🌕 3 मार्च 2026
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा – मंगलवार – पूर्वा फाल्गुनी – सिंह राशि
3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के बारे में वैज्ञानिक समय, भारत में दृश्यता, सूतक काल, वैश्विक दृश्यता और कुछ क्षेत्र-विशिष्ट संकेत को सटीक और प्रमाणित स्रोतों
📅 ग्रहण का समय (वैज्ञानिक) – भारत समय (IST)
🕒 ग्रहण शुरू: 3 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे
🌕 पूर्णता / कुल छाया: शाम लगभग 4:34 बजे से 5:33 बजे के बीच
🕖 ग्रहण समाप्त: 6:47 बजे
⏱️ कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट
⏳ सूतक काल (परंपरागत / भारतीय पंचांग)
• ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले से सूतक मान्य होता है — यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से
• सूतक में परंपरागत शुभ कार्य (जैसे विवाह, नए काम आदि) टालने की सलाह दी जाती है
📍 भारत में दृश्यता (शहर-वार)
भारत में ग्रहण पूरे समय नहीं दिखेगा — क्योंकि जन्मे हुए चंद्रमा के समय से चंद्रमा पहले से ग्रहण में है:
कुछ शहरों में अनुमानित दृश्यता
(चंद्रोदय से ग्रहण के अंतिम हिस्से तक)
🔹 कोलकाता (West Bengal):
चंद्र ग्रहण चंद्रास्त के साथ दिखेगा — लगभग 5:43 बजे तक
🔹 गुवाहाटी / दिब्रूगढ़ (Assam):
पूरे ग्रहण का अवलोकन संभव — लगभग 2:14 बजे से 7:53 बजे तक (पूर्ण दृश्यता)
🔹 दिल्ली: लगभग 6:22 बजे तक दृश्य
🔹 लखनऊ: लगभग 45 मिनट तक दृश्य
👉 उन क्षेत्रों में जहां चंद्रमा ढल चुका होगा, वहाँ ग्रहण केवल अंतिम भाग लगेगा — हवा, मौसम और दृश्य स्थिति पर भी निर्भर करेगा
🌎 वैश्विक दृश्यता (मुख्य देश/क्षेत्र)
यह ग्रहण उन हिस्सों में दिखाई देगा जहाँ चांद उस समय आकाश में होगा:
📌 पूरा ग्रहण दिखेगा:
• पूर्वी एशिया — चीन
(Beijing)
• दक्षिण-पूर्वी एशिया — म्यांमार, थाईलैंड
• न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया
• कुछ भागों में उत्तरी/दक्षिणी अमेरिका ऐसा समय जहां चंद्रमा रात के समय दिखे
📌 कुछ भागों में आंशिक:
• भारत के अधिकतर हिस्सों (केवल अंतिम हिस्से)
• दक्षिण अमेरिका (ब्राज़ील, अर्जेंटीना)
• कनाडा के कुछ हिस्से
➡️ यह सब ग्रहण के दृश्य होने का क्षेत्र है — किसी देश का अस्तित्व निश्चित घटना नहीं, केवल वैज्ञानिक दृश्यता सूची है
⚖️ वैज्ञानिक दृश्यता संक्षेप
🕒 भारत में:
लगभग
6:20 बजे से 6:47 बजे तक अंतिम हिस्सा
दिखाई
देगा
(विभिन्न
शहरों
में
थोड़ा
भिन्न)
📌 पूर्ण
ग्रहण
का
दृश्य
उत्तर-पूर्वी
भारत
(Assam आदि)
में
सबसे
स्पष्ट
होगा
🌍 दुनिया में:
पूर्वी
एशिया,
ऑस्ट्रेलिया,
न्यूज़ीलैंड,
अमेरिका
के
कुछ
हिस्से
में
पूर्ण/आंशिक
दृश्यता
रहेगी
🕣 सूतक काल (भारतीय परंपरा): from सुबह
लगभग
6:20 बजे
🌟 Purva Phalguni यस्य नक्षत्रे ग्रहणं तस्य देशस्य नाशः।
जिस
नक्षत्र में ग्रहण हो, उस से संबंधित प्रदेश में कष्ट।
यस्य नक्षत्रे ग्रहणं तस्य देशस्य पीडनम्।
जिस नक्षत्र में ग्रहण हो, उस नक्षत्र से अधिष्ठित देश ,वर्ण,जाति,वर्ग ,संबंधित वृत्ति , कष्ट अनुभव करता , •1* जिस नक्षत्र में ग्रहण पड़े* उस नक्षत्र से अधिष्ठित प्रदेश*
उस दिशा का भूभाग • पूर्व और पूर्वोत्तर दिशा प्रमुख सक्रिय दिशा मानी जाएगी।
राश्यां
ग्रहणसम्भूते
तद्राशेः
कारकं
क्षयं
वदेत्।
जिस राशि में ग्रहण हो, उस राशि से
संबंधित कारक प्रभावित।
सिंह राशि
कारक:•
राजसत्ता•
अग्नि
तत्व•
स्वर्ण
वर्ग धातु वर्ग में अस्थिरता संभावित:Various Prablelms - <TROUBLE<LOSS<PROBLEM;------
पूर्व
दिशा• पूर्वोत्तर क्षेत्र• समुद्र पार पूर्वी राष्ट्र• पूर्वोत्तर भारत ,• पूर्व एशिया (चीन, जापान, कोरिया)
में पूर्ण रूप से• ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में अत्यंत स्पष्ट; • पूर्वोत्तर भारत (असम, अरुणाचल)
• बांग्लादेश• म्यांमार• चीन का दक्षिणी/पूर्वी भाग• जापान• ऑस्ट्रेलिया (पूर्ण दृश्यता क्षेत्र) पूर्वी महाराष्ट्र (नागपुर क्षेत्र)• मालवा (मध्य प्रदेश)• उत्तरी कर्नाटक• महेश्वर-ओंकारेश्वर क्षेत्र• नर्मदा बेसिन
(MP-Gujarat
• पश्चिमी भारत में आंशिक• राशि क्षेत्र: सिंह (Leo)• अधिदेवता: भग• स्वामी ग्रह: शुक्र• मूषक/चूहा • कोयल सुशोभित, मधुर ध्वनि वाले पक्षीपलाश (Butea monosperma)• अशोक• सेमल• गेहूँ
• चावल (सफेद अन्न वर्ग)• मीठे पदार्थ• दुग्ध उत्पाद• घी• शर्करा• आम• केला• मीठे रसीले फल• अंगूर*कृषि * पशु हानि*• (असम, अरुणाचल, पूर्वी भारत) पूर्वी महाराष्ट्र• मुख्य शहर: नागपुर, अमरावती, वर्धा• राज्य: महाराष्ट्र. • वर्तमान: मालवा क्षेत्र• राज्य: मध्य प्रदेश• मुख्य शहर: उज्जैन, इंदौर• वर्तमान: उत्तरी कर्नाटक• शहर: हुबली, बेलगावी,
विजयनगर (हम्पी) •: महेश्वर (मध्य प्रदेश)नर्मदा तट क्षेत्र• गुजरात का कुछ भाग;
✔ तांबा✔ स्वर्ण वर्ग Costly;
🔤 संबंधित अक्षर मो • टा • टी • टू इन अक्षरों से नाम वाले व्यक्तियों पर प्रभाव अधिक संवेदनशील माना जाता है।
👤 व्यक्ति पर प्रभाव
यदि जन्म चंद्र पूर्वा फाल्गुनी में हो:
• मानसिक अस्थिरता कुछ दिन
• संबंधों में अहं टकराव
• विलासिता में अतिशय व्यय
• प्रेम/दाम्पत्य में गलतफहमी
• निर्णय भावनात्मक होकर लेने का खतरा
यदि कुंडली में चंद्र कमजोर हो तो प्रभाव अधिक।
🌍 विश्व-व्यापी प्रभाव (बिंदुवार)
1️ ⃣ राजनीतिक स्तर-
मो • टा • टी • टू-M
• राष्ट्रों में वैचारिक मतभेद वृद्धि
• राजदूत/उच्च पदाधिकारियों की यात्राओं में सावधानी
• नीति परिवर्तन और सैन्य रणनीति पुनर्रचना
• मित्र राष्ट्रों के समीकरण बदलना
📜 शास्त्र सिद्धांत:
“सिंहराशौ ग्रहणे नृपपीडा”
(सिंह = सत्ता/राज्य)
मो • टा • टी • टू-M
2️⃣ सामरिक / आक्रमण प्रवृत्ति
• प्रत्यक्ष युद्ध नहीं, पर सीमांत तनाव
• रक्षा व्यय/रणनीतिक अभ्यास वृद्धि
• सूचना युद्ध, साइबर दबाव
(मंगल दिवस + राहु प्रभाव)
3️⃣ आर्थिक / सट्टा बाज़ार
मो • टा • टी • टू-M
• तेल, घी, तिल, अनाज में मूल्य उतार-चढ़ाव
• कपास, सूती धागा, मसाले (धनिया, हल्दी, काली मिर्च) में तेजी
• धातुओं में मूल्य वृद्धि
• धनवान वर्ग पर वित्तीय दबाव
📜 “तिल-धान्य-तैल-मूल्यानि परिवर्तन्ते ग्रहणे”
4️⃣ खाद्य और कृषि
• कुछ क्षेत्रों में फसल हानि चर्चा
• चना, गेहूं, जौ से जुड़े व्यापारियों को लाभ
• खाद्य वस्तुओं के मूल्य बढ़ने की संभावना
• पशुधन रोग आशंका (मौसमी)
5️⃣ प्राकृतिक संकेत
• पर्वतीय / ऊंचाई क्षेत्रों में अस्थिरता
• अग्नि/दुर्घटना प्रवृत्ति
• रेगिस्तानी क्षेत्रों में कठिनाई
• वर्षा असंतुलन क्षेत्रीय रूप से
🇮🇳 भारत – राज्य/क्षेत्र संकेत
(संभाव्य प्रवृत्ति – निश्चित घटना नहीं)
राजस्थान
• जल/ताप/कृषि चर्चा
• रेगिस्तानी चुनौतियाँ
गुजरात
• व्यापारिक उतार-चढ़ाव
• बंदरगाह/ऊर्जा नीति समीक्षा
महाराष्ट्र (मुंबई सहित)
• वित्तीय बाजार अस्थिरता
• तटीय मौसम सतर्कता
मध्यप्रदेश
• कृषि क्षेत्र दबाव
• धान्य मूल्य उतार-चढ़ाव
ओडिशा
• तटीय प्राकृतिक कारक सक्रिय
असम / उत्तर-पूर्व
• प्राकृतिक अस्थिरता
• सीमांत सतर्कता
दिल्ली
• राजनीतिक बयानबाज़ी
• प्रशासनिक दबाव
🌏 भारत-चीन संबंध
• प्रत्यक्ष टकराव की बजाय सामरिक संतुलन
• आर्थिक वार्ता में सुधार संभावना
• सीमांत नियंत्रण पर सतर्कता
👥 वर्ग-विशेष संकेत
मो • टा • टी • टू-MT (ट) · D (द) · M (म) · Kh (ख) · J (ज) · I (इ) · F (फ) · A (अ) · L (ल) · Ch (च)
• नेता / उच्च पदाधिकारी → नीति दबाव
• कलाकार / अभिनेता / संगीत क्षेत्र → छवि उतार-चढ़ाव
• 10 वर्ष तक के बच्चों हेतु स्वास्थ्य सावधानी
• कृषक वर्ग → फसल जोखिम + कुछ को लाभ
• व्यापारी वर्ग → धान्य/मसाला/तेल में अवसर
💍 दांपत्य प्रभाव
पूर्वा फाल्गुनी = दांपत्य नक्षत्र
• पति-पत्नी विवाद वृद्धि संभावना
• अहंकार आधारित मतभेद
• विलासिता खर्च बढ़ना
उपाय: संयुक्त दीपक, संयुक्त जप
♈ 12 राशियाँ – संक्षेप प्रभाव
सर्वाधिक अनुकूल
• तुला
• मीन
• मिथुन
प्रयास बाद सफलता
• वृश्चिक
• कर्क
• कुम्भ
• धनु
सावधानी आवश्यक
• सिंह (मुख्य)
• मकर
• कन्या
• वृषभ
🔥 राहु शांति विधान
कम से कम 8 आहुति
मंत्र:
“ॐ भ्राम् भ्रीम् भ्रौं सः राहवे नमः स्वाहा”
हवन सामग्री:
• काला तिल (अनिवार्य)
• जौ
• चावल
• घी
दान:
• पुराने परंतु उपयोगी वस्त्र
• तिल
• गुड़
🪔 दीपक नियम (शास्त्रोक्त)
📜 प्रमाण:
“ग्रहणे तिलतैलेन दीपं दद्याद् भयापहम्।”
विधि:
• दीपक – 2 (राहु-चंद्र शांति)
• वर्तिका – सफेद सूती
• तेल – तिल तेल (घी मिश्रित कर सकते हैं)
• दिशा – पूर्व या उत्तर
⏳ 6 माह प्रभाव चक्र
मार्च–अप्रैल
उथल-पुथल, बयानबाज़ी, बाजार अस्थिरता
मई–जून
नीति समायोजन, आर्थिक पुनर्संतुलन
जुलाई–अगस्त
धीरे स्थिरता, शक्ति पुनर्गठन
⚖ अंतिम शास्त्रीय संतुलन
ग्रहण “विनाश” नहीं —
ऊर्जा परिवर्तन बिंदु है।
“मानव कर्म द्वारा अशुभ कम किया जा सकता है।
**************************************
🌕 चंद्र ग्रहण — शास्त्रीय आधार
🕉 ग्रंथ प्रमाण
📖 निर्णय सिंधु
ग्रहणे स्नानदानजपहोमादिकं महाफलम्।
अर्थ — ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, हवन अत्यंत फलदायी होता है।
📖 मत्स्य पुराण
ग्रहणे चन्द्रसूर्ययोर्जपहोमादिकं शुभम्।
अर्थ — सूर्य या चंद्र ग्रहण में जप, हवन, दान शुभ और कई गुना फलदायक।
🔥 1️⃣ हवन सामग्री (ग्रंथोक्त)
चंद्र ग्रहण में यदि हवन करें तो:
• गंगाजल
• काले तिल
• जौ
• घृत (शुद्ध गाय का घी)
• सफेद चंदन
• बिल्व पत्र
• कपूर
• नवग्रह समिधा
विशेष: चंद्र ग्रहण में तिल व जौ प्रधान माने गए हैं।
📿 2️⃣ जप – तांत्रिक एवं वैदिक
🌑 राहु शांति जप
📖 ब्रह्मवैवर्त पुराण
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
✔ न्यूनतम 108 जप
✔ ग्रहण काल में किया गया जप हजार गुना फल देता है
🌕 चंद्र शांति मंत्र
ॐ सोमाय नमः
मानसिक शांति हेतु 108 या 1008 जप
🛡 3️⃣ राहु कवच (संक्षेप)
📖 ब्रह्माण्ड पुराण
राहु कवच का पाठ ग्रहण काल में करने से
• भय नाश
• मानसिक अशांति शमन
• अकस्मात बाधा शांति
(पूर्ण कवच 17 श्लोकों का है — चाहें तो पूरा दे सकता हूँ)
🌿 4️⃣ पौराणिक उपाय
• ग्रहण से पूर्व तुलसी पत्र भोजन में रखें
• ग्रहण पश्चात स्नान
• चंद्र दर्शन के बाद दान
दान वस्त्र:
• सफेद वस्त्र
• चावल
• चीनी
• दही
• चांदी
🧠 5️⃣ चार स्तर के उपाय
🌼 आध्यात्मिक
✔ मंत्र जप
✔ ध्यान
✔ मौन
💰 आर्थिक
✔ तिल दान
✔ अन्न दान
✔ गौ सेवा
🧍 शारीरिक
✔ ग्रहण बाद स्नान
✔ हल्का उपवास
🧘 मानसिक
✔ क्रोध त्याग
✔ नकारात्मक विचार त्याग
✔ चंद्र मंत्र जप
🌘 श्याभ्र (अंधकारमय) ग्रहण काल विशेष मंत्र
🌑 ग्रहण प्रभाव विचार
✧ सिंह क्षेत्र एवं पूर्वा फाल्गुनी जन्म विशेष फल ✧
📜 मूल श्लोक
सिंहराशौ ग्रहणे प्राप्ते पूर्वफल्गुनिसंभवाः।
लोकनाथेषु कलहो वित्तचिन्ता प्रजायते॥
मानभङ्गो मनोदैन्यं कार्यसिद्धिविघातकृत्।
पञ्चाहपूर्वमेवास्य प्रभावो दृश्यते भुवि॥
🪔 टीका (व्याख्या)
जब ग्रहण सिंह क्षेत्र में घटित होता है तब सूर्यत्व प्रधान होने से राजसत्ता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्धि से जुड़े विषय विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र शुक्राधीन होने के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा, संबंध, वैभव एवं सार्वजनिक छवि पर इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।
ग्रहण का प्रभाव केवल ग्रहण दिवस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लगभग पाँच दिन पूर्व से ही सामूहिक चेतना एवं वैश्विक परिस्थितियों में सूक्ष्म परिवर्तन प्रारम्भ हो जाते हैं। इस समय निर्णयों में अस्थिरता तथा विचारों में मतभेद बढ़ते देखे जाते हैं।
🔱 फलादेश (Predictive Indications)
🌍 वैश्विक स्तर
• राष्ट्र प्रमुखों, प्रशासनिक संस्थानों एवं प्रसिद्ध व्यक्तियों से जुड़े विवाद उभर सकते हैं।
• कूटनीतिक मतभेद या वैचारिक टकराव प्रमुख समाचार बन सकते हैं।
• अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थायी तनाव या असहमति बढ़ सकती है।
💰 आर्थिक प्रभाव
• आर्थिक निर्णयों में अनिश्चितता या बाजार मनोवृत्ति में उतार-चढ़ाव।
• निवेश, व्यापार या वित्तीय योजनाओं में अपेक्षित गति का अभाव।
• प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी आर्थिक चर्चाएँ बढ़ सकती हैं।
🧠 मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव
• निराशा, असंतोष या सामूहिक मानसिक दबाव की भावना।
• प्रतिष्ठा या छवि से संबंधित विषय संवेदनशील बन सकते हैं।
• योजनाएँ विलंबित या पुनर्विचार की स्थिति में आ सकती हैं।
🔠 विशेष प्रभाव समूह
जिन राष्ट्रों, नगरों, संस्थानों, प्रसिद्ध व्यक्तियों या प्रचलित नामों के प्रथम अक्षर —
T (ट) · D (द) · M (म) · Kh (ख) · J (ज) · I (इ) · F (फ) · A (अ) · L (ल) · Ch (च) — हों, उनके संदर्भ में घटनाएँ अधिक चर्चा में आने की संभावना मानी जाती है।
📖 संक्षिप्त भावार्थ (English Summary)
During an eclipse influencing the Leo domain, especially connected with Purva Phalguni energy, leadership structures, public reputation, and global relations may experience tension. About five days before the eclipse, disagreements, economic uncertainty, and psychological pressure may become noticeable worldwide, particularly affecting prominent entities symbolically linked to specific name vibrations
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