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दुर्गा हवन — सप्तश्लोकी

 

सप्तश्लोकी दुर्गा हवनपूर्ण सेट (Complete Original Set)

🔶 आहुति द्रव्यशास्त्रीय फल

  1. घृत (गाय का घी) — सर्वकार्य सिद्धि, देवतुष्टि
  2. तिल (काला/सफेद) — पापक्षय, बाधा शांति
  3. जौ (यव) — आयु, आरोग्य, स्थिर सफलता
  4. नवधान्यधन-धान्य वृद्धि
  5. कमलगट्टालक्ष्मी कृपा, समृद्धि
  6. गुड़/शक्करगृहसुख, संबंध मधुरता
  7. शहदवाणी सिद्धि, आकर्षण
  8. सूखा नारियलपूर्णता, कार्यसमापन

🔶 आहुति संख्या (प्रमाणित नियम)

  • प्रत्येक श्लोक → 1 आहुति
  • पूर्ण अनुष्ठान → 7 × 11 = 77 आहुति

⚠️ Avoid: 11, 21, 108 (इस विधि में)

👉 7 का महत्व:
सप्तलोक, सप्तऋषि, सप्तधातु, देवी के सप्त स्वरूप

🔶 दिशा (Sitting Direction)

पूर्वमुखज्ञान, सिद्धि, देवकृपा
उत्तरमुखधन, शांति, लक्ष्मी कृपा

🔶 हवन कुंड स्थान

साधक के सामने
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम
विकल्प: पूर्व दिशा

🔱 संकल्प विधि

🔸 आचमन

केशवाय स्वाहा
नारायणाय स्वाहा
माधवाय स्वाहा

🔸 प्राणायाम मंत्र

भूः भुवः स्वः
महः जनः तपः सत्यम्

तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्

आपो ज्योति रसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वः

🔸 संकल्प (पूर्ण)

ममोपात्त समस्त दुरित क्षय द्वारा
श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं सप्तश्लोकी दुर्गा हवनं करिष्ये

अद्य (वार) …
तिथौ
भारतदेशे, कर्नाटक राज्ये, बंगलूरु नगरे
अहं (नाम) सपत्नीक/सपरिवार
सर्वकार्य सिद्ध्यर्थं हवनं करिष्ये

🔥 अग्नि स्थापना

अग्नये स्वाहा
इदं अग्नये इदं मम

🔱 देवी आवाहन

दुं दुर्गायै नमः
आवाहयामि स्थापयामि

🔱 न्यासकरन्यास

ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः
क्लीं मध्यमाभ्यां नमः
चामुण्डायै अनामिकाभ्यां नमः
विच्चे कनिष्ठिकाभ्यां नमः
नमः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

अङ्गन्यास

ऐं हृदयाय नमः
ह्रीं शिरसे स्वाहा
क्लीं शिखायै वषट्
चामुण्डायै कवचाय हुम्
विच्चे नेत्रत्रयाय वौषट्
नमः अस्त्राय फट्

🔱 मुख्य हवनसप्तश्लोकी दुर्गा

(प्रत्येक श्लोक के अंत मेंस्वाहा”)

1️

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति स्वाहा

2️

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता स्वाहा

3️

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते स्वाहा

4️

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते स्वाहा

5️

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते स्वाहा

6️

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान सकलानभीष्टान्
त्वामाश्रितानां विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति स्वाहा

7️

सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् स्वाहा

🔱 विशेष हवन मंत्र (जैसा दिया गया)

जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा

मधु कैटभ विद्रावि विधातृ वरदे नमः
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

महिषासुर नाशिनि भक्तानां सुखदे नमः
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

रक्तबीज वधे देवि चण्डमुण्ड विनाशिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

शुम्भनिशुम्भ मर्दिनि धूम्रलोचन मर्दिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

🔱 पूर्णाहुति

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा

🔱 क्षमा प्रार्थना

अपराध सहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया
क्षमस्व परमेश्वरि

🔥 हवन मंत्र (आकर्षक क्रमशुद्ध रूप)

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा

मधुकैटभविद्रावि विधातृवरदे नमः
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

महिषासुरनाशिनि भक्तानां सुखदे नमः
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

शुम्भनिशुम्भमर्दिनि धूम्रलोचनमर्दिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चापर्णे दुरितापहे
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

चण्डिके सततं युद्धे जयन्ति पापनाशिनि
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणाम्बिके
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा

चण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि स्वाहा


🔱 हवन विधि क्रम

1. आवाहन मंत्र

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः
हंसः श्रीं ह्रीं सौः

2. न्यास / स्थापना मंत्र

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः ऐं
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः फट्

3. मूल बीज मंत्र

क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं सौः श्रीं

4. ध्यान मंत्र

श्रीं ह्रीं बालात्रिपुरसुन्दर्यै नमः

5. उपासना मंत्र

श्रीं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः


🔥 6. हवन आहुति मंत्र (मुख्य क्रम)

(हर मंत्र के अंत मेंस्वाहाबोलकर आहुति दें)

1. श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरकामिन्यै स्वाहा
2.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरवासिन्यै स्वाहा
3.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरसुन्दर्यै स्वाहा
4.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरमालिन्यै स्वाहा
5.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरसिद्ध्यै स्वाहा
6.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुराम्बायै स्वाहा
7.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरभैरव्यै स्वाहा
8.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरेश्वर्यै स्वाहा
9.
श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरदेव्यै सर्वसिद्धिं साधय स्वाहा


7. विशेष समर्पण मंत्र

ह्रीं क्लीं श्रीं हौं त्रिपुरसुन्दरी सर्वोपचार पूजां गृहाण स्वाहा


8. पूर्णाहुति मंत्र

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा


9. क्षमा प्रार्थना

अपराध सहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया
क्षमस्व परमेश्वरि

 V.K.tiwari,Shishir Tiwari& Ram dixit9424446706Banagalore Suncity Block 5 F-1003

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