सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मंत्र रामायण पाठ: लाभ,रामायण एवं अन्य जीवनोपयोगी

 

🕉 रामायणपाठ: लाभ

रामायण के कांडों का पाठ: लाभ, चौपाई/श्लोक, अर्थ, विधि सहित (प्रमाण सहित)

 1️        बालकांडबुद्धि, विद्या, संतान सुख के लिए

·                लाभ:

·         विद्या प्राप्ति

·         संतान सुख

·         विवाह में रही बाधा का निवारण

·         जीवन में शुभारंभ के लिए श्रेष्ठ

·         🔆 चौपाई:

"बंदउँ नावँ जानकी नायक। कृपालु दीनदयाल बिराजत।।"अर्थ:

मैं सीता के स्वामी, करुणामय, दीनों पर दया करने वाले श्रीराम के नाम की वंदना करता हूँ। यह नाम स्वयं मंगल का स्त्रोत है।

·         📿 पाठ विधि:

·         गुरुवार या सोमवार को आरंभ करें

·         पूजा स्थान स्वच्छ हो, पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें

·         घी का दीपक जलाएं, रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करें

·         एक या दो अध्याय प्रतिदिन करें

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         वाल्मीकि रामायण, सर्ग 1.1: "को न्वस्मिन्साम्प्रतं लोके गुणवान कश्च वीर्यवान..." उत्तम संतान के गुणों का वर्णन

2️ अयोध्या कांडपारिवारिक शांति राजनीति में सफलता

·               लाभ:

·         पारिवारिक सौहार्द

·         पुत्र-पिता संबंध में सुधार

·         राजनीति, प्रशासन, पद-स्थिरता में सहायता

·         🔆 चौपाई:

"सुनत जटायू वचन सुहाए। रघुपति बंधु समेत तेहि भाए।।"

·         🪔

श्रीराम लक्ष्मण ने जटायु के मधुर वचन सुने और उनसे प्रेमपूर्वक संवाद किया। यह दर्शाता है कि पारिवारिक एवं वृद्धजनों का आदर शुभ फल देता है।

·         📿 पाठ विधि:

·         मंगलवार या शुक्रवार को करें

·         व्रत सहित करें तो अधिक फलदायी

·         सपरिवार पाठ करना शुभ

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         वाल्मीकि रामायण, अयोध्या कांड: भरत का त्याग, श्रीराम की आज्ञा पालन नीतिधर्मराज्य की स्थापना की शिक्षा

3️        अरण्यकांडरोग, भय, शारीरिक दोष निवारण हेतु

·                 लाभ:

·         मानसिक शांति, भय नाश

·         ग्रह बाधा आत्मिक शुद्धि

·         🔆 चौपाई:

"जासु नाम जपि सुनि भवानी। बिमल करइ पावन मुनि ग्यानी।।"

·         🪔

हे भवानी! जिस श्रीराम के नाम का जप सुनकर भी ज्ञानी मुनि पावन हो जाते हैं, उस नाम का जप मनुष्य के समस्त भय हर लेता है।

·         📿 पाठ विधि:

·         शनिवार को करें

·         रोगियों के पास बैठकर सुनाना लाभकारी

·         हवन आदि के साथ करें तो विशेष फलदायी

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         स्कन्द पुराण, श्रीराम नाम माहात्म्य: “राम नामं वरं नाम, पाप नाशनं परम्

4️ किष्किंधा कांडमित्रता, नेतृत्व, सहयोग हेतु

·               लाभ:

·         सामाजिक सहयोग

·         साहस और आत्मबल की वृद्धि

·         🔆 चौपाई:

"सखा सोच त्यागहु बल मोरे। सब विधि घटि घटी मधु सोरे।।"

·         🪔

श्रीराम ने सुग्रीव से कहाहे मित्र! चिंता छोड़ो, मेरी शक्ति के रहते कोई विघ्न नहीं सकता। इससे आत्मविश्वास जाग्रत होता है।

·         📿 पाठ विधि:

·         बुधवार को करें

·         टीम कार्य, मित्र समस्या, संगठन आदि में सफलता हेतु

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         वाल्मीकि रामायण, किष्किंधा कांड: सुग्रीव-राम मित्रता, नीति शास्त्र समान व्यवहार

5️          सुंदरकांडसंकटमोचन, कोर्ट, नौकरी, कार्य सिद्धि

·            लाभ:

·         शत्रु नाश, भय निवारण, केस विजय

·         आर्थिक बाधा दूर

·         🔆 चौपाई:

"संकट से हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।"

·         🪔

जो व्यक्ति मन, वाणी और कर्म से हनुमान जी का ध्यान करता है, वह सभी संकटों से मुक्त होता है।

·         📿 पाठ विधि:

·         मंगलवार शनिवार श्रेष्ठ

·         घी का दीपक, गुड़ और चने का भोग

·         संपूर्ण सुंदरकांड एकसाथ पढ़ें या 7 दिन में समाप्त करें

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड: हनुमान जी का लंका प्रवेश, विजय, संकटहरण रूप वर्णन

·         स्कन्द पुराण, हनुमद उपाख्यान: सुंदरकांड पाठ सर्वश्रेष्ठ

6️         लंका कांडशत्रु बाधा, युद्ध विजय, शक्ति

·                  लाभ:

·         विरोधियों से मुक्ति

·         आत्मबल नेतृत्व

·         🔆 चौपाई:

"जिन्ह कें रामु बिरोध सन्हाए। भव सागर ते तरी जाई।।"

·         🪔

जिनका श्रीराम से विरोध होता है, वे भवसागर पार नहीं कर सकते।

 यह शत्रु के दमन और धर्म पर स्थित रहने का संदेश देता है।

·         📿 पाठ विधि:

·         मंगलवार को करें

·         यंत्र/मंत्र के साथ करें

·         विजय हेतु हनुमान जी की विशेष पूजा करें

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड: धर्म युद्ध की मर्यादा जीत का सत्य

7️                 उत्तरकांडवैराग्य, मोक्ष, आत्मकल्याण

·                लाभ:

·         मन की शांति, सांसारिक मोह से मुक्ति

·         साधना में प्रगति

·         🔆 चौपाई:

"रामचरित मानस सुनहिं जे लोग। होहिं सिद्ध करहिं मन संजोग।।"

·         🪔जो रामचरित मानस का पाठ करते हैं, वे अपने संकल्पों को सिद्ध करते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।

·         📿 पाठ विधि:

·         पूर्णिमा, अमावस्या या राम नवमी को करें

·         ध्यान, जप, मौन के साथ करें

·         📚 शास्त्रीय प्रमाण:

·         नारद पुराणरामकथा श्रवण, मोक्षप्रद

·         पद्म पुराणवैराग्य उत्पत्ति हेतु राम कथा श्रवण श्रेष्ठ

***************************************

"कौन से ग्रंथ में यह मंत्र या चौपाई 'भए प्रगट कृपाला...', पद-प्राप्ति या स्थानोन्नति हेतु लिखित रूप में वर्णित है?"

📌 स्पष्ट उत्तर:

👉 गोस्वामी तुलसीदास रचित "श्रीरामचरितमानस" में यह चौपाई राम जन्म के प्रसंग में आती है (बालकाण्ड दोहा 197 के पश्चात), परंतु वहाँ सीधा उल्लेख नहीं है कि यह "पद प्राप्ति हेतु" उपयोगी है।

🔍 इसका उपयोग पद प्राप्तिहेतु किसी मूल शास्त्रीय ग्रंथ में स्पष्ट रूप से लिखा नहीं गया है
जैसे:

  • वेद, उपनिषद, पुराण (रामायण, स्कंद, पद्म आदि),
  • स्मृति ग्रंथ (मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति),
  • अथवा कर्मकाण्डीय ग्रंथ (कौमुदी, कल्पसूत्र, अपराजितपृच्छा)
    में इसे सीधे "promotion / पद प्राप्ति" के लिए निर्दिष्ट नहीं किया गया।

    रामनाम महिमा

    “राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
    सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥”

    पद्म पुराण

    अर्थ: राम नाम का एक जप विष्णु सहस्रनाम के समान फल देता है।


    3. संकट नाश मंत्र

    “श्रीराम जय राम जय जय राम।”

    फल: भय, चिंता एवं मानसिक अशांति का नाश।


    4. शरणागति मंत्र

    “सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
    अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥”

    वाल्मीकि रामायण

    अर्थ: जो एक बार भी शरण आता है, उसे श्रीराम अभय देते हैं।


    🌼 अध्यात्म एवं भक्ति जीवन हेतु मंत्र

    5. पाप नाशक राम मंत्र

    “रामनामामृतं पीत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
    अध्यात्म रामायण

    अर्थ: रामनाम अमृत है, जो पापों से मुक्त करता है।


    6. शिव वचन — रामायण पाठ फल

    “रामायणं पठेद्यस्तु सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
    स्कन्द पुराण

    अर्थ: रामायण का पाठ पापों का नाश करता है।


    🌼 दैनिक जीवन में उपयोगी सार्वभौमिक मंत्र

    7. शांति मंत्र

    “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
    सर्वे सन्तु निरामयाः।”

    फल: परिवार एवं समाज में शांति।


    8. बुद्धि एवं ज्ञान मंत्र

    “ॐ गं गणपतये नमः।”

    फल: कार्य सिद्धि एवं बुद्धि वृद्धि।


    9. भय नाश मंत्र

    “ॐ नमः शिवाय।”

    फल: मानसिक स्थिरता एवं भय नाश।


    10. संरक्षण मंत्र

    “श्रीराम रक्षा सर्वदा।”

    फल: आध्यात्मिक सुरक्षा एवं आत्मबल।


  ✅        तो फिर यह प्रयोग कैसे प्रचलन में आया?

  1. लोकाचार एवं अनुकरणीय प्रयोग
    अनेक विद्वानों, साधकों व कर्मकाण्डियों ने इसे अनुभवजन्य फलप्रद मानते हुए राम नवमी के शुभ मुहूर्त, राजसत्त्व, और राम की मर्यादा-पुरुषोत्तम की सत्ता के कारण इसे पद लाभ हेतु उपयोग करना शुरू किया।
  2. राम जन्म का मुहूर्त अभिजित, नवमी, मध्याह्न
    👉 यह काल स्वयं शास्त्रों में "राज्य-प्राप्ति, शासन-लाभ, संतान-लाभ, प्रतिष्ठा-लाभ" हेतु सर्वोत्तम माना गया है।
    (Ref: "
    मुहूर्त चिंतामणि", "धर्मसिंधु", "निर्णयसिंधु")
  3. तन्त्र/अनुष्ठान परंपरा में सम्पुटों का विकास
    – "
    ॐ श्रीराम पदप्राप्तये नमः" जैसे मन्त्र आधुनिक या अनुभवजन्य संकल्पमूलक मंत्र हैं, जो निज अनुष्ठान के अनुसार साधक स्वयं संकल्प लेकर उपयोग करता है।
    ऐसे मन्त्र किसी विशिष्ट पुराण या मन्त्रसूत्र से नहीं उद्धृत होते हैं, बल्कि विधिवत सम्पुट के रूप में बनाए जाते हैं।

🛑 निष्कर्ष:

बिंदु

उत्तर

क्या "भए प्रगट कृपाला..." चौपाई किसी शास्त्र में पद प्राप्ति  हेतु दी गई है?

नहीं, सीधे किसी ग्रंथ में यह प्रयोग नहीं बताया गया।

क्या यह चौपाई श्रीरामचरितमानस में आती है?

हाँ, बालकाण्ड राम जन्म प्रसंग में आती है।

क्या इसे पद लाभ हेतु प्रयोग किया जा सकता है?

हाँ, अनुष्ठानिक और अनुभवजन्य  परंपरा में उपयोग होता है।

क्या "ॐ श्रीराम पदप्राप्तये नमः" कोई शास्त्रीय मंत्र है?

नहीं, यह संपीड़ित/संकल्प मूलक  समर्पण मंत्र है, विद्वानों द्वारा गढ़ा गया।

🔱 पद-प्राप्ति / राज्य-लाभ हेतु शास्त्रीय मंत्र-संग्रह

1. 🕉रामरक्षा स्तोत्र पद लाभ मंत्र

मंत्र:

"राजद्वारे पदं लभेत्॥"

📚 स्रोत: रामरक्षा स्तोत्र, श्लोक 26
🎯 फल: शासन, उच्च पद, प्रशासनिक सफलता
📖 अनुशंसा:
इस श्लोक का 11 या 21 बार पाठ कर, "श्रीराम रक्षा स्तोत्र" का संपूर्ण पाठ करें।
विशेषतः नवमी तिथि या रविवार को।


2. 🕉श्रीराम गायत्री मंत्र (शास्त्रसम्मत)

मंत्र:

"ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥"

📚 स्रोत: मन्त्ररत्नाकर, नारदपुराण
🎯 फल: उच्च पद, मंत्रीत्व, आत्मबल वृद्धि
📖 अनुशंसा:
प्रतिदिन 108 बार जप।
विशेष लाभ हेतु सूर्यग्रहण या राम नवमी पर 1008 जप।


3. 🕉राज्यप्राप्ति हेतु श्रीनारायण मंत्र (श्रीमद्भागवत)

मंत्र:

"ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय।"

📚 स्रोत: श्रीमद्भागवत महापुराण (10.3.22), विष्णुपुराण
🎯 फल: राज्यलाभ, मान-सम्मान, संरक्षण
📖 विधान:
विष्णु सहस्रनाम के साथ इस बीजमंत्र का जप करें।


4. 🕉राज्यलाभदायक सूर्य मंत्र (अथर्ववेद)

मंत्र:

"ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥"

📚 स्रोत: अथर्ववेद, सूर्योपनिषद
🎯 फल: राजसत्ता, नौकरी में उन्नति, तेज
📖 विधान:
प्रातः सूर्य को जल अर्पण करते समय 11 बार जप।
रविवार को विशेष प्रभावशाली।


5. 🕉राज्यप्राप्तिकर श्रीहरि स्तोत्र मंत्र (विष्णुधर्मोत्तर पुराण)

मंत्र:

"ॐ नमो नारायणाय राज्यं देहि मे स्वाहा॥"

📚 स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण
🎯 फल: पद-प्राप्ति, दरबार/प्रशासन में प्रतिष्ठा
📖 विधान:
यह मन्त्र 1008 बार ब्राह्म मुहूर्त में जपें।
पीले वस्त्र और विष्णु के समक्ष तुलसी से अर्चन करें।


6. 🕉चाणक्यनीति अनुसार राज्यसिद्धि मन्त्र (तांत्रिक)

मंत्र:

"ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं नमः स्वाहा॥"

📚 स्रोत: चाणक्य तंत्र, तांत्रिक प्रयोग
🎯 फल: राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक अधिकारियों हेतु
📖 नियम:
इस मन्त्र को 1 लाख बार सिद्ध कर, कोई भी कार्यारंभ करें।


7. 🕉शिवोपासना मंत्र शासनलाभ हेतु

मंत्र:

"ॐ नमः शिवाय श्रीमते शासनप्रदाय नमः॥"

📚 स्रोत: शिवमहापुराण
🎯 फल: अधिकारी पद प्राप्ति, न्यायिक क्षेत्र में सफलता
📖 विधान:
सोमवार को शिवलिंग पर जल से अभिषेक करते हुए 108 बार जप।


8. 🕉शास्त्रीय महाकाली मन्त्र (राज्य-विजय हेतु)

मंत्र:

"ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥"

📚 स्रोत: कालिकोपनिषद्, देवीमहात्म्य
🎯 फल: शत्रु नाश, सत्ता में प्रवेश
📖 नियम:
रात्रिकाल में, विशेष रूप से अमावस्या पर जप करें।
रक्षात्मक और अधिकार आधारित संस्थानों के लिए उत्तम।


🔔 कर्मकाण्डीय सुझाव:

📅 उपयुक्त दिन

🌟 विशेष प्रभाव

रविवार

सूर्य संबंधी पद लाभ हेतु

गुरुवार

गुरु-कृपा व न्याय क्षेत्र हेतु

नवमी तिथि

श्रीराम वंशजों के लिए उत्तम

पूर्णिमा

देवता पूजन हेतु श्रेष्ठ

पद-प्राप्ति / राज्यलाभ हेतु मंत्र एवं अनुष्ठान विधि संग्रह

यह संकलन शास्त्रों में प्रमाणित उन मंत्रों पर आधारित है, जो विशेष रूप से राज्य प्राप्ति, पदोन्नति, शासन, प्रशासन, और मान-सम्मान हेतु अनुशंसित हैं। प्रत्येक मंत्र के साथ संकल्प, जपविधि, न्यास, आसन, दिशा, संख्या, पूजन विधि तथा विशेष तिथियों का उल्लेख किया गया है।


1. रामरक्षा मंत्र – “राजद्वारे पदं लभेत्

- स्रोत: रामरक्षा स्तोत्र, श्लोक 26
-
संकल्प:श्रीरामचंद्र की कृपा से मुझे राजद्वार में प्रतिष्ठा, उच्च पद, शासनसत्ता प्राप्त हो।“ - जपसंख्या: प्रतिदिन 21 बार (विशेष: रविवार/नवमी को) - आसन: पीला कंबल या कुशासन - दिशा: पूर्वमुख - पूजन विधि: श्रीराम चित्र पर पुष्प, चंदन, धूप-दीप से पूजन। रामरक्षा स्तोत्र पूर्ण पाठ करें। अंत में विशेष मंत्र 11 बार:

राजद्वारे पदं लभेत्॥


2. श्रीराम गायत्री मंत्र

- मंत्र:ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” - स्रोत: मन्त्ररत्नाकर - संकल्प:राज्य, मंत्रीपद, प्रशासन में श्रीराम कृपा से पद प्राप्त हो।” - जपसंख्या: 108 या 1008 - आसन: पीला वस्त्र या ऊन का आसन - विशेष काल: राम नवमी / सूर्यग्रहण - हवन विधि: 108 आहुतियाँ स्वाहाके साथ। सामग्री तिल, गुड़, गाय का घी।


3. “ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दायमंत्र

- स्रोत: श्रीमद्भागवत (10.3.22) - संकल्प:श्रीगोविन्द कृपा से मुझे शासन, सुरक्षा व मान की प्राप्ति हो।” - जपसंख्या: 1008 बार रोज - पूजन विधि: विष्णु सहस्रनाम के साथ जप। - अनुष्ठान: 21 दिन का व्रत, पीले फूल अर्पित करें।


4. सूर्य मंत्र – “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

- स्रोत: सूर्योपनिषद, अथर्ववेद - संकल्प:सूर्यदेव के तेज से मुझे राज्यपद व उन्नति प्राप्त हो।” - जप विधि: प्रतिदिन प्रातः सूर्य को अर्घ्य देते समय 11 बार मंत्र जप। - अर्घ्य सामग्री: ताम्र पात्र में जल + लाल पुष्प + अक्षत - आसन: लाल कंबल


5. विष्णु मंत्र – “ॐ नमो नारायणाय राज्यं देहि मे स्वाहा

- स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण - संकल्प:भगवान विष्णु की कृपा से राज्य, प्रतिष्ठा, उच्चपद प्राप्त हो।” - जपसंख्या: 1008 बार 11 दिन तक - हवन विधि: 108 आहुतियाँ, सामग्री गोघृत, चावल, तिल। - पूजन: तुलसी पत्र से श्रीविष्णु का पूजन।


6. शिवमंत्र – “ॐ नमः शिवाय श्रीमते शासनप्रदाय नमः

- स्रोत: शिवमहापुराण - संकल्प:शिव कृपा से शासन/न्यायिक क्षेत्र में सफलता मिले।” - जप विधि: सोमवार को रुद्राभिषेक के बाद 108 बार जप। - पूजन: बिल्वपत्र, सफेद पुष्प अर्पण करें। जलाभिषेक करें।


7. कालिका मंत्र – “ॐ क्रीं कालिकायै नमः

- स्रोत: कालिकोपनिषद, देवीमहात्म्य - संकल्प:राज्य व विजय हेतु माँ काली की आराधना द्वारा शत्रु पर जय हो।” - जप विधि: अमावस्या रात्रि, दक्षिणाभिमुख हो जप करें। - आसन: काले कंबल पर - हवन: नीम की लकड़ी व तिल से करें।


8. चाणक्य मंत्र – “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं नमः स्वाहा

- स्रोत: चाणक्य तंत्र (तांत्रिक प्रयोग) - संकल्प:चातुर्य, वाक्शक्ति व प्रशासनिक कुशलता से उच्चपद प्राप्त हो।” - जप विधि: रात्रिकाल में 1 लाख जप सिद्धि हेतु - अनुष्ठान काल: 21 दिन, विशेषकर गुरु-पुष्य योग में आरंभ करें।

1. रामरक्षा स्तोत्र – "राजद्वारे पदं लभेत्"

  • स्रोत: यह श्लोक "रामरक्षा स्तोत्र" में वर्णित है।
  • उद्धरण: "राजद्वारे पदं लभेत्"
  • प्रमाण: यह श्लोक "रामरक्षा स्तोत्र" के श्लोक 26 में पाया जाता है।

2. श्रीराम गायत्री मंत्र

  • मंत्र: "ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥"
  • स्रोत: यह मंत्र विभिन्न स्रोतों में पाया जाता है, जिनमें "मन्त्ररत्नाकर" और अन्य वैदिक ग्रंथ शामिल हैं।
  • प्रमाण: यह मंत्र "राम गायत्री मंत्र" के रूप में प्रसिद्ध है और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।Facebook

3. "ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय"

  • स्रोत: यह मंत्र "श्रीकृष्ण द्वादशाक्षर मंत्र" के रूप में जाना जाता है।myNachiketa+1Facebook+1
  • प्रमाण: यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण के उपासकों द्वारा प्रयोग किया जाता है और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।

4. सूर्य बीज मंत्र – "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"

  • स्रोत: यह मंत्र "सूर्य उपनिषद" में वर्णित है, जो अथर्ववेद से संबंधित एक उपनिषद है।YouTube
  • प्रमाण: "सूर्य उपनिषद" में सूर्य देव की महिमा का वर्णन करते हुए यह मंत्र प्रस्तुत किया गया है।

5. "ॐ नमो नारायणाय राज्यं देहि मे स्वाहा"

  • स्रोत: यह मंत्र "विष्णुधर्मोत्तर पुराण" में वर्णित है।
  • प्रमाण: "विष्णुधर्मोत्तर पुराण" में भगवान विष्णु की उपासना से संबंधित विभिन्न मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।

6. "ॐ नमः शिवाय श्रीमते शासनप्रदाय नमः"

  • स्रोत: यह मंत्र "शिवमहापुराण" में वर्णित है।
  • प्रमाण: "शिवमहापुराण" में भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।

7. "ॐ क्रीं कालिकायै नमः"

  • स्रोत: यह मंत्र "कालिकोपनिषद" और "देवीमहात्म्य" में वर्णित है।
  • प्रमाण: "कालिकोपनिषद" और "देवीमहात्म्य" में देवी काली की उपासना से संबंधित विभिन्न मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।

8. "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं नमः स्वाहा"

  • स्रोत: यह मंत्र "चाणक्य तंत्र" में वर्णित है।
  • प्रमाण: "चाणक्य तंत्र" में विभिन्न तांत्रिक मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।

 

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

श्राद्ध की गूढ़ बाते ,किसकी श्राद्ध कब करे

श्राद्ध क्यों कैसे करे? पितृ दोष ,राहू ,सर्प दोष शांति ?तर्पण? विधि             श्राद्ध नामा - पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी श्राद्ध कब नहीं करें :   १. मृत्यु के प्रथम वर्ष श्राद्ध नहीं करे ।   २. पूर्वान्ह में शुक्ल्पक्ष में रात्री में और अपने जन्मदिन में श्राद्ध नहीं करना चाहिए ।   ३. कुर्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति अग्नि विष आदि के द्वारा आत्महत्या करता है उसके निमित्त श्राद्ध नहीं तर्पण का विधान नहीं है । ४. चतुदर्शी तिथि की श्राद्ध नहीं करना चाहिए , इस तिथि को मृत्यु प्राप्त पितरों का श्राद्ध दूसरे दिन अमावस्या को करने का विधान है । ५. जिनके पितृ युद्ध में शस्त्र से मारे गए हों उनका श्राद्ध चतुर्दशी को करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवारजनों पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं ।           श्राद्ध कब , क्या और कैसे करे जानने योग्य बाते           किस तिथि की श्राद्ध नहीं -  १. जिस तिथी को जिसकी मृत्यु हुई है , उस तिथि को ही श्राद्ध किया जाना चा...

रामचरितमानस की चौपाईयाँ-मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक (ramayan)

*****मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक रामचरितमानस की चौपाईयाँ-       रामचरितमानस के एक एक शब्द को मंत्रमय आशुतोष भगवान् शिव ने बना दिया |इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या के लिए सुन्दरकाण्ड या कार्य उद्देश्य के लिए लिखित चौपाई का सम्पुट लगा कर रामचरितमानस का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं | -सोमवार,बुधवार,गुरूवार,शुक्रवार शुक्ल पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष दशमी से कृष्ण पक्ष पंचमी तक के काल में (चतुर्थी, चतुर्दशी तिथि छोड़कर )प्रारंभ करे -   वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को स्मरण कर  इनका सम्पुट लगा कर पढ़े या जप १०८ प्रतिदिन करते हैं तो ११वे दिन १०८आहुति दे | अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा , २॰ तिल , ३॰ शुद्ध घी , ४॰ चीनी , ५॰ अगर , ६॰ तगर , ७॰ कपूर , ८॰ शुद्ध केसर , ९॰ नागरमोथा , १०॰ पञ्चमेवा , ११॰ जौ और १२॰ चावल। १॰ विपत्ति-नाश - “ राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।। ” २॰ संकट-नाश - “ जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं ना...

दुर्गा जी के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए?

दुर्गा जी   के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों   के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए ? अभिषेक किस पदार्थ से करने पर हम किस मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं एवं आपत्ति विपत्ति से सुरक्षा कवच निर्माण कर सकते हैं | दुर्गा जी को अर्पित सामग्री का विशेष महत्व होता है | दुर्गा जी का अभिषेक या दुर्गा की मूर्ति पर किस पदार्थ को अर्पण करने के क्या लाभ होते हैं | दुर्गा जी शक्ति की देवी हैं शीघ्र पूजा या पूजा सामग्री अर्पण करने के शुभ अशुभ फल प्रदान करती हैं | 1- दुर्गा जी को सुगंधित द्रव्य अर्थात ऐसे पदार्थ ऐसे पुष्प जिनमें सुगंध हो उनको अर्पित करने से पारिवारिक सुख शांति एवं मनोबल में वृद्धि होती है | 2- दूध से दुर्गा जी का अभिषेक करने पर कार्यों में सफलता एवं मन में प्रसन्नता बढ़ती है | 3- दही से दुर्गा जी की पूजा करने पर विघ्नों का नाश होता है | परेशानियों में कमी होती है | संभावित आपत्तियों का अवरोध होता है | संकट से व्यक्ति बाहर निकल पाता है | 4- घी के द्वारा अभिषेक करने पर सर्वसामान्य सुख एवं दांपत्य सुख में वृद्धि होती...

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें |

श्राद्ध क्या है ? “ श्रद्धया यत कृतं तात श्राद्धं | “ अर्थात श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म श्राद्ध है | अपने माता पिता एवं पूर्वजो की प्रसन्नता के लिए एवं उनके ऋण से मुक्ति की विधि है | श्राद्ध क्यों करना चाहिए   ? पितृ ऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाना अति आवश्यक है | श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम ? यदि मानव योनी में समर्थ होते हुए भी हम अपने जन्मदाता के लिए कुछ नहीं करते हैं या जिन पूर्वज के हम अंश ( रक्त , जींस ) है , यदि उनका स्मरण या उनके निमित्त दान आदि नहीं करते हैं , तो उनकी आत्मा   को कष्ट होता है , वे रुष्ट होकर , अपने अंश्जो वंशजों को श्राप देते हैं | जो पीढ़ी दर पीढ़ी संतान में मंद बुद्धि से लेकर सभी प्रकार की प्रगति अवरुद्ध कर देते हैं | ज्योतिष में इस प्रकार के अनेक शाप योग हैं |   कब , क्यों श्राद्ध किया जाना आवश्यक होता है   ? यदि हम   96  अवसर पर   श्राद्ध   नहीं कर सकते हैं तो कम से कम मित्रों के लिए पिता माता की वार्षिक तिथि पर यह अश्वनी मास जिसे क्वांर का माह    भी कहा ज...

श्राद्ध रहस्य प्रश्न शंका समाधान ,श्राद्ध : जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?

संतान को विकलांगता, अल्पायु से बचाइए श्राद्ध - पितरों से वरदान लीजिये पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी jyotish9999@gmail.com , 9424446706   श्राद्ध : जानने  योग्य   महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?  श्राद्ध से जुड़े हर सवाल का जवाब | पितृ दोष शांति? राहू, सर्प दोष शांति? श्रद्धा से श्राद्ध करिए  श्राद्ध कब करे? किसको भोजन हेतु बुलाएँ? पितृ दोष, राहू, सर्प दोष शांति? तर्पण? श्राद्ध क्या है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल एवं सबके सामर्थ्य की नहीं है, कोई उपाय ? श्राद्ध कब से प्रारंभ होता है ? प्रथम श्राद्ध किसका होता है ? श्राद्ध, कृष्ण पक्ष में ही क्यों किया जाता है श्राद्ध किन२ शहरों में  किया जा सकता है ? क्या गया श्राद्ध सर्वोपरि है ? तिथि अमावस्या क्या है ?श्राद्द कार्य ,में इसका महत्व क्यों? कितने प्रकार के   श्राद्ध होते   हैं वर्ष में   कितने अवसर श्राद्ध के होते हैं? कब  श्राद्ध किया जाना...

गणेश विसृजन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि

28 सितंबर गणेश विसर्जन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि किसी भी कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए जिस प्रकार उसका प्रारंभ किया जाता है समापन भी किया जाना उद्देश्य होता है। गणेश जी की स्थापना पार्थिव पार्थिव (मिटटीएवं जल   तत्व निर्मित)     स्वरूप में करने के पश्चात दिनांक 23 को उस पार्थिव स्वरूप का विसर्जन किया जाना ज्योतिष के आधार पर सुयोग है। किसी कार्य करने के पश्चात उसके परिणाम शुभ , सुखद , हर्षद एवं सफलता प्रदायक हो यह एक सामान्य उद्देश्य होता है।किसी भी प्रकार की बाधा व्यवधान या अनिश्ट ना हो। ज्योतिष के आधार पर लग्न को श्रेष्ठता प्रदान की गई है | होरा मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है।     गणेश जी का संबंध बुधवार दिन अथवा बुद्धि से ज्ञान से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों प्रतियोगियों एवं बुद्धि एवं ज्ञान में रूचि है , ऐसे लोगों के लिए बुध की होरा श्रेष्ठ होगी तथा उच्च पद , गरिमा , गुरुता , बड़प्पन , ज्ञान , निर्णय दक्षता में वृद्धि के लिए गुरु की हो रहा श्रेष्ठ होगी | इसके साथ ही जल में विसर्जन कार्य होता है अतः चंद्र की होरा सामा...

श्राद्ध रहस्य - श्राद्ध क्यों करे ? कब श्राद्ध नहीं करे ? पिंड रहित श्राद्ध ?

श्राद्ध रहस्य - क्यों करे , न करे ? पिंड रहित , महालय ? किसी भी कर्म का पूर्ण फल विधि सहित करने पर ही मिलता है | * श्राद्ध में गाय का ही दूध प्रयोग करे |( विष्णु पुराण ) | श्राद्ध भोजन में तिल अवश्य प्रयोग करे | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि - श्राद्ध अपरिहार्य - अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष तक पितर अत्यंत अपेक्षा से कष्ट की   स्थिति में जल , तिल की अपनी संतान से , प्रतिदिन आशा रखते है | अन्यथा दुखी होकर श्राप देकर चले जाते हैं | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि इसको नहीं करने से पीढ़ी दर पीढ़ी संतान मंद बुद्धि , दिव्यांगता .मानसिक रोग होते है | हेमाद्रि ग्रन्थ - आषाढ़ माह पूर्णिमा से /कन्या के सूर्य के समय एक दिन भी श्राद्ध कोई करता है तो , पितर एक वर्ष तक संतुष्ट/तृप्त रहते हैं | ( भद्र कृष्ण दूज को भरणी नक्षत्र , तृतीया को कृत्तिका नक्षत्र   या षष्ठी को रोहणी नक्षत्र या व्यतिपात मंगलवार को हो ये पिता को प्रिय योग है इस दिन व्रत , सूर्य पूजा , गौ दान गौ -दान श्रेष्ठ | - श्राद्ध का गया तुल्य फल- पितृपक्ष में मघा सूर्य की अष्टमी य त्रयोदशी को मघा नक्षत्र पर चंद्र ...

गणेश भगवान - पूजा मंत्र, आरती एवं विधि

सिद्धिविनायक विघ्नेश्वर गणेश भगवान की आरती। आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।  माता जा की पार्वती ,पिता महादेवा । एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।   मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी | जय गणेश जय गणेश देवा।  अंधन को आँख  देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया । जय गणेश जय गणेश देवा।   हार चढ़े फूल चढ़े ओर चढ़े मेवा । लड्डूअन का  भोग लगे संत करें सेवा।   जय गणेश जय गणेश देवा।   दीनन की लाज रखो ,शम्भू पत्र वारो।   मनोरथ को पूरा करो।  जाए बलिहारी।   जय गणेश जय गणेश देवा। आहुति मंत्र -  ॐ अंगारकाय नमः श्री 108 आहूतियां देना विशेष शुभ होता है इसमें शुद्ध घी ही दुर्वा एवं काले तिल का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण के अनुसार गायत्री-      मंत्र ओम महोत काय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। गणेश पूजन की सामग्री एक चौकिया पाटे  का प्रयोग करें । लाल वस्त्र या नारंगी वस्त्र उसपर बिछाएं। चावलों से 8पत्ती वाला कमल पुष्प स्वरूप बनाएं। गणेश पूजा में नार...

विवाह बाधा और परीक्षा में सफलता के लिए दुर्गा पूजा

विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन कर...

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश ...