिक पहले

4.  फिर धर्मचक्र (Right)

5.  अनंत गाँठ (Left)

6.  युगल मीन

7.  अंत में Shimenawa बाँधें


🎨 राशि अनुसार रंग चयन

राशि

मुख्य रंग

मेष

लाल

वृष

सफेद/क्रीम

मिथुन

हरा

कर्क

चाँदी/सफेद

सिंह

स्वर्ण

कन्या

हल्का हरा

तुला

गुलाबी

वृश्चिक

गेरुआ

धनु

पीला

मकर

नीला

कुंभ

बैंगनी

मीन

हल्का पीला


📐 पूर्ण ऊँचाई नक्शा (3×6 Door Layout)

70"   Shimenawa Rope
65"  
Swastik
58"  
Double Fish
40"  
Dharma Wheel (Right)
40"  
Endless Knot (Left)
15"  
Protective area (optional serpent symbol)
0"   
Floor

🌍 सार्वभौमिक सिद्धांत (Common Energy Logic)

  • ऊपर देव ऊर्जा
  • मध्य जीवन संतुलन
  • किनारे कर्म संबंध
  • सीमा (rope) सुरक्षा आवरण

🪔 MAIN DOOR SACRED TRADITION

(Tantrik • Pauranik • Vedic • Jain • Jyotish View)

1       मुख्य द्वार का आध्यात्मिक महत्व

(Why Main Door Sacred)

🔱 वैदिक दृष्टिकोण

वेदों में द्वार को ऊर्जा प्रवेश बिंदु (Energy Gateway) माना गया है।

अथर्ववेद मंत्र

शं नो द्वारः शं नो अस्तु प्रवेशः।

अर्थ:
हमारे द्वार से केवल शुभता और कल्याण का प्रवेश हो।


📜 पौराणिक दृष्टिकोण

स्कन्द पुराण एवं पद्म पुराण में स्वस्तिक को दैवी मंगल चिन्ह कहा गया है।

श्लोक

Svastika magala nitya Lakmī-Gaapati-priyam
Yatra ti
ṣṭhati tatraiva nitya vasati sampada

Meaning:
Where the Swastika exists, Lakshmi and Ganapati reside and prosperity remains.

👉 इसलिए स्वस्तिक + शुभ-लाभ लिखना लक्ष्मी आगमन का संकेत माना गया।


🔮 तांत्रिक दृष्टिकोण

  • द्वार = ऊर्जा सीमा (Energy Threshold)
  • चिन्ह = यंत्र (Protective Seal)
  • नकारात्मक शक्तियाँ प्रवेश नहीं करतीं।

🪷 जैन दृष्टिकोण

  • स्वस्तिक = चार गति का प्रतीक
  • गृह प्रवेश = शुभ कर्म प्रारंभ।

  🪐 ज्योतिष दृष्टिकोण

  • द्वार दिशा = ग्रह प्रभाव
  • चिन्ह = ग्रह संतुलन उपाय।

 2       शुभ चिन्हों का अर्थ (Symbol Meaning)

चिन्ह

अर्थ

स्वस्तिक

दैवी ऊर्जा

शुभ

मंगल आरंभ

लाभ

धन सफलता

क्षेम

सुरक्षा स्थिरता

Shubh – Auspicious beginnings
Labh – Material & spiritual gains
Kshema – Safety & stability

 3        3×6 ft Door — Exact Placement System

Door Height = 72 inch

🔝 TOP (Divine Zone)

Swastika

  • Height: 64–66 inch
  • Size: 5–6 inch
  • Colour: Vermilion Red

Reason: Brahma energy activation.

🪢 Upper Frame

Sacred Boundary (Thread / Rope)

  • Height: 69–70 inch
  • Just below frame
  • Slight U shape

Reason: Energy protection boundary.

  🐟 Below Swastika

Double Fish

  • Height: 56–58 inch
  • Size: 4–5 inch
  • Colour: Gold

Reason: harmony & prosperity.

RIGHT SIDE DOOR

SHUBH – LABH

  • Height: 38–40 inch
  • Right panel

Why Right?

  • Right = Sun energy
  • Action, success, growth.

⬅️ LEFT SIDE DOOR

KSHEMA

  • Height: 38–40 inch
  • Left panel

Why Left?

  • Left = Moon energy
  • Protection, peace.

🐍 LOWER PROTECTION ZONE (Optional)

  • Height: 12–15 inch
  • Small protective symbols.

📊 VISUAL HEIGHT SCALE

72" Door Top
70"
Sacred Rope
65"
Swastika
58"
Double Fish
40"
Shubh-Labh (Right) | Kshema (Left)
15"
Protection Zone
0" 
Floor

4       Colours (Mandatory)

Symbol

Colour

Swastika

       Vermilion Red

Shubh-Labh

        Red + Yellow

Kshema

          Yellow

Fish

           Gold

Black colour avoided.

5         Which Direction — Extra Colour Support

Door Direction

Supporting Colour

East

Light Yellow

North

Green

West

White

South

Ochre / Red

6    Best Days 

Thursday
Friday
Abhijit Muhurat
Sunrise + 1 hour

Best Time / LagnaGood Lagna

  • Taurus
  • Cancer
  • Libra
  • Leo

Rahu Kaal avoided.

7    Writing / Pasting Method

1.  Clean door.

2.  Sprinkle Ganga water.

3.  Light lamp.

4.  Draw Swastika first.

5.  Write Shubh-Labh.

6.  Write Kshema.

7.  Offer incense.

8   Energy Logic (Why This Order Works)

  • Top Divine vibration
  • Middle Life harmony
  • Sides Action & protection
  • Bottom Shielding

यह व्यवस्था भारत, तिब्बत, जापान, चीन तथा अन्य संस्कृतियों में समान ऊर्जा सिद्धांत पर आधारित है।

 

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संतान को विकलांगता, अल्पायु से बचाइए श्राद्ध - पितरों से वरदान लीजिये पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी jyotish9999@gmail.com , 9424446706   श्राद्ध : जानने  योग्य   महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?  श्राद्ध से जुड़े हर सवाल का जवाब | पितृ दोष शांति? राहू, सर्प दोष शांति? श्रद्धा से श्राद्ध करिए  श्राद्ध कब करे? किसको भोजन हेतु बुलाएँ? पितृ दोष, राहू, सर्प दोष शांति? तर्पण? श्राद्ध क्या है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल एवं सबके सामर्थ्य की नहीं है, कोई उपाय ? श्राद्ध कब से प्रारंभ होता है ? प्रथम श्राद्ध किसका होता है ? श्राद्ध, कृष्ण पक्ष में ही क्यों किया जाता है श्राद्ध किन२ शहरों में  किया जा सकता है ? क्या गया श्राद्ध सर्वोपरि है ? तिथि अमावस्या क्या है ?श्राद्द कार्य ,में इसका महत्व क्यों? कितने प्रकार के   श्राद्ध होते   हैं वर्ष में   कितने अवसर श्राद्ध के होते हैं? कब  श्राद्ध किया जाना...

गणेश विसृजन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि

28 सितंबर गणेश विसर्जन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि किसी भी कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए जिस प्रकार उसका प्रारंभ किया जाता है समापन भी किया जाना उद्देश्य होता है। गणेश जी की स्थापना पार्थिव पार्थिव (मिटटीएवं जल   तत्व निर्मित)     स्वरूप में करने के पश्चात दिनांक 23 को उस पार्थिव स्वरूप का विसर्जन किया जाना ज्योतिष के आधार पर सुयोग है। किसी कार्य करने के पश्चात उसके परिणाम शुभ , सुखद , हर्षद एवं सफलता प्रदायक हो यह एक सामान्य उद्देश्य होता है।किसी भी प्रकार की बाधा व्यवधान या अनिश्ट ना हो। ज्योतिष के आधार पर लग्न को श्रेष्ठता प्रदान की गई है | होरा मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है।     गणेश जी का संबंध बुधवार दिन अथवा बुद्धि से ज्ञान से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों प्रतियोगियों एवं बुद्धि एवं ज्ञान में रूचि है , ऐसे लोगों के लिए बुध की होरा श्रेष्ठ होगी तथा उच्च पद , गरिमा , गुरुता , बड़प्पन , ज्ञान , निर्णय दक्षता में वृद्धि के लिए गुरु की हो रहा श्रेष्ठ होगी | इसके साथ ही जल में विसर्जन कार्य होता है अतः चंद्र की होरा सामा...

श्राद्ध रहस्य - श्राद्ध क्यों करे ? कब श्राद्ध नहीं करे ? पिंड रहित श्राद्ध ?

श्राद्ध रहस्य - क्यों करे , न करे ? पिंड रहित , महालय ? किसी भी कर्म का पूर्ण फल विधि सहित करने पर ही मिलता है | * श्राद्ध में गाय का ही दूध प्रयोग करे |( विष्णु पुराण ) | श्राद्ध भोजन में तिल अवश्य प्रयोग करे | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि - श्राद्ध अपरिहार्य - अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष तक पितर अत्यंत अपेक्षा से कष्ट की   स्थिति में जल , तिल की अपनी संतान से , प्रतिदिन आशा रखते है | अन्यथा दुखी होकर श्राप देकर चले जाते हैं | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि इसको नहीं करने से पीढ़ी दर पीढ़ी संतान मंद बुद्धि , दिव्यांगता .मानसिक रोग होते है | हेमाद्रि ग्रन्थ - आषाढ़ माह पूर्णिमा से /कन्या के सूर्य के समय एक दिन भी श्राद्ध कोई करता है तो , पितर एक वर्ष तक संतुष्ट/तृप्त रहते हैं | ( भद्र कृष्ण दूज को भरणी नक्षत्र , तृतीया को कृत्तिका नक्षत्र   या षष्ठी को रोहणी नक्षत्र या व्यतिपात मंगलवार को हो ये पिता को प्रिय योग है इस दिन व्रत , सूर्य पूजा , गौ दान गौ -दान श्रेष्ठ | - श्राद्ध का गया तुल्य फल- पितृपक्ष में मघा सूर्य की अष्टमी य त्रयोदशी को मघा नक्षत्र पर चंद्र ...

गणेश भगवान - पूजा मंत्र, आरती एवं विधि

सिद्धिविनायक विघ्नेश्वर गणेश भगवान की आरती। आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।  माता जा की पार्वती ,पिता महादेवा । एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।   मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी | जय गणेश जय गणेश देवा।  अंधन को आँख  देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया । जय गणेश जय गणेश देवा।   हार चढ़े फूल चढ़े ओर चढ़े मेवा । लड्डूअन का  भोग लगे संत करें सेवा।   जय गणेश जय गणेश देवा।   दीनन की लाज रखो ,शम्भू पत्र वारो।   मनोरथ को पूरा करो।  जाए बलिहारी।   जय गणेश जय गणेश देवा। आहुति मंत्र -  ॐ अंगारकाय नमः श्री 108 आहूतियां देना विशेष शुभ होता है इसमें शुद्ध घी ही दुर्वा एवं काले तिल का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण के अनुसार गायत्री-      मंत्र ओम महोत काय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। गणेश पूजन की सामग्री एक चौकिया पाटे  का प्रयोग करें । लाल वस्त्र या नारंगी वस्त्र उसपर बिछाएं। चावलों से 8पत्ती वाला कमल पुष्प स्वरूप बनाएं। गणेश पूजा में नार...

विवाह बाधा और परीक्षा में सफलता के लिए दुर्गा पूजा

विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन कर...

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश ...