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रुद्राष्टक :संगीत साधक मुकेश तिवारी द्वारा -राग भैरवी आधारित---अनेक रोगो की औषधि; शैव पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी 'ज्योतिष शिरोमणि"


 https://youtu.be/fWIB7z4w7Gg                              https://youtu.be/fWIB7z4w7Gg?t=71



  


 

कोई भी स्तुति प्रार्थना पल्ल्वित होती है*जब मन में समर्पण ,श्रद्धा ,आस्था की खाद हो।
मंत्र का प्रभाव स्वर ,शुद्धता ,दिशा,शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है.
यदि अर्थ का बोध हो तो मन्त्र का देवता अति शीघ्र  भी याचक की याचना पूर्ण करता है। क्योकि भावना में  नव रस का प्रवेश तभी होता है जब अर्थ ज्ञात हो. दुःख ,सुख ,हास्य,वीर ,श्रृंगार भावना के ही प्रकार हैं जो स्वर में प्रवेश करते हैं।
शिव तांडव या रुद्राष्टक सामान्य नहीं है.
अब तक जितने भी हमारे संज्ञान में रुद्राष्टक स्वर बद्ध  किये गए उनमे अर्थ प्रवणता /गम्यता का आभाव है या शब्दों की अशुद्धता या उच्चारण ऐसा है जो अर्थ बोध /ज्ञान होने ही नहीं देता.
रुद्राष्टक राग भैरवी  में स्वर  बद्ध किया गया।
जिससे सुनने वाले को अद्भुत आध्यत्मिक,मानसिक कामना पूरक सुख संतोष मिले.
भजन सम्राट अनूप जलोटा जी के शिष्य श्रीयुत मुकेश तिवारी द्वारा
रुद्राष्टक को राग भैरवी में  स्वर बद्ध करने के अनेक कारण हैं।
 गांधार युक्त,ऋषभ  रुद्राष्टक में बहुलता से प्रयोग हुआ है।
ऋषभ हृदय से उत्पन्न होता है ।
 (बिना भाव या आत्म विभोर हुए, समर्पण के बिना भक्ति संगीत
 प्रभावी  नहीं होता है।)
 इसके देवता ब्रह्मा है
पक्षी चातक या पपिहा के स्वर से साम्य रखता है।
इसका रंग  हरा और पीला  है ।
आध्यात्मिक मानसिक लाभ के अतिरिक्त रोगों में भी उपयोगी है।
स्वाधिष्ठान चक्र से संबंधित रोग
 -सुनने का समय प्रातः 7 से 11 श्रेष्ठ है 

 या शाम को के उपरांत 7 से 11 

अथवा 11 से 3 ratri का प्रयोग किया जा सकता है ।
राग़ रंजक होते हैं ।
मानसिक शारीरिक विचारों पर गहरा प्रभाव होता है ।
किसी भी राग का अधिकतम प्रभाव राग विशेष  को उसके सही समय पर सुनने से मिलता है।
-यह शरीर के चक्र में स्वाधीष्ठान चक्र से संबंधित  है ।इस राग़ का संबंध भक्ति ,करुणा एवं मानसिक प्रसन्नता से  है ।
शरीर के  आंतरिक चक्र ही विभिन्न मानसिक  शारीरिक स्थितियों के कारण हैं

 

रुद्राष्टक रोगों की अद्भुत औषधि
— शैव पंडित वि.के. तिवारी, 9424446706

रुद्राष्टक का नियमित पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रोगों में अद्भुत औषधि के रूप में कार्य करता है। शिव की स्तुति करते हुए यह पाठ शरीर के विभिन्न चक्रों को सक्रिय करता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।

इसका प्रभाव विशेष रूप से मानसिक संतुलन, तनाव, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, और तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकारों में देखा गया है। जब इसे भावपूर्ण और पूर्ण श्रद्धा के साथ किया जाता है, तो यह रोगी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

 राग भैरवी और स्वाधिष्ठान चक्र: शारीरिक और मानसिक संतुलन

1. राग भैरवी के शारीरिक लाभ

  • राग भैरवी का नियमित अभ्यास या श्रवण दांत, कफ, कोल्ड, ब्लड प्रेशर और पूरे तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने में सहायक होता है।
  • यह शरीर के स्वाधिष्ठान चक्र से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है, जो शरीर के दूसरे ऊर्जा केंद्र के रूप में कार्य करता है।

2. स्वाधिष्ठान चक्र का परिचय

  • स्वाधिष्ठान चक्र शरीर के 7 प्रमुख चक्रों में से दूसरा है, जिसे "स्वयं का निवास स्थान" कहा जाता है।
  • यह चक्र पेट के निचले हिस्से में, नाभि से चार अंगुल नीचे, त्रिकास्थि के पास स्थित होता है।
  • इसका मंत्र "वम (ङ्क्ररू)" है, और इसके देवता देवी दुर्गा और विश्वकर्मा हैं।
  • इसका प्रतीकात्मक पशु मगरमच्छ है, जो सुस्ती, भावहीनता और खतरे का प्रतीक है।

3. स्वाधिष्ठान चक्र की विशेषताएँ

  • यह चक्र कामुकता, इच्छाओं, रचनात्मकता और भावनाओं को संतुलित करता है।
  • इसमें 6 पंखुड़ियाँ होती हैं, जो 6 प्रमुख मनोविकारों (क्रोध, घृणा, वैमनस्य, क्रूरता, अभिलाषा, गर्व) का संकेत करती हैं।
  • यह चक्र आलस्य, भय, संदेह, प्रतिशोध, ईर्ष्या और लोभ जैसी नकारात्मक भावनाओं को भी नियंत्रित करता है, जो व्यक्ति के विकास में बाधक हो सकती हैं।

4. असंतुलन के परिणाम

  • शारीरिक समस्याएँ:
    • हार्निया, मासिक धर्म में अनियमितता, पाइल्स, पीठ में दर्द, मूत्राशय और गुर्दे की समस्याएं, जननांग रोग।
    • साइनसाइटिस, कूल्हे और जोड़ों के दर्द, रक्ताल्पता और ऊर्जा की कमी।
  • मानसिक समस्याएँ:
    • इच्छाशक्ति की कमी, थकान, असुरक्षा की भावना, कम कामेच्छा, अवसाद और चिड़चिड़ापन।
  • भावनात्मक असंतुलन:
    • अनियंत्रित भावनाएँ, अत्यधिक सुखों का आदी हो जाना और मानसिक रूप से असंतुलन।

5. संतुलन के लिए उपाय

  • रुद्राष्टक का दिए गए समय पर श्रवण करें, जिससे चक्र संतुलित हो सके।
  • नारंगी, मौसमी, पीले रंग के फल, फूल और सब्जियों का सेवन करें।
  • चक्र जल तत्व से जुड़ा हुआ है, इसलिए जल तत्वों को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

6. असंतुलन के लक्षण

  • मनोदशा में अत्यधिक परिवर्तन, व्यसनकारी व्यवहार, दुनिया से कटा हुआ महसूस करना।
  • असंतोष, अकेलापन, अत्यधिक स्नेह प्रदर्शन या अनियंत्रित यौन इच्छाएँ।

स्वाधिष्ठान चक्र के संतुलन से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है, और राग भैरवी इसमें अद्भुत औषधि की तरह कार्य करता है।

उपचार विधि:
रुद्राष्टक का पाठ सुबह और शाम के समय किया जाना चाहिए। इसे राग भैरवी में सुनने से मानसिक शांति और आंतरिक ऊर्जा का विकास होता है।

 jyotish Shiromani V,k.Tiwari-tiwaridixitastro@gmail,com(Consultant-Atro,Palmist,-Vastu)

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