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ग्रहण 3 मार्च 2026सूतक

 

🌕 3 मार्च 2026

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमामंगलवारपूर्वा फाल्गुनीसिंह राशि

3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के बारे में वैज्ञानिक समय, भारत में दृश्यता, सूतक काल, वैश्विक दृश्यता और कुछ क्षेत्र-विशिष्ट संकेत को सटीक और प्रमाणित स्रोतों

📅 ग्रहण का समय (वैज्ञानिक) – भारत समय (IST)

🕒 ग्रहण शुरू: 3 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे
🌕 पूर्णता / कुल छाया: शाम लगभग 4:34 बजे से 5:33 बजे के बीच
🕖 ग्रहण समाप्त: 6:47 बजे
⏱️
कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट


सूतक काल (परंपरागत / भारतीय पंचांग)

ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले से सूतक मान्य होता हैयानी सुबह लगभग 6:20 बजे से
सूतक में परंपरागत शुभ कार्य (जैसे विवाह, नए काम आदि) टालने की सलाह दी जाती है


📍 भारत में दृश्यता (शहर-वार)

भारत में ग्रहण पूरे समय नहीं दिखेगाक्योंकि जन्मे हुए चंद्रमा के समय से चंद्रमा पहले से ग्रहण में है:

कुछ शहरों में अनुमानित दृश्यता

(चंद्रोदय से ग्रहण के अंतिम हिस्से तक)

🔹 कोलकाता (West Bengal):
चंद्र ग्रहण चंद्रास्त के साथ दिखेगालगभग 5:43 बजे तक

🔹 गुवाहाटी / दिब्रूगढ़ (Assam):
पूरे ग्रहण का अवलोकन संभवलगभग 2:14 बजे से 7:53 बजे तक (पूर्ण दृश्यता)

🔹 दिल्ली: लगभग 6:22 बजे तक दृश्य
🔹 लखनऊ: लगभग 45 मिनट तक दृश्य

👉 उन क्षेत्रों में जहां चंद्रमा ढल चुका होगा, वहाँ ग्रहण केवल अंतिम भाग लगेगाहवा, मौसम और दृश्य स्थिति पर भी निर्भर करेगा


🌎 वैश्विक दृश्यता (मुख्य देश/क्षेत्र)

यह ग्रहण उन हिस्सों में दिखाई देगा जहाँ चांद उस समय आकाश में होगा:

📌 पूरा ग्रहण दिखेगा:
पूर्वी एशियाचीन (Beijing)
दक्षिण-पूर्वी एशियाम्यांमार, थाईलैंड
न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया
कुछ भागों में उत्तरी/दक्षिणी अमेरिका ऐसा समय जहां चंद्रमा रात के समय दिखे

📌 कुछ भागों में आंशिक:
भारत के अधिकतर हिस्सों (केवल अंतिम हिस्से)
दक्षिण अमेरिका (ब्राज़ील, अर्जेंटीना)
कनाडा के कुछ हिस्से

यह सब ग्रहण के दृश्य होने का क्षेत्र हैकिसी देश का अस्तित्व निश्चित घटना नहीं, केवल वैज्ञानिक दृश्यता सूची है


 

⚖️ वैज्ञानिक दृश्यता संक्षेप

🕒 भारत में: लगभग 6:20 बजे से 6:47 बजे तक अंतिम हिस्सा दिखाई देगा (विभिन्न शहरों में थोड़ा भिन्न)
📌 पूर्ण ग्रहण का दृश्य उत्तर-पूर्वी भारत (Assam आदि) में सबसे स्पष्ट होगा
🌍 दुनिया में: पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका के कुछ हिस्से में पूर्ण/आंशिक दृश्यता रहेगी
🕣 सूतक काल (भारतीय परंपरा): from सुबह लगभग 6:20 बजे

🌟 Purva Phalguni यस्य नक्षत्रे ग्रहणं तस्य देशस्य नाशः।
जिस नक्षत्र में ग्रहण हो, उस से संबंधित प्रदेश में कष्ट।

यस्य नक्षत्रे ग्रहणं तस्य देशस्य पीडनम्।
जिस नक्षत्र में ग्रहण हो, उस नक्षत्र से अधिष्ठित देश ,वर्ण,जाति,वर्ग ,संबंधित वृत्ति , कष्ट अनुभव करता , 1*   जिस नक्षत्र में ग्रहण पड़े*   उस नक्षत्र से अधिष्ठित प्रदेश*   उस दिशा का भूभाग पूर्व और पूर्वोत्तर दिशा प्रमुख सक्रिय दिशा मानी जाएगी।

राश्यां ग्रहणसम्भूते तद्राशेः कारकं क्षयं वदेत्।
जिस राशि में ग्रहण हो, उस राशि से संबंधित कारक प्रभावित।

सिंह राशि कारक:• राजसत्ताअग्नि तत्वस्वर्ण वर्ग धातु वर्ग में अस्थिरता संभावित:Various Prablelms - <TROUBLE<LOSS<PROBLEM;------

 पूर्व दिशापूर्वोत्तर क्षेत्रसमुद्र पार पूर्वी राष्ट्रपूर्वोत्तर भारत ,पूर्व एशिया (चीन, जापान, कोरिया) में पूर्ण रूप सेऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में अत्यंत स्पष्ट;पूर्वोत्तर भारत (असम, अरुणाचल)
बांग्लादेशम्यांमारचीन का दक्षिणी/पूर्वी भागजापानऑस्ट्रेलिया (पूर्ण दृश्यता क्षेत्र) पूर्वी महाराष्ट्र (नागपुर क्षेत्र)• मालवा (मध्य प्रदेश)• उत्तरी कर्नाटकमहेश्वर-ओंकारेश्वर क्षेत्रनर्मदा बेसिन (MP-Gujarat
पश्चिमी भारत में आंशिकराशि क्षेत्र: सिंह (Leo)• अधिदेवता: भगस्वामी ग्रह: शुक्रमूषक/चूहाकोयल सुशोभित, मधुर ध्वनि वाले पक्षीपलाश (Butea monosperma)अशोकसेमलगेहूँ
चावल (सफेद अन्न वर्ग)• मीठे पदार्थदुग्ध उत्पादघीशर्कराआमकेला मीठे रसीले फल अंगूर*कृषि * पशु हानि*• (असम, अरुणाचल, पूर्वी भारत) पूर्वी महाराष्ट्रमुख्य शहर: नागपुर, अमरावती, वर्धाराज्य: महाराष्ट्र.वर्तमान: मालवा क्षेत्रराज्य: मध्य प्रदेशमुख्य शहर: उज्जैन, इंदौर• वर्तमान: उत्तरी कर्नाटक• शहर: हुबली, बेलगावी, विजयनगर (हम्पी) •: महेश्वर (मध्य प्रदेश)नर्मदा तट क्षेत्रगुजरात का कुछ भाग; तांबा स्वर्ण वर्ग Costly;

🔤 संबंधित अक्षर मो • टा • टी • टू इन अक्षरों से नाम वाले व्यक्तियों पर प्रभाव अधिक संवेदनशील माना जाता है।


👤 व्यक्ति पर प्रभाव

यदि जन्म चंद्र पूर्वा फाल्गुनी में हो:

• मानसिक अस्थिरता कुछ दिन
• संबंधों में अहं टकराव
• विलासिता में अतिशय व्यय
• प्रेम/दाम्पत्य में गलतफहमी
• निर्णय भावनात्मक होकर लेने का खतरा

यदि कुंडली में चंद्र कमजोर हो तो प्रभाव अधिक।

🌍 विश्व-व्यापी प्रभाव (बिंदुवार)

1️    राजनीतिक स्तर-

मो • टा • टी • टू-M

राष्ट्रों में वैचारिक मतभेद वृद्धि
राजदूत/उच्च पदाधिकारियों की यात्राओं में सावधानी
नीति परिवर्तन और सैन्य रणनीति पुनर्रचना
मित्र राष्ट्रों के समीकरण बदलना

📜 शास्त्र सिद्धांत:
सिंहराशौ ग्रहणे नृपपीडा
(
सिंह = सत्ता/राज्य)

मो • टा • टी • टू-M


2️ सामरिक / आक्रमण प्रवृत्ति

प्रत्यक्ष युद्ध नहीं, पर सीमांत तनाव
रक्षा व्यय/रणनीतिक अभ्यास वृद्धि
सूचना युद्ध, साइबर दबाव

(मंगल दिवस + राहु प्रभाव)


3️ आर्थिक / सट्टा बाज़ार

मो • टा • टी • टू-M

तेल, घी, तिल, अनाज में मूल्य उतार-चढ़ाव
कपास, सूती धागा, मसाले (धनिया, हल्दी, काली मिर्च) में तेजी
धातुओं में मूल्य वृद्धि
धनवान वर्ग पर वित्तीय दबाव

📜तिल-धान्य-तैल-मूल्यानि परिवर्तन्ते ग्रहणे


4️ खाद्य और कृषि

कुछ क्षेत्रों में फसल हानि चर्चा
चना, गेहूं, जौ से जुड़े व्यापारियों को लाभ
खाद्य वस्तुओं के मूल्य बढ़ने की संभावना
पशुधन रोग आशंका (मौसमी)


5️ प्राकृतिक संकेत

पर्वतीय / ऊंचाई क्षेत्रों में अस्थिरता
अग्नि/दुर्घटना प्रवृत्ति
रेगिस्तानी क्षेत्रों में कठिनाई
वर्षा असंतुलन क्षेत्रीय रूप से


🇮🇳 भारतराज्य/क्षेत्र संकेत

(संभाव्य प्रवृत्तिनिश्चित घटना नहीं)

राजस्थान

जल/ताप/कृषि चर्चा
रेगिस्तानी चुनौतियाँ

गुजरात

व्यापारिक उतार-चढ़ाव
बंदरगाह/ऊर्जा नीति समीक्षा

महाराष्ट्र (मुंबई सहित)

वित्तीय बाजार अस्थिरता
तटीय मौसम सतर्कता

मध्यप्रदेश

कृषि क्षेत्र दबाव
धान्य मूल्य उतार-चढ़ाव

ओडिशा

तटीय प्राकृतिक कारक सक्रिय

असम / उत्तर-पूर्व

प्राकृतिक अस्थिरता
सीमांत सतर्कता

दिल्ली

राजनीतिक बयानबाज़ी
प्रशासनिक दबाव


🌏 भारत-चीन संबंध

प्रत्यक्ष टकराव की बजाय सामरिक संतुलन
आर्थिक वार्ता में सुधार संभावना
सीमांत नियंत्रण पर सतर्कता


👥 वर्ग-विशेष संकेत

मो • टा • टी • टू-MT () · D (द) · M (म) · Kh (ख) · J (ज) · I (इ) · F (फ) · A (अ) · L (ल) · Ch (च) 

नेता / उच्च पदाधिकारीनीति दबाव
कलाकार / अभिनेता / संगीत क्षेत्रछवि उतार-चढ़ाव
• 10
वर्ष तक के बच्चों हेतु स्वास्थ्य सावधानी
कृषक वर्गफसल जोखिम + कुछ को लाभ
व्यापारी वर्गधान्य/मसाला/तेल में अवसर


💍 दांपत्य प्रभाव

पूर्वा फाल्गुनी = दांपत्य नक्षत्र

पति-पत्नी विवाद वृद्धि संभावना
अहंकार आधारित मतभेद
विलासिता खर्च बढ़ना

उपाय: संयुक्त दीपक, संयुक्त जप


12 राशियाँसंक्षेप प्रभाव

सर्वाधिक अनुकूल

तुला
मीन
मिथुन

प्रयास बाद सफलता

वृश्चिक
कर्क
कुम्भ
धनु

सावधानी आवश्यक

सिंह (मुख्य)
मकर
कन्या
वृषभ


🔥 राहु शांति विधान

कम से कम 8 आहुति

मंत्र:
भ्राम् भ्रीम् भ्रौं सः राहवे नमः स्वाहा

हवन सामग्री:
काला तिल (अनिवार्य)
जौ
चावल
घी

दान:
पुराने परंतु उपयोगी वस्त्र
तिल
गुड़


🪔 दीपक नियम (शास्त्रोक्त)

📜 प्रमाण:
ग्रहणे तिलतैलेन दीपं दद्याद् भयापहम्।

विधि:

दीपक – 2 (राहु-चंद्र शांति)
वर्तिकासफेद सूती
तेलतिल तेल (घी मिश्रित कर सकते हैं)
दिशापूर्व या उत्तर


⏳ 6 माह प्रभाव चक्र

मार्चअप्रैल

उथल-पुथल, बयानबाज़ी, बाजार अस्थिरता

मईजून

नीति समायोजन, आर्थिक पुनर्संतुलन

जुलाईअगस्त

धीरे स्थिरता, शक्ति पुनर्गठन

अंतिम शास्त्रीय संतुलन

ग्रहणविनाशनहीं
ऊर्जा परिवर्तन बिंदु है।

मानव कर्म द्वारा अशुभ कम किया जा सकता है।

**************************************

🌕 चंद्र ग्रहण — शास्त्रीय आधार

🕉 ग्रंथ प्रमाण

📖 निर्णय सिंधु

ग्रहणे स्नानदानजपहोमादिकं महाफलम्।

अर्थ — ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, हवन अत्यंत फलदायी होता है।


📖 मत्स्य पुराण

ग्रहणे चन्द्रसूर्ययोर्जपहोमादिकं शुभम्।

अर्थ — सूर्य या चंद्र ग्रहण में जप, हवन, दान शुभ और कई गुना फलदायक।


🔥 1️⃣ हवन सामग्री (ग्रंथोक्त)

चंद्र ग्रहण में यदि हवन करें तो:

• गंगाजल
• काले तिल
• जौ
• घृत (शुद्ध गाय का घी)
• सफेद चंदन
• बिल्व पत्र
• कपूर
• नवग्रह समिधा

विशेष: चंद्र ग्रहण में तिल व जौ प्रधान माने गए हैं।


📿 2️⃣ जप – तांत्रिक एवं वैदिक

🌑 राहु शांति जप

📖 ब्रह्मवैवर्त पुराण

अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

✔ न्यूनतम 108 जप
✔ ग्रहण काल में किया गया जप हजार गुना फल देता है


🌕 चंद्र शांति मंत्र

ॐ सोमाय नमः

मानसिक शांति हेतु 108 या 1008 जप


🛡 3️⃣ राहु कवच (संक्षेप)

📖 ब्रह्माण्ड पुराण

राहु कवच का पाठ ग्रहण काल में करने से
• भय नाश
• मानसिक अशांति शमन
• अकस्मात बाधा शांति

(पूर्ण कवच 17 श्लोकों का है — चाहें तो पूरा दे सकता हूँ)


🌿 4️⃣ पौराणिक उपाय

• ग्रहण से पूर्व तुलसी पत्र भोजन में रखें
• ग्रहण पश्चात स्नान
• चंद्र दर्शन के बाद दान

दान वस्त्र:
• सफेद वस्त्र
• चावल
• चीनी
• दही
• चांदी


🧠 5️⃣ चार स्तर के उपाय

🌼 आध्यात्मिक

✔ मंत्र जप
✔ ध्यान
✔ मौन

💰 आर्थिक

✔ तिल दान
✔ अन्न दान
✔ गौ सेवा

🧍 शारीरिक

✔ ग्रहण बाद स्नान
✔ हल्का उपवास

🧘 मानसिक

✔ क्रोध त्याग
✔ नकारात्मक विचार त्याग
✔ चंद्र मंत्र जप


🌘 श्याभ्र (अंधकारमय) ग्रहण काल विशेष मंत्र


🌑 ग्रहण प्रभाव विचार

✧ सिंह क्षेत्र एवं पूर्वा फाल्गुनी जन्म विशेष फल ✧


📜 मूल श्लोक

सिंहराशौ ग्रहणे प्राप्ते पूर्वफल्गुनिसंभवाः।
लोकनाथेषु कलहो वित्तचिन्ता प्रजायते॥
मानभङ्गो मनोदैन्यं कार्यसिद्धिविघातकृत्।
पञ्चाहपूर्वमेवास्य प्रभावो दृश्यते भुवि॥


🪔 टीका (व्याख्या)

जब ग्रहण सिंह क्षेत्र में घटित होता है तब सूर्यत्व प्रधान होने से राजसत्ता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्धि से जुड़े विषय विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र शुक्राधीन होने के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा, संबंध, वैभव एवं सार्वजनिक छवि पर इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।

ग्रहण का प्रभाव केवल ग्रहण दिवस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लगभग पाँच दिन पूर्व से ही सामूहिक चेतना एवं वैश्विक परिस्थितियों में सूक्ष्म परिवर्तन प्रारम्भ हो जाते हैं। इस समय निर्णयों में अस्थिरता तथा विचारों में मतभेद बढ़ते देखे जाते हैं।


🔱 फलादेश (Predictive Indications)

🌍 वैश्विक स्तर

• राष्ट्र प्रमुखों, प्रशासनिक संस्थानों एवं प्रसिद्ध व्यक्तियों से जुड़े विवाद उभर सकते हैं।
• कूटनीतिक मतभेद या वैचारिक टकराव प्रमुख समाचार बन सकते हैं।
• अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थायी तनाव या असहमति बढ़ सकती है।

💰 आर्थिक प्रभाव

• आर्थिक निर्णयों में अनिश्चितता या बाजार मनोवृत्ति में उतार-चढ़ाव।
• निवेश, व्यापार या वित्तीय योजनाओं में अपेक्षित गति का अभाव।
• प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी आर्थिक चर्चाएँ बढ़ सकती हैं।

🧠 मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव

• निराशा, असंतोष या सामूहिक मानसिक दबाव की भावना।
• प्रतिष्ठा या छवि से संबंधित विषय संवेदनशील बन सकते हैं।
• योजनाएँ विलंबित या पुनर्विचार की स्थिति में आ सकती हैं।


🔠 विशेष प्रभाव समूह

जिन राष्ट्रों, नगरों, संस्थानों, प्रसिद्ध व्यक्तियों या प्रचलित नामों के प्रथम अक्षर —
T () · D (द) · M (म) · Kh (ख) · J (ज) · I (इ) · F (फ) · A (अ) · L (ल) · Ch (च) — हों, उनके संदर्भ में घटनाएँ अधिक चर्चा में आने की संभावना मानी जाती है।


📖 संक्षिप्त भावार्थ (English Summary)

During an eclipse influencing the Leo domain, especially connected with Purva Phalguni energy, leadership structures, public reputation, and global relations may experience tension. About five days before the eclipse, disagreements, economic uncertainty, and psychological pressure may become noticeable worldwide, particularly affecting prominent entities symbolically linked to specific name vibrations

🌘 ग्रहण विशेष वैश्विक प्रभाव विश्लेषण

✧ Eclipse Based Global Influence Analysis ✧


🔴 मुख्य ज्योतिषीय संकेत

Core Astrological Indication

ग्रहण का सर्वाधिक प्रभाव सिंह राशि एवं विशेषतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों, संस्थाओं एवं नाम ऊर्जा पर देखा जाएगा।

The eclipse influence is expected to be strongest on Leo energy patterns, especially those connected with Purva Phalguni Nakshatra — including individuals, institutions, places, and entities aligned with this vibration.


🌍 वैश्विक स्तर पर संभावित प्रभाव

Possible Global Manifestations

ग्रहण से लगभग 5 दिन पूर्व से विश्व स्तर पर निम्न परिस्थितियाँ सक्रिय होती दिखाई दे सकती हैं —

  • व्यापक मतभेद एवं वैचारिक टकराव

  • राष्ट्र प्रमुखों या नेतृत्व स्तर पर विवाद

  • नीतिगत असहमति एवं कूटनीतिक तनाव

  • आर्थिक अस्थिरता या बाज़ार असंतुलन

  • मानसिक दबाव एवं सामूहिक असंतोष की स्थिति

Approximately 5 days prior, global patterns may show:

  • ideological conflicts and disagreements

  • tensions among leadership figures

  • diplomatic or policy disputes

  • economic uncertainty or instability

  • collective psychological pressure


🔠 विशेष अक्षर प्रभाव क्षेत्र

Sensitive Initial Letter Influence

निम्न अक्षरों से प्रारम्भ होने वाले प्रचलित नाम, संस्थाएँ, शहर, कंपनि, ,प्रमुख व्यक्ति ,COUNTRY अधिक चर्चा या घटनात्मक परिस्थितियों से जुड़े दिखाई दे सकते हैं:

T () · D (द) · M (म) · Kh (ख) ·  I (इ) · MAXUIMUM· 

 Lesser-A (अ) ·  Ch (च)J (ज) ·F (फ) 

उदाहरण ऊर्जा संकेत (ध्वनि आधारित):

  • T — Tata जैसे नाम समूह

  • M — प्रमुख नेतृत्व या संस्थागत नाम

  • Kh / J — राजनीतिक या प्रशासनिक पहचान

  • I / F / Ch — अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, केंद्र या परियोजनाएँ

(यह ध्वनि-ऊर्जा आधारित ज्योतिषीय संकेत है, ।)


⚔ संभावित घटनात्मक प्रवृत्तियाँ

Possible Event Trends

इस अवधि में विश्व स्तर पर निम्न प्रकार की परिस्थितियाँ उभर सकती हैं:

  • देशों के बीच मतभेद या रणनीतिक तनाव

  • सीमित संघर्ष या युद्ध जैसी स्थिति की चर्चा

  • गठबंधन परिवर्तन या शक्ति संतुलन बदलाव

  • आर्थिक निर्णयों से जन असंतोष

  • नेतृत्व परिवर्तन या छवि चुनौती

Possible manifestations include:

  • geopolitical disagreements

  • discussions of conflicts or war-like tensions

  • alliance restructuring

  • economic policy reactions

  • leadership image challenges


🪐 ग्रह कारण (Planetary Drivers)

इन परिस्थितियों के पीछे प्रमुख ग्रह प्रभाव माने जाएंगे:

  • मंगल (Mars) — आक्रामकता, सैन्य सक्रियता

  • सूर्य (Sun) — सत्ता एवं नेतृत्व संघर्ष

  • गुरु (Jupiter) — वैचारिक टकराव, नीति विस्तार

  • राहु (Rahu) — भ्रम, वैश्विक असंतुलन, अप्रत्याशित घटनाएँ

Planetary drivers:

  • Mars → assertion & conflict energy

  • Sun → authority dynamics

  • Jupiter → ideological expansion

  • Rahu → uncertainty & sudden developments


⏳ प्रभाव अवधि

Duration of Influence

ग्रहण प्रभाव चरणबद्ध रूप से कार्य करेगा —

⭐ प्रमुख प्रभाव: आगामी 6 माह तक स्पष्ट सक्रियता
⭐ सूक्ष्म दीर्घ प्रभाव: अधिकतम 3 वर्ष तक विभिन्न रूपों में प्रकट

The eclipse influence unfolds gradually:

⭐ Strong phase: next 6 months
⭐ Subtle extended influence: up to 3 years

इस दौरान समय-समय पर:

  • आर्थिक उतार-चढ़ाव

  • नीतिगत परिवर्तन

  • नेतृत्व चुनौतियाँ

  • वैश्विक मतभेद

पुनः उभर सकते हैं।

📜 भविष्यवाणी शैली श्लोक (फलादेश प्रधान)

सिंहराशौ ग्रहणे सोमे लोकक्षोभो प्रवर्तते ।
T - काराद्येषु नामेषु मानभङ्गो विशेषतः ॥

M (म) काराख्येषु नेतृत्वेषु चिन्तावृद्धिर्भविष्यति ।
Kh (ख) / J (ज) कारसमुद्भूते राजद्वारे विवादकृत् ॥

T () · D (द) · M (म) · Kh (ख) · J (ज) · I (इ) · F (फ) · A (अ) · L (ल) · Ch (च) आद्येषु देशेषु संस्थासु च विचालना ।
अर्थक्षयो मतभेदाश्च कालयोगेन दृश्यते ॥


🌼 हिंदी भावार्थ (संक्षेप)

  • T (टा) — प्रसिद्ध नाम, ब्रांड, संस्थान प्रतिष्ठा परीक्षा से गुजर सकते हैं।

  • M (म) — नेतृत्व, प्रशासन या बड़े पदों पर मानसिक दबाव।

  • Kh (ख) / J (ज) — राजनीतिक-प्रशासनिक मतभेद या निर्णय संघर्ष।

  • I (इ) / F (फ) / Ch (च) A;— अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, देश या परियोजनाओं में अस्थिरता व आर्थिक दबाव।


🌿 दार्शनिक दृष्टि

Philosophical Insight

यह काल स्थायी नकारात्मकता का नहीं, बल्कि परिवर्तन एवं पुनर्संतुलन (Transformation & Reset) का संकेत माना जाता है।

This period represents transformation and recalibration rather than permanent adversity.


वृष, कन्या एवं मकर राशि पर सिंह चन्द्र ग्रहण प्रभाव हेतु शास्त्रीय शैली में श्लोक, अर्थ सहित दिया गया है।


📜 संस्कृत श्लोक

सिंहराशौ यदा चन्द्रग्रहणं समुपस्थितम् ।
वृष मकरेष्वेव फलस्पर्शो विशेषतः ॥
मनःक्लेशो वित्त चिन्ता कर्म मार्गे विलम्बता ।
काल क्रमेण शान्तिः स्यात् धैर्येण शुभ सिद्धयः ॥


जब सिंह राशि में चन्द्र ग्रहण होता है, तब उसका विशेष प्रभाव वृष, कन्या और मकर राशि से सम्बद्ध क्षेत्रों पर भी दिखाई देता है।

इस अवधि में मानसिक चिंता, आर्थिक विचार-दबाव तथा कार्यों में विलम्ब जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
समय के साथ धैर्य रखने पर स्थितियाँ पुनः संतुलित होकर शुभ परिणाम की ओर बढ़ती हैं।

सिंहे चन्द्रग्रहणे प्राप्ते वृषकन्यामकरेषु च ।
चिन्ता वित्तव्ययः क्लेशो विलम्बः कर्मणि दृश्यते ॥


सिंह राशि में चन्द्र ग्रहण होने पर वृष,  मकर से सम्बन्धित क्षेत्रों में

चिन्ता, धन व्यय, मानसिक दबाव तथा कार्यों में विलम्ब की स्थितियाँ देखी जाती हैं।


During a lunar eclipse in Leo, Taurus, Virgo, and Capricorn domains may experience

mental strain, financial outflow, and delays in important activities.


When a lunar eclipse occurs in Leo, its energetic influence extends notably toward Taurus, Virgo, and Capricorn domains.

This phase may bring mental pressure, financial concerns, and delays in professional matters.
With time and stability, balance gradually restores and constructive outcomes emerge.


ॐ राहवे नमः

ॐ चन्द्राय नमः

ग्रहण में मंत्र मन ही मन करें — उच्च स्वर आवश्यक नहीं।

*********************

📖 ब्रह्माण्ड पुराण

🔹 श्री राहु कवच — पूर्ण पाठ (अर्थ सहित)

अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रस्य कश्यप ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। राहुर्देवता। राहु प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥


🔸 ध्यान

अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥

अर्थ: आधा शरीर धारण करने वाले, प्रचंड बलशाली, सूर्य-चन्द्र को ग्रसित करने की सामर्थ्य वाले सिंहिका पुत्र राहु को मैं प्रणाम करता हूँ।


🔹 कवच श्लोक

राहुर्मे शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः।
चक्षुषी मे पातु नित्यं मेघवर्णो महाबलः॥

अर्थ: लोकवंदित, मेघवर्ण महाबली राहु मेरे मस्तक और नेत्रों की रक्षा करें।


कर्णौ मे पातु सर्वज्ञो नासिकां मे सदा विभुः।
मुखं मे सिंहिकासूनुः कण्ठं मे कठिनप्रभः॥

अर्थ: सर्वज्ञ राहु मेरे कानों की, विभु स्वरूप नासिका की, तथा सिंहिका पुत्र मुख और कंठ की रक्षा करें।


भुजौ मे पातु दैत्येन्द्रो हस्तौ मे विकटः प्रभुः।
उरः पातु तमोमूर्तिः हृदयं पातु सर्वदा॥

अर्थ: दैत्यों के अधिपति राहु मेरी भुजाओं-हाथों की रक्षा करें, तमोमूर्ति मेरे वक्ष और हृदय की रक्षा करें।


नाभिं मे पातु सिंहिकेयः कटिं मे पातु च सर्वदा।
ऊरू मे पातु मेघाभो जानुनी पातु मे सदा॥

अर्थ: सिंहिकेय राहु नाभि-कटि की रक्षा करें, मेघाभ स्वरूप जाँघ-घुटनों की रक्षा करें।


जङ्घे पातु सुरारातिः पादौ मे पातु सर्वदा।
सर्वाङ्गं मे सदा पातु राहुर्दुष्टविनाशकः॥

अर्थ: देवशत्रु कहलाने वाले राहु मेरी पिंडलियों-पैरों तथा सम्पूर्ण शरीर की रक्षा करें और दुष्ट बाधाओं का नाश करें।


🔸 फलश्रुति

इदं कवचमज्ञानं यो पठेत् श्रद्धयान्वितः।
सर्वरोगभयात् मुक्तो दीर्घायुरधिगच्छति॥

ग्रहपीडां विनाश्याशु धनधान्यसमृद्धिमान्।
लभते नात्र संशयो राहुप्रीतिः प्रजायते॥

अर्थ: श्रद्धा से पाठ करने पर रोग-भय शांति, ग्रहबाधा निवृत्ति, धन-समृद्धि तथा राहु की कृपा प्राप्त होती है।

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श्राद्ध क्यों कैसे करे? पितृ दोष ,राहू ,सर्प दोष शांति ?तर्पण? विधि             श्राद्ध नामा - पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी श्राद्ध कब नहीं करें :   १. मृत्यु के प्रथम वर्ष श्राद्ध नहीं करे ।   २. पूर्वान्ह में शुक्ल्पक्ष में रात्री में और अपने जन्मदिन में श्राद्ध नहीं करना चाहिए ।   ३. कुर्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति अग्नि विष आदि के द्वारा आत्महत्या करता है उसके निमित्त श्राद्ध नहीं तर्पण का विधान नहीं है । ४. चतुदर्शी तिथि की श्राद्ध नहीं करना चाहिए , इस तिथि को मृत्यु प्राप्त पितरों का श्राद्ध दूसरे दिन अमावस्या को करने का विधान है । ५. जिनके पितृ युद्ध में शस्त्र से मारे गए हों उनका श्राद्ध चतुर्दशी को करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवारजनों पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं ।           श्राद्ध कब , क्या और कैसे करे जानने योग्य बाते           किस तिथि की श्राद्ध नहीं -  १. जिस तिथी को जिसकी मृत्यु हुई है , उस तिथि को ही श्राद्ध किया जाना चा...

रामचरितमानस की चौपाईयाँ-मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक (ramayan)

*****मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक रामचरितमानस की चौपाईयाँ-       रामचरितमानस के एक एक शब्द को मंत्रमय आशुतोष भगवान् शिव ने बना दिया |इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या के लिए सुन्दरकाण्ड या कार्य उद्देश्य के लिए लिखित चौपाई का सम्पुट लगा कर रामचरितमानस का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं | -सोमवार,बुधवार,गुरूवार,शुक्रवार शुक्ल पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष दशमी से कृष्ण पक्ष पंचमी तक के काल में (चतुर्थी, चतुर्दशी तिथि छोड़कर )प्रारंभ करे -   वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को स्मरण कर  इनका सम्पुट लगा कर पढ़े या जप १०८ प्रतिदिन करते हैं तो ११वे दिन १०८आहुति दे | अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा , २॰ तिल , ३॰ शुद्ध घी , ४॰ चीनी , ५॰ अगर , ६॰ तगर , ७॰ कपूर , ८॰ शुद्ध केसर , ९॰ नागरमोथा , १०॰ पञ्चमेवा , ११॰ जौ और १२॰ चावल। १॰ विपत्ति-नाश - “ राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।। ” २॰ संकट-नाश - “ जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं ना...

दुर्गा जी के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए?

दुर्गा जी   के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों   के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए ? अभिषेक किस पदार्थ से करने पर हम किस मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं एवं आपत्ति विपत्ति से सुरक्षा कवच निर्माण कर सकते हैं | दुर्गा जी को अर्पित सामग्री का विशेष महत्व होता है | दुर्गा जी का अभिषेक या दुर्गा की मूर्ति पर किस पदार्थ को अर्पण करने के क्या लाभ होते हैं | दुर्गा जी शक्ति की देवी हैं शीघ्र पूजा या पूजा सामग्री अर्पण करने के शुभ अशुभ फल प्रदान करती हैं | 1- दुर्गा जी को सुगंधित द्रव्य अर्थात ऐसे पदार्थ ऐसे पुष्प जिनमें सुगंध हो उनको अर्पित करने से पारिवारिक सुख शांति एवं मनोबल में वृद्धि होती है | 2- दूध से दुर्गा जी का अभिषेक करने पर कार्यों में सफलता एवं मन में प्रसन्नता बढ़ती है | 3- दही से दुर्गा जी की पूजा करने पर विघ्नों का नाश होता है | परेशानियों में कमी होती है | संभावित आपत्तियों का अवरोध होता है | संकट से व्यक्ति बाहर निकल पाता है | 4- घी के द्वारा अभिषेक करने पर सर्वसामान्य सुख एवं दांपत्य सुख में वृद्धि होती...

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें |

श्राद्ध क्या है ? “ श्रद्धया यत कृतं तात श्राद्धं | “ अर्थात श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म श्राद्ध है | अपने माता पिता एवं पूर्वजो की प्रसन्नता के लिए एवं उनके ऋण से मुक्ति की विधि है | श्राद्ध क्यों करना चाहिए   ? पितृ ऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाना अति आवश्यक है | श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम ? यदि मानव योनी में समर्थ होते हुए भी हम अपने जन्मदाता के लिए कुछ नहीं करते हैं या जिन पूर्वज के हम अंश ( रक्त , जींस ) है , यदि उनका स्मरण या उनके निमित्त दान आदि नहीं करते हैं , तो उनकी आत्मा   को कष्ट होता है , वे रुष्ट होकर , अपने अंश्जो वंशजों को श्राप देते हैं | जो पीढ़ी दर पीढ़ी संतान में मंद बुद्धि से लेकर सभी प्रकार की प्रगति अवरुद्ध कर देते हैं | ज्योतिष में इस प्रकार के अनेक शाप योग हैं |   कब , क्यों श्राद्ध किया जाना आवश्यक होता है   ? यदि हम   96  अवसर पर   श्राद्ध   नहीं कर सकते हैं तो कम से कम मित्रों के लिए पिता माता की वार्षिक तिथि पर यह अश्वनी मास जिसे क्वांर का माह    भी कहा ज...

श्राद्ध रहस्य प्रश्न शंका समाधान ,श्राद्ध : जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?

संतान को विकलांगता, अल्पायु से बचाइए श्राद्ध - पितरों से वरदान लीजिये पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी jyotish9999@gmail.com , 9424446706   श्राद्ध : जानने  योग्य   महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?  श्राद्ध से जुड़े हर सवाल का जवाब | पितृ दोष शांति? राहू, सर्प दोष शांति? श्रद्धा से श्राद्ध करिए  श्राद्ध कब करे? किसको भोजन हेतु बुलाएँ? पितृ दोष, राहू, सर्प दोष शांति? तर्पण? श्राद्ध क्या है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल एवं सबके सामर्थ्य की नहीं है, कोई उपाय ? श्राद्ध कब से प्रारंभ होता है ? प्रथम श्राद्ध किसका होता है ? श्राद्ध, कृष्ण पक्ष में ही क्यों किया जाता है श्राद्ध किन२ शहरों में  किया जा सकता है ? क्या गया श्राद्ध सर्वोपरि है ? तिथि अमावस्या क्या है ?श्राद्द कार्य ,में इसका महत्व क्यों? कितने प्रकार के   श्राद्ध होते   हैं वर्ष में   कितने अवसर श्राद्ध के होते हैं? कब  श्राद्ध किया जाना...

गणेश विसृजन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि

28 सितंबर गणेश विसर्जन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि किसी भी कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए जिस प्रकार उसका प्रारंभ किया जाता है समापन भी किया जाना उद्देश्य होता है। गणेश जी की स्थापना पार्थिव पार्थिव (मिटटीएवं जल   तत्व निर्मित)     स्वरूप में करने के पश्चात दिनांक 23 को उस पार्थिव स्वरूप का विसर्जन किया जाना ज्योतिष के आधार पर सुयोग है। किसी कार्य करने के पश्चात उसके परिणाम शुभ , सुखद , हर्षद एवं सफलता प्रदायक हो यह एक सामान्य उद्देश्य होता है।किसी भी प्रकार की बाधा व्यवधान या अनिश्ट ना हो। ज्योतिष के आधार पर लग्न को श्रेष्ठता प्रदान की गई है | होरा मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है।     गणेश जी का संबंध बुधवार दिन अथवा बुद्धि से ज्ञान से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों प्रतियोगियों एवं बुद्धि एवं ज्ञान में रूचि है , ऐसे लोगों के लिए बुध की होरा श्रेष्ठ होगी तथा उच्च पद , गरिमा , गुरुता , बड़प्पन , ज्ञान , निर्णय दक्षता में वृद्धि के लिए गुरु की हो रहा श्रेष्ठ होगी | इसके साथ ही जल में विसर्जन कार्य होता है अतः चंद्र की होरा सामा...

श्राद्ध रहस्य - श्राद्ध क्यों करे ? कब श्राद्ध नहीं करे ? पिंड रहित श्राद्ध ?

श्राद्ध रहस्य - क्यों करे , न करे ? पिंड रहित , महालय ? किसी भी कर्म का पूर्ण फल विधि सहित करने पर ही मिलता है | * श्राद्ध में गाय का ही दूध प्रयोग करे |( विष्णु पुराण ) | श्राद्ध भोजन में तिल अवश्य प्रयोग करे | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि - श्राद्ध अपरिहार्य - अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष तक पितर अत्यंत अपेक्षा से कष्ट की   स्थिति में जल , तिल की अपनी संतान से , प्रतिदिन आशा रखते है | अन्यथा दुखी होकर श्राप देकर चले जाते हैं | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि इसको नहीं करने से पीढ़ी दर पीढ़ी संतान मंद बुद्धि , दिव्यांगता .मानसिक रोग होते है | हेमाद्रि ग्रन्थ - आषाढ़ माह पूर्णिमा से /कन्या के सूर्य के समय एक दिन भी श्राद्ध कोई करता है तो , पितर एक वर्ष तक संतुष्ट/तृप्त रहते हैं | ( भद्र कृष्ण दूज को भरणी नक्षत्र , तृतीया को कृत्तिका नक्षत्र   या षष्ठी को रोहणी नक्षत्र या व्यतिपात मंगलवार को हो ये पिता को प्रिय योग है इस दिन व्रत , सूर्य पूजा , गौ दान गौ -दान श्रेष्ठ | - श्राद्ध का गया तुल्य फल- पितृपक्ष में मघा सूर्य की अष्टमी य त्रयोदशी को मघा नक्षत्र पर चंद्र ...

गणेश भगवान - पूजा मंत्र, आरती एवं विधि

सिद्धिविनायक विघ्नेश्वर गणेश भगवान की आरती। आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।  माता जा की पार्वती ,पिता महादेवा । एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।   मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी | जय गणेश जय गणेश देवा।  अंधन को आँख  देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया । जय गणेश जय गणेश देवा।   हार चढ़े फूल चढ़े ओर चढ़े मेवा । लड्डूअन का  भोग लगे संत करें सेवा।   जय गणेश जय गणेश देवा।   दीनन की लाज रखो ,शम्भू पत्र वारो।   मनोरथ को पूरा करो।  जाए बलिहारी।   जय गणेश जय गणेश देवा। आहुति मंत्र -  ॐ अंगारकाय नमः श्री 108 आहूतियां देना विशेष शुभ होता है इसमें शुद्ध घी ही दुर्वा एवं काले तिल का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण के अनुसार गायत्री-      मंत्र ओम महोत काय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। गणेश पूजन की सामग्री एक चौकिया पाटे  का प्रयोग करें । लाल वस्त्र या नारंगी वस्त्र उसपर बिछाएं। चावलों से 8पत्ती वाला कमल पुष्प स्वरूप बनाएं। गणेश पूजा में नार...

विवाह बाधा और परीक्षा में सफलता के लिए दुर्गा पूजा

विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन कर...

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश ...