🕉 रामायणपाठ: लाभ
️ रामायण के कांडों का पाठ: लाभ, चौपाई/श्लोक, अर्थ, विधि सहित (प्रमाण सहित)
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✅ लाभ:
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• विद्या प्राप्ति
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• संतान सुख
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• विवाह में आ रही बाधा का निवारण
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• जीवन में शुभारंभ के लिए श्रेष्ठ
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🔆 चौपाई:
"बंदउँ नावँ जानकी नायक। कृपालु दीनदयाल बिराजत।।"अर्थ:
मैं
सीता के स्वामी, करुणामय, दीनों पर दया करने वाले श्रीराम के नाम की वंदना करता हूँ। यह नाम स्वयं मंगल का स्त्रोत है।
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📿 पाठ विधि:
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• गुरुवार या सोमवार को आरंभ करें
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• पूजा स्थान स्वच्छ हो, पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
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• घी का दीपक जलाएं, रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करें
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• एक या दो अध्याय प्रतिदिन करें
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• वाल्मीकि रामायण, सर्ग 1.1: "को न्वस्मिन्साम्प्रतं लोके गुणवान कश्च वीर्यवान..." — उत्तम संतान के गुणों का वर्णन
2️⃣
अयोध्या कांड – पारिवारिक शांति व राजनीति में सफलता
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✅ लाभ:
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• पारिवारिक सौहार्द
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• पुत्र-पिता संबंध में सुधार
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• राजनीति, प्रशासन, पद-स्थिरता में सहायता
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🔆 चौपाई:
"सुनत जटायू वचन सुहाए। रघुपति बंधु समेत तेहि भाए।।"
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🪔
श्रीराम
व लक्ष्मण ने जटायु के मधुर वचन सुने और उनसे प्रेमपूर्वक संवाद किया। यह दर्शाता है कि पारिवारिक एवं वृद्धजनों का आदर शुभ फल देता है।
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📿 पाठ विधि:
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• मंगलवार या शुक्रवार को करें
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• व्रत सहित करें तो अधिक फलदायी
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• सपरिवार पाठ करना शुभ
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• वाल्मीकि रामायण, अयोध्या कांड: भरत का त्याग, श्रीराम की आज्ञा पालन नीति — धर्मराज्य की स्थापना की शिक्षा
3️⃣ अरण्यकांड – रोग, भय, शारीरिक दोष निवारण हेतु
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✅ लाभ:
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• मानसिक शांति, भय नाश
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• ग्रह बाधा व आत्मिक शुद्धि
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🔆 चौपाई:
"जासु नाम जपि सुनि भवानी। बिमल करइ पावन मुनि ग्यानी।।"
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🪔
हे
भवानी! जिस श्रीराम के नाम का जप सुनकर भी ज्ञानी मुनि पावन हो जाते हैं, उस नाम का जप मनुष्य के समस्त भय हर लेता है।
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📿 पाठ विधि:
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• शनिवार को करें
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• रोगियों के पास बैठकर सुनाना लाभकारी
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• हवन आदि के साथ करें तो विशेष फलदायी
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• स्कन्द पुराण, श्रीराम नाम माहात्म्य: “राम नामं वरं नाम, पाप नाशनं परम्”
4️⃣
किष्किंधा कांड – मित्रता, नेतृत्व, सहयोग हेतु
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✅ लाभ:
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• सामाजिक सहयोग
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• साहस और आत्मबल की वृद्धि
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🔆 चौपाई:
"सखा सोच त्यागहु बल मोरे। सब विधि घटि घटी मधु सोरे।।"
·
🪔
श्रीराम
ने सुग्रीव से कहा – हे मित्र! चिंता छोड़ो, मेरी शक्ति के रहते कोई विघ्न नहीं आ सकता। इससे आत्मविश्वास जाग्रत होता है।
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📿 पाठ विधि:
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• बुधवार को करें
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• टीम कार्य, मित्र समस्या, संगठन आदि में सफलता हेतु
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• वाल्मीकि रामायण, किष्किंधा कांड: सुग्रीव-राम मित्रता, नीति शास्त्र समान व्यवहार
5️⃣ सुंदरकांड – संकटमोचन, कोर्ट, नौकरी, कार्य सिद्धि
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✅ लाभ:
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• शत्रु नाश, भय निवारण, केस विजय
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• आर्थिक बाधा दूर
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🔆 चौपाई:
"संकट से हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।"
·
🪔
जो
व्यक्ति मन, वाणी और कर्म से हनुमान जी का ध्यान करता है, वह सभी संकटों से मुक्त होता है।
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📿 पाठ विधि:
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• मंगलवार व शनिवार श्रेष्ठ
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• घी का दीपक, गुड़ और चने का भोग
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• संपूर्ण सुंदरकांड एकसाथ पढ़ें या 7 दिन में समाप्त करें
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड: हनुमान जी का लंका प्रवेश, विजय, संकटहरण रूप वर्णन
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• स्कन्द पुराण, हनुमद उपाख्यान: सुंदरकांड पाठ सर्वश्रेष्ठ
6️⃣ लंका कांड – शत्रु बाधा, युद्ध विजय, शक्ति
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✅ लाभ:
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• विरोधियों से मुक्ति
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• आत्मबल व नेतृत्व
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🔆 चौपाई:
"जिन्ह कें रामु बिरोध सन्हाए। भव सागर ते तरी न जाई।।"
·
🪔
जिनका
श्रीराम से विरोध होता है, वे भवसागर पार नहीं कर सकते।
यह शत्रु के दमन और धर्म पर स्थित रहने का संदेश देता है।
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📿 पाठ विधि:
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• मंगलवार को करें
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• यंत्र/मंत्र के साथ करें
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• विजय हेतु हनुमान जी की विशेष पूजा करें
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड: धर्म युद्ध की मर्यादा व जीत का सत्य
7️⃣ उत्तरकांड
– वैराग्य,
मोक्ष, आत्मकल्याण
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✅ लाभ:
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• मन की शांति, सांसारिक मोह से मुक्ति
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• साधना में प्रगति
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🔆 चौपाई:
"रामचरित मानस सुनहिं जे लोग। होहिं सिद्ध करहिं मन संजोग।।"
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🪔जो रामचरित मानस का पाठ करते हैं, वे अपने संकल्पों को सिद्ध करते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।
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📿 पाठ विधि:
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• पूर्णिमा, अमावस्या या राम नवमी को करें
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• ध्यान, जप, मौन के साथ करें
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📚 शास्त्रीय प्रमाण:
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• नारद पुराण – रामकथा श्रवण, मोक्षप्रद
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• पद्म पुराण – वैराग्य उत्पत्ति हेतु राम कथा श्रवण श्रेष्ठ
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"कौन से
ग्रंथ में यह मंत्र या चौपाई 'भए प्रगट कृपाला...', पद-प्राप्ति
या स्थानोन्नति हेतु लिखित रूप में वर्णित है?"
📌 स्पष्ट उत्तर:
👉 गोस्वामी तुलसीदास रचित "श्रीरामचरितमानस" में यह
चौपाई राम जन्म के
प्रसंग में आती है
(बालकाण्ड दोहा 197 के पश्चात), परंतु वहाँ सीधा उल्लेख
नहीं है कि यह
"पद प्राप्ति हेतु" उपयोगी है।
🔍 इसका उपयोग “पद प्राप्ति” हेतु किसी मूल शास्त्रीय ग्रंथ में स्पष्ट रूप से लिखा
नहीं गया है —
जैसे:
- वेद, उपनिषद, पुराण
(रामायण, स्कंद, पद्म
आदि),
- स्मृति
ग्रंथ (मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति),
- अथवा
कर्मकाण्डीय ग्रंथ (कौमुदी, कल्पसूत्र, अपराजितपृच्छा)
में इसे सीधे "promotion / पद प्राप्ति" के लिए निर्दिष्ट नहीं किया गया।रामनाम महिमा
“राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥”
— पद्म पुराणअर्थ: राम नाम का एक जप विष्णु सहस्रनाम के समान फल देता है।
3. संकट नाश मंत्र
“श्रीराम जय राम जय जय राम।”
फल: भय, चिंता एवं मानसिक अशांति का नाश।
4. शरणागति मंत्र
“सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥”
— वाल्मीकि रामायणअर्थ: जो एक बार भी शरण आता है, उसे श्रीराम अभय देते हैं।
🌼 अध्यात्म एवं भक्ति जीवन हेतु मंत्र
5. पाप नाशक राम मंत्र
“रामनामामृतं पीत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
— अध्यात्म रामायणअर्थ: रामनाम अमृत है, जो पापों से मुक्त करता है।
6. शिव वचन — रामायण पाठ फल
“रामायणं पठेद्यस्तु सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
— स्कन्द पुराणअर्थ: रामायण का पाठ पापों का नाश करता है।
🌼 दैनिक जीवन में उपयोगी सार्वभौमिक मंत्र
7. शांति मंत्र
“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।”फल: परिवार एवं समाज में शांति।
8. बुद्धि एवं ज्ञान मंत्र
“ॐ गं गणपतये नमः।”
फल: कार्य सिद्धि एवं बुद्धि वृद्धि।
9. भय नाश मंत्र
“ॐ नमः शिवाय।”
फल: मानसिक स्थिरता एवं भय नाश।
10. संरक्षण मंत्र
“श्रीराम रक्षा सर्वदा।”
फल: आध्यात्मिक सुरक्षा एवं आत्मबल।
✅ तो फिर यह प्रयोग कैसे प्रचलन में
आया?
- लोकाचार
एवं अनुकरणीय प्रयोग
अनेक विद्वानों, साधकों व कर्मकाण्डियों ने इसे अनुभवजन्य फलप्रद मानते हुए राम नवमी के शुभ मुहूर्त, राजसत्त्व, और राम की मर्यादा-पुरुषोत्तम की सत्ता के कारण इसे पद लाभ हेतु उपयोग करना शुरू किया। - राम
जन्म का मुहूर्त – अभिजित, नवमी, मध्याह्न
👉 यह काल स्वयं शास्त्रों में "राज्य-प्राप्ति, शासन-लाभ, संतान-लाभ, प्रतिष्ठा-लाभ" हेतु सर्वोत्तम माना गया है।
(Ref: "मुहूर्त चिंतामणि", "धर्मसिंधु", "निर्णयसिंधु") - तन्त्र/अनुष्ठान
परंपरा में सम्पुटों का विकास
– "ॐ श्रीराम पदप्राप्तये नमः" जैसे मन्त्र आधुनिक या अनुभवजन्य संकल्पमूलक मंत्र हैं, जो निज अनुष्ठान के अनुसार साधक स्वयं संकल्प लेकर उपयोग करता है।
ऐसे मन्त्र किसी विशिष्ट पुराण या मन्त्रसूत्र से नहीं उद्धृत होते हैं, बल्कि विधिवत सम्पुट के रूप में बनाए जाते हैं।
🛑 निष्कर्ष:
|
बिंदु |
उत्तर |
|
क्या
"भए प्रगट कृपाला..." चौपाई किसी शास्त्र में पद
प्राप्ति हेतु दी गई
है? |
❌ नहीं, सीधे किसी
ग्रंथ में यह प्रयोग नहीं बताया गया। |
|
क्या यह
चौपाई श्रीरामचरितमानस में आती है? |
✅ हाँ, बालकाण्ड
राम जन्म प्रसंग में आती है। |
|
क्या इसे
पद लाभ हेतु प्रयोग किया जा सकता है? |
✅ हाँ, अनुष्ठानिक
और अनुभवजन्य परंपरा में उपयोग होता है। |
|
क्या
"ॐ श्रीराम पदप्राप्तये नमः" कोई शास्त्रीय मंत्र है? |
❌ नहीं, यह संपीड़ित/संकल्प
मूलक समर्पण
मंत्र है, विद्वानों
द्वारा गढ़ा गया। |
🔱 पद-प्राप्ति / राज्य-लाभ हेतु
शास्त्रीय मंत्र-संग्रह
1. 🕉️ रामरक्षा स्तोत्र – पद लाभ मंत्र
मंत्र:
"राजद्वारे
पदं लभेत्॥"
📚 स्रोत: रामरक्षा स्तोत्र, श्लोक 26
🎯 फल: शासन, उच्च पद, प्रशासनिक सफलता
📖 अनुशंसा:
– इस श्लोक का
11 या 21 बार पाठ कर, "श्रीराम
रक्षा स्तोत्र" का संपूर्ण पाठ करें।
– विशेषतः नवमी तिथि
या रविवार को।
2. 🕉️ श्रीराम गायत्री मंत्र
(शास्त्रसम्मत)
मंत्र:
"ॐ दशरथाय
विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥"
📚 स्रोत: मन्त्ररत्नाकर, नारदपुराण
🎯 फल: उच्च पद, मंत्रीत्व, आत्मबल वृद्धि
📖 अनुशंसा:
– प्रतिदिन 108 बार जप।
– विशेष लाभ
हेतु सूर्यग्रहण या राम नवमी पर 1008 जप।
3. 🕉️ राज्यप्राप्ति हेतु श्रीनारायण
मंत्र (श्रीमद्भागवत)
मंत्र:
"ॐ नमो भगवते
श्रीगोविन्दाय।"
📚 स्रोत: श्रीमद्भागवत महापुराण (10.3.22),
विष्णुपुराण
🎯 फल: राज्यलाभ, मान-सम्मान, संरक्षण
📖 विधान:
– विष्णु
सहस्रनाम के साथ इस बीजमंत्र का जप करें।
4. 🕉️ राज्यलाभदायक सूर्य मंत्र
(अथर्ववेद)
मंत्र:
"ॐ ह्रां
ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥"
📚 स्रोत: अथर्ववेद, सूर्योपनिषद
🎯 फल: राजसत्ता, नौकरी में उन्नति, तेज
📖 विधान:
– प्रातः
सूर्य को जल अर्पण करते समय 11 बार जप।
– रविवार को
विशेष प्रभावशाली।
5. 🕉️ राज्यप्राप्तिकर श्रीहरि स्तोत्र
मंत्र (विष्णुधर्मोत्तर पुराण)
मंत्र:
"ॐ नमो
नारायणाय राज्यं देहि मे स्वाहा॥"
📚 स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर पुराण
🎯 फल: पद-प्राप्ति, दरबार/प्रशासन में प्रतिष्ठा
📖 विधान:
– यह मन्त्र 1008 बार ब्राह्म
मुहूर्त में जपें।
– पीले वस्त्र
और विष्णु के समक्ष तुलसी से अर्चन करें।
6. 🕉️ चाणक्यनीति अनुसार राज्यसिद्धि
मन्त्र (तांत्रिक)
मंत्र:
"ॐ श्रीं
ह्रीं क्लीं ऐं नमः स्वाहा॥"
📚 स्रोत: चाणक्य तंत्र, तांत्रिक प्रयोग
🎯 फल: राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक अधिकारियों हेतु
📖 नियम:
– इस मन्त्र
को 1 लाख बार
सिद्ध कर, कोई भी
कार्यारंभ करें।
7. 🕉️ शिवोपासना मंत्र – शासनलाभ हेतु
मंत्र:
"ॐ नमः शिवाय
श्रीमते शासनप्रदाय नमः॥"
📚 स्रोत: शिवमहापुराण
🎯 फल: अधिकारी पद प्राप्ति, न्यायिक क्षेत्र में सफलता
📖 विधान:
– सोमवार को
शिवलिंग पर जल से अभिषेक करते हुए 108 बार जप।
8. 🕉️ शास्त्रीय महाकाली मन्त्र
(राज्य-विजय हेतु)
मंत्र:
"ॐ क्रीं
कालिकायै नमः॥"
📚 स्रोत: कालिकोपनिषद्, देवीमहात्म्य
🎯 फल: शत्रु नाश, सत्ता में प्रवेश
📖 नियम:
– रात्रिकाल
में, विशेष रूप
से अमावस्या पर जप करें।
– रक्षात्मक
और अधिकार आधारित संस्थानों के लिए उत्तम।
🔔 कर्मकाण्डीय सुझाव:
|
📅 उपयुक्त दिन |
🌟 विशेष प्रभाव |
|
रविवार |
सूर्य
संबंधी पद लाभ हेतु |
|
गुरुवार |
गुरु-कृपा
व न्याय क्षेत्र हेतु |
|
नवमी तिथि |
श्रीराम
वंशजों के लिए उत्तम |
|
पूर्णिमा |
देवता
पूजन हेतु श्रेष्ठ |
पद-प्राप्ति / राज्यलाभ हेतु मंत्र एवं अनुष्ठान विधि
संग्रह
यह संकलन शास्त्रों में प्रमाणित उन मंत्रों पर आधारित है, जो विशेष
रूप से राज्य प्राप्ति, पदोन्नति, शासन, प्रशासन, और
मान-सम्मान हेतु अनुशंसित हैं। प्रत्येक मंत्र के साथ संकल्प, जपविधि, न्यास, आसन, दिशा, संख्या, पूजन विधि
तथा विशेष तिथियों का उल्लेख किया गया है।
1. रामरक्षा मंत्र – “राजद्वारे पदं लभेत्”
- स्रोत: रामरक्षा
स्तोत्र, श्लोक 26
- संकल्प: “श्रीरामचंद्र
की कृपा से मुझे राजद्वार में प्रतिष्ठा, उच्च पद, शासनसत्ता प्राप्त हो।“ - जपसंख्या: प्रतिदिन 21 बार (विशेष: रविवार/नवमी को) - आसन: पीला कंबल
या कुशासन - दिशा: पूर्वमुख - पूजन विधि: श्रीराम
चित्र पर पुष्प, चंदन, धूप-दीप से
पूजन। रामरक्षा स्तोत्र पूर्ण पाठ करें। अंत में विशेष मंत्र 11 बार:
“राजद्वारे
पदं लभेत्॥”
2. श्रीराम गायत्री मंत्र
- मंत्र: “ॐ दशरथाय
विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” - स्रोत: मन्त्ररत्नाकर - संकल्प: “राज्य, मंत्रीपद, प्रशासन में श्रीराम कृपा से पद प्राप्त हो।” - जपसंख्या: 108 या 1008 - आसन: पीला वस्त्र
या ऊन का आसन - विशेष काल: राम नवमी /
सूर्यग्रहण - हवन विधि: 108 आहुतियाँ “स्वाहा” के साथ।
सामग्री – तिल, गुड़, गाय का घी।
3. “ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय” मंत्र
- स्रोत: श्रीमद्भागवत
(10.3.22)
- संकल्प: “श्रीगोविन्द
कृपा से मुझे शासन, सुरक्षा व मान की प्राप्ति हो।” - जपसंख्या: 1008 बार रोज - पूजन विधि: विष्णु
सहस्रनाम के साथ जप। - अनुष्ठान: 21 दिन का व्रत, पीले फूल अर्पित करें।
4. सूर्य मंत्र – “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”
- स्रोत: सूर्योपनिषद, अथर्ववेद - संकल्प: “सूर्यदेव के
तेज से मुझे राज्यपद व उन्नति प्राप्त हो।” - जप विधि: प्रतिदिन प्रातः सूर्य को अर्घ्य देते समय 11 बार मंत्र
जप। - अर्घ्य
सामग्री: ताम्र पात्र
में जल + लाल पुष्प + अक्षत - आसन: लाल कंबल
5. विष्णु मंत्र – “ॐ नमो नारायणाय राज्यं देहि मे स्वाहा”
- स्रोत: विष्णुधर्मोत्तर
पुराण - संकल्प: “भगवान
विष्णु की कृपा से राज्य, प्रतिष्ठा, उच्चपद प्राप्त हो।” - जपसंख्या: 1008 बार 11 दिन तक - हवन विधि: 108 आहुतियाँ, सामग्री – गोघृत, चावल, तिल। - पूजन: तुलसी पत्र से श्रीविष्णु का पूजन।
6. शिवमंत्र – “ॐ नमः शिवाय श्रीमते शासनप्रदाय नमः”
- स्रोत: शिवमहापुराण - संकल्प: “शिव कृपा से
शासन/न्यायिक क्षेत्र में सफलता मिले।” - जप विधि: सोमवार को रुद्राभिषेक के बाद 108 बार जप। - पूजन: बिल्वपत्र, सफेद पुष्प
अर्पण करें। जलाभिषेक करें।
7. कालिका मंत्र – “ॐ क्रीं कालिकायै नमः”
- स्रोत: कालिकोपनिषद, देवीमहात्म्य - संकल्प: “राज्य व
विजय हेतु माँ काली की आराधना द्वारा शत्रु पर जय हो।” - जप विधि: अमावस्या
रात्रि, दक्षिणाभिमुख
हो जप करें। - आसन: काले कंबल
पर - हवन: नीम की
लकड़ी व तिल से करें।
8. चाणक्य मंत्र – “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं नमः स्वाहा”
- स्रोत: चाणक्य
तंत्र (तांत्रिक प्रयोग) - संकल्प: “चातुर्य, वाक्शक्ति व प्रशासनिक कुशलता से उच्चपद प्राप्त हो।” - जप विधि: रात्रिकाल
में 1 लाख जप
सिद्धि हेतु - अनुष्ठान
काल: 21 दिन, विशेषकर
गुरु-पुष्य योग में आरंभ करें।
1. रामरक्षा स्तोत्र – "राजद्वारे पदं लभेत्"
- स्रोत: यह
श्लोक "रामरक्षा स्तोत्र" में वर्णित है।
- उद्धरण:
"राजद्वारे पदं लभेत्"
- प्रमाण: यह
श्लोक "रामरक्षा स्तोत्र" के श्लोक 26 में पाया जाता है।
2. श्रीराम गायत्री मंत्र
- मंत्र:
"ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥"
- स्रोत: यह
मंत्र विभिन्न स्रोतों में पाया जाता है, जिनमें "मन्त्ररत्नाकर" और अन्य वैदिक
ग्रंथ शामिल हैं।
- प्रमाण: यह
मंत्र "राम गायत्री मंत्र" के रूप में प्रसिद्ध है और विभिन्न
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।Facebook
3. "ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय"
- स्रोत: यह
मंत्र "श्रीकृष्ण द्वादशाक्षर मंत्र" के रूप में जाना जाता है।myNachiketa+1Facebook+1
- प्रमाण: यह
मंत्र भगवान श्रीकृष्ण के उपासकों द्वारा प्रयोग किया जाता है और विभिन्न
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।
4. सूर्य बीज मंत्र – "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय
नमः"
- स्रोत: यह
मंत्र "सूर्य उपनिषद" में वर्णित है, जो अथर्ववेद से संबंधित एक उपनिषद है।YouTube
- प्रमाण:
"सूर्य उपनिषद" में सूर्य देव की महिमा का वर्णन करते हुए यह
मंत्र प्रस्तुत किया गया है।
5. "ॐ नमो नारायणाय राज्यं देहि मे
स्वाहा"
- स्रोत: यह
मंत्र "विष्णुधर्मोत्तर पुराण" में वर्णित है।
- प्रमाण:
"विष्णुधर्मोत्तर पुराण" में भगवान विष्णु की उपासना से संबंधित
विभिन्न मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।
6. "ॐ नमः शिवाय श्रीमते शासनप्रदाय
नमः"
- स्रोत: यह
मंत्र "शिवमहापुराण" में वर्णित है।
- प्रमाण:
"शिवमहापुराण" में भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न
मंत्रों का वर्णन है, जिनमें यह मंत्र भी शामिल है।
7. "ॐ क्रीं कालिकायै नमः"
- स्रोत: यह
मंत्र "कालिकोपनिषद" और "देवीमहात्म्य" में वर्णित है।
- प्रमाण:
"कालिकोपनिषद" और "देवीमहात्म्य" में देवी काली की
उपासना से संबंधित विभिन्न मंत्रों का वर्णन है, जिनमें
यह मंत्र भी शामिल है।
8. "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं नमः
स्वाहा"
- स्रोत: यह
मंत्र "चाणक्य तंत्र" में वर्णित है।
- प्रमाण:
"चाणक्य तंत्र" में विभिन्न तांत्रिक मंत्रों का वर्णन है, जिनमें
यह मंत्र भी शामिल है।
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