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world भारतीय ज्योतिषीय विश्लेषण🌍 वर्ष 2026 :

 

🌍 वर्ष 2026 : वैश्विक एवं भारतीय ज्योतिषीय विश्लेषण

🌍 Year 2026 : Global & Indian Astrological Analysis

1️      ग्रहों का समग्र प्रभावविश्व एवं भारत

 By Pt. V. K. Tiwari, Dr. R. Dixit & Dr. S. Tiwari (Astrologer, Palmist, Vaastu Consultant)
📧 Email: tiwaridixitastro@gmail.com | 📞 94244446706 


वर्ष 2026 में नवग्रहों का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पृथ्वी के आंतरिक भाग, खनिज, जलस्तर और पर्यावरण पर भी स्पष्ट दिखाई देगा।
अमेरिका, रूस, चीन, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भू-गर्भीय और जलवायु परिवर्तन की घटनाएँ बढ़ेंगी।
भारत में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और कर्नाटक जैसे खनिज क्षेत्रों में परिवर्तनशील गतिविधियाँ देखी जाएँगी।
यह सिद्ध करता है कि ग्रह निर्जीव वस्तुओं, भूमि और राष्ट्रों को भी प्रभावित करते हैं।

In 2026, planetary influence will extend beyond human life to Earth’s core, minerals, water systems, and environment.
Countries like the USA, Russia, China, India, and Australia may experience geological and climatic shifts.
In India, mineral-rich states such as Jharkhand, Chhattisgarh, Odisha, and Karnataka will show noticeable changes.
This confirms that planetary forces affect land, matter, and nations alike.

2️    पूर्व दिशाउन्नति और समृद्धि

पूर्व दिशा में स्थित देशों जैसे जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया में आर्थिक और तकनीकी प्रगति होगी।
यह क्षेत्र शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में आगे बढ़ेगा।
भारत के पूर्वी राज्यपश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और असममें विकास योजनाओं का विस्तार होगा।
सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक उपलब्धियाँ बढ़ेंगी।

Eastern countries such as Japan, China, South Korea, and Indonesia will experience economic and technological growth.
This region will advance in education, research, and innovation.
In India, eastern states like West Bengal, Bihar, Odisha, and Assam will benefit from development programs.
Cultural awareness and intellectual progress will rise significantly.

3️ उत्तर दिशाप्राकृतिक असंतुलन


उत्तर दिशा में स्थित रूस, कनाडा, नॉर्वे और फिनलैंड में जलवायु अस्थिरता बढ़ेगी।
अत्यधिक ठंड, अनियमित हिमपात या बाढ़ जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं।
भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम असामान्य रहेगा।
कृषि, जल स्रोत और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

Northern countries like Russia, Canada, Norway, and Finland may face climatic instability.
Extreme cold, irregular snowfall, or floods are possible.
In India, Jammu & Kashmir, Ladakh, Himachal Pradesh, and Uttarakhand may experience unusual weather.
Agriculture, water resources, and daily life could be affected.

4️ पश्चिम दिशामूल्यवृद्धि और आर्थिक दबाव


पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में महँगाई बढ़ने की संभावना है।
ईंधन, भोजन और आवास की लागत पर दबाव रहेगा।
भारत के पश्चिमी राज्यमहाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और गोवामें वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।
व्यापार और उपभोक्ता वर्ग को संतुलन बनाए रखना होगा।

Western nations such as the USA, Germany, France, and the UK may face rising inflation.
Fuel, food, and housing costs will increase.
In India, Maharashtra, Gujarat, Rajasthan, and Goa may see price hikes.
Traders and consumers must manage finances carefully.

5️ दक्षिण दिशासंघर्ष और परिवर्तन


दक्षिण दिशा में ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना में सामाजिक बदलाव होंगे।
राजनीतिक अस्थिरता और जनआंदोलन संभव हैं।
भारत में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में सत्ता-समीकरण बदल सकते हैं।
सामाजिक विचारधाराओं में टकराव बढ़ेगा।

Southern regions like Brazil, South Africa, Australia, and Argentina may undergo social changes.
Political instability and public movements are possible.
In India, Tamil Nadu, Kerala, Karnataka, and Andhra Pradesh may see shifts in power.
Ideological conflicts could increase.


6️ मध्य क्षेत्रसंतुलन और स्थिरता


मध्य एशिया के देश जैसे कज़ाख़स्तान और उज्बेकिस्तान में संतुलन बना रहेगा।
व्यवस्था स्थिर और नियंत्रित रहेगी।
भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली क्षेत्र में प्रशासनिक संतुलन रहेगा।
तो अत्यधिक उन्नति, ही गंभीर अवरोध दिखाई देगा।

Central Asian countries like Kazakhstan and Uzbekistan will remain balanced.
Systems will stay stable and controlled.
In India, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, and the Delhi region will maintain administrative balance.
Neither extreme growth nor major setbacks are expected.

7️ प्राकृतिक तत्वों का असमान वितरण


विश्व स्तर पर वर्षा, ताप, वायु और शीत का वितरण असमान रहेगा।
अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में कहीं अधिक वर्षा तो कहीं सूखा होगा।
भारत में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में मौसम असंतुलित रह सकता है।
प्राकृतिक योजनाओं में सावधानी आवश्यक होगी।

Globally, rainfall, heat, wind, and cold will be unevenly distributed.
Africa and South America may face floods in some areas and droughts in others.
In India, Uttar Pradesh, Maharashtra, and Telangana may experience climatic imbalance.
Environmental planning will require caution.

8️ कृषि एवं अन्न उत्पादनशुभ संकेत


विश्व में भारत, चीन, ब्राज़ील और रूस में कृषि उत्पादन अच्छा रहेगा।
अनाज, फल और सब्ज़ियों की उपलब्धता बढ़ेगी।
भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश विशेष लाभ में रहेंगे।
किसानों की आय में वृद्धि के योग हैं।

Agricultural output will be strong in countries like India, China, Brazil, and Russia.
Availability of grains, fruits, and vegetables will increase.
In India, Punjab, Haryana, Uttar Pradesh, and Andhra Pradesh will benefit most.
Farmers’ income may rise.

9️ कंबल नाग वर्षरोग का संकेत


विश्व के घनी आबादी वाले देशोंभारत, चीन, नाइजीरियामें स्वास्थ्य चुनौतियाँ बढ़ेंगी।
संक्रामक रोगों का फैलाव संभव है।
भारत के महानगरदिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नईमें सतर्कता आवश्यक होगी।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा।

Densely populated nations like India, China, and Nigeria may face health challenges.
Spread of infectious diseases is possible.
In Indian metros such as Delhi, Mumbai, Kolkata, and Chennai, vigilance is required.
Healthcare systems may face pressure.

🔟 जनकल्याण एवं शासन प्रयास


विश्व के शासक वर्ग जनसमर्थन बढ़ाने हेतु योजनाएँ लाएँगे।
भारत, फ्रांस और जापान में सामाजिक योजनाएँ तेज़ होंगी।
भारत में केंद्र और राज्य सरकारें जनहित पर ध्यान देंगी।
लोककल्याण का भाव बढ़ेगा।

World leaders will introduce welfare schemes to gain public support.
India, France, and Japan will expand social programs.
In India, both central and state governments will focus on public welfare.
Concern for citizens will increase.

1️1️ पीली वस्तुओं की प्रधानता


हल्दी, मक्का और दालों का उत्पादन भारत और थाईलैंड में बढ़ेगा।
पीले फल जैसे केला और आम प्रचुर मात्रा में होंगे।
भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश लाभान्वित होंगे।
इन वस्तुओं के मूल्य सामान्य रहेंगे।

Production of turmeric, maize, and pulses will increase in India and Thailand.
Yellow fruits like bananas and mangoes will be abundant.
In India, Uttar Pradesh, Bihar, and Andhra Pradesh will benefit.
Prices of these items will remain stable.

1️2️ अपराध और तस्करी पर प्रभाव


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध व्यापार पर नियंत्रण बढ़ेगा।
भारत, मेक्सिको और ब्राज़ील में कानून सख़्त होगा।
भारत के सीमावर्ती राज्यपंजाब, राजस्थानमें सतर्कता बढ़ेगी।
अपराध पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे, पर नियंत्रण रहेगा।

Global control over illegal trade will strengthen.
India, Mexico, and Brazil will enforce stricter laws.
In India, border states like Punjab and Rajasthan will increase vigilance.
Crime will reduce but not vanish completely.

1️3️ सामाजिक और वैश्विक विखंडन


विश्व में वैचारिक मतभेद बढ़ेंगे।
यूरोप और मध्य पूर्व में आंतरिक संघर्ष उभर सकते हैं।
भारत में परिवार और संगठनों में मतभेद बढ़ेंगे।
सामाजिक धैर्य की परीक्षा होगी।

Ideological differences will rise globally.
Europe and the Middle East may see internal conflicts.
In India, disputes within families and organizations may increase.
Social patience will be tested.

1️4️ उच्च पदस्थों के लिए चुनौती

विश्व में राजनेता और उद्योगपति दबाव में रहेंगे।
अमेरिका, भारत और ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन संभव है।
भारत में वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री आलोचना झेल सकते हैं।
सावधानी और संयम आवश्यक होगा।

Global leaders and executives will face pressure.
Leadership changes may occur in the USA, India, and the UK.
In India, senior officials and ministers may face criticism.
Caution and restraint are essential.

1️5️ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि

भारत, न्यूज़ीलैंड और नीदरलैंड में दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
भारत के उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात को लाभ होगा।
दूध की कीमत स्थिर रहेगी।


Dairy production will increase in India, New Zealand, and the Netherlands.
Rural economies will strengthen.
In India, Uttar Pradesh, Rajasthan, and Gujarat will benefit.
Milk prices will remain stable.

1️6️ बुद्धिजीवी और अनुसंधान का उत्कर्ष


विश्व में वैज्ञानिक और शिक्षाविद नए शोध करेंगे।
भारत, जापान और जर्मनी में नवाचार बढ़ेगा।
भारत में बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद ज्ञान केंद्र बनेंगे।
नए आविष्कार समाज को दिशा देंगे।

Scientists and scholars worldwide will engage in new research.
Innovation will rise in India, Japan, and Germany.
In India, Bengaluru, Pune, and Hyderabad will emerge as knowledge hubs.
New inventions will guide society forward.

7️ नामाक्षर आधारित प्रभाव


जिन देशों या नगरों के नाम बाधाएँ मिल सकती हैं।
जैसे भारत में हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, असम, लखनऊ, सूरत।
विश्व में हंगरी, मैक्सिको, तुर्की, अर्जेंटीना, लाओस।
निर्णयों में सावधानी आवश्यक होगी।

Countries or cities starting with certain letters may face obstacles.
In India: Haryana, Maharashtra, Tamil Nadu, Assam, Lucknow, Surat.
Globally: Hungary, Mexico, Turkey, Argentina, Laos.
Careful decision-making is advised.

1 ग्रहों का सार्वभौमिक प्रभाव | Universal Planetary Influence

ग्रहों का प्रभाव केवल मनुष्य या पृथ्वी की सतह तक सीमित नहीं होता, बल्कि पृथ्वी के गर्भ, धातु, रत्न, वनस्पति, पशु-पक्षी और समस्त सृष्टि पर होता है। शनि से नीलम, गुरु से पुखराज, मंगल से मूंगा और शुक्र से हीरा उत्पन्न होना यही सिद्ध करता है कि निर्जीव पदार्थ भी ग्रहों से प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि स्थान, देश और प्रकृति ग्रहों के अनुसार फल देते हैं।
ग्रह चेतना के सूक्ष्म वाहक हैं और ब्रह्मांडीय संतुलन इन्हीं से संचालित होता है।

Planetary influence is not limited to humans or Earth’s surface; it extends to minerals, gemstones, plants, animals, and all creation. Sapphire from Saturn, Yellow Sapphire from Jupiter, Coral from Mars, and Diamond from Venus prove that even non-living matter responds to planetary energy.
Thus, regions, nations, and nature itself function according to planetary balance.

श्लोक:
ग्रहाः सर्वेषु भूतेषु प्रभावं कुर्वते सदा
चराचराणां लोकानां कारणं सुखदुःखयोः

ग्रह समस्त चर-अचर सृष्टि पर प्रभाव डालते हैं और सुख-दुःख के कारण बनते हैं।
ग्रंथ: बृहत्संहितावराहमिहिर

2️ पूर्व दिशा में समृद्धि | Prosperity in Eastern Direction

वर्ष 2026 में पूर्व दिशा से संबंधित क्षेत्रों में उन्नति, व्यापार वृद्धि और ज्ञान विस्तार के योग हैं। भारत में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम तथा विश्व में जापान, चीन, इंडोनेशिया और कोरिया जैसे देश लाभ में रहेंगे। शिक्षा, तकनीक और समुद्री व्यापार को विशेष बल मिलेगा।
पूर्व दिशा सूर्य की दिशा होने से नवसृजन का केंद्र बनती है।

In 2026, the eastern direction indicates prosperity, growth, and intellectual expansion. Indian states like West Bengal, Odisha, Assam, and countries such as Japan, China, Indonesia, and Korea will benefit.
Education, technology, and maritime trade will show visible progress.

श्लोक:
पूर्वे वृद्धिर्विद्यते नित्यं सूर्यतेजः प्रभावतः

सूर्य के प्रभाव से पूर्व दिशा में सदैव उन्नति होती है।
ग्रंथ: वास्तुशास्त्र


3️ उत्तर दिशा में प्राकृतिक असंतुलन | Northern Climatic Imbalance

उत्तर दिशा में वर्ष 2026 में प्राकृतिक अस्थिरता रहेगी। तापमान, हिमपात और जलवायु में असमानता दिखाई देगी। भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड तथा विश्व में रूस, कनाडा और स्कैंडिनेविया प्रभावित होंगे।
फसल, पशुपालन और जनजीवन पर दबाव रहेगा।

The northern direction will face climatic imbalance in 2026. Temperature fluctuations, irregular snowfall, and weather instability will affect regions.
Areas like Northern India, Russia, Canada, and Scandinavia may experience stress on agriculture and daily life.

श्लोक:
उत्तरदिक् जलवायुदोषेण क्लेशकारिणी

उत्तर दिशा में जलवायु दोष से कष्ट उत्पन्न होता है।
ग्रंथ: सामुद्रिक शास्त्र


4️ पश्चिम दिशा में महँगाई | Inflation in Western Regions


पश्चिम दिशा से जुड़े क्षेत्रों में मूल्य-वृद्धि की प्रबल संभावना है। भारत में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान तथा विश्व में अमेरिका, यूरोप के प्रमुख देश महँगाई से प्रभावित होंगे।
विशेष रूप से खाद्यान्न और कृषि-उत्पाद महँगे हो सकते हैं।

Western regions may experience inflation and price rise. Indian states like Maharashtra, Gujarat, Rajasthan, and countries in Europe and America may face increased costs.
Agricultural commodities will be most affected.

श्लोक:
पश्चिमे मूल्यवृद्धिः स्यात् कालदोषप्रभावतः

कालदोष के कारण पश्चिम दिशा में मूल्य वृद्धि होती है।
ग्रंथ: भविष्य पुराण


5️ दक्षिण दिशा में विग्रह | Conflicts in Southern Direction


दक्षिण दिशा में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक विग्रह के योग हैं। भारत में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक तथा विश्व में अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ भागों में परिवर्तन होंगे।
नेतृत्व और सत्ता संरचना में बदलाव संभव है।

The southern direction indicates political and social conflicts. Indian southern states and regions in Africa and Australia may witness leadership changes.
Social restructuring and administrative reforms are likely.

श्लोक:
दक्षिणे कलहवृद्धिः स्यात् ग्रहपीडनकारणात्

ग्रह पीड़ा से दक्षिण दिशा में कलह बढ़ता है।
ग्रंथ: नारद संहिता

6️ मध्य क्षेत्र में संतुलन | Stability in Central Regions


मध्य क्षेत्र में ग्रहों का मिश्रित किंतु शुभ प्रभाव रहेगा। भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा विश्व में मध्य एशिया स्थिरता अनुभव करेगा।
यह क्षेत्र संतुलन और समाधान का केंद्र रहेगा।

Central regions will experience balanced planetary influence. Indian central states and Central Asia will enjoy stability and gradual growth.
These areas may act as mediators globally.

श्लोक:
मध्ये समत्वयोगेन सुखदं फलमश्नुते
मध्य क्षेत्र में समत्व से सुखद फल प्राप्त होते हैं।
ग्रंथ: बृहत्पाराशर होरा


7️ प्राकृतिक वितरण में असमानता | Uneven Natural Distribution


वर्षा, गर्मी और शीत का वितरण असमान रहेगा। कहीं अत्यधिक वर्षा तो कहीं अपेक्षाकृत कम होगी, परंतु पूर्ण अभाव नहीं होगा।
भारत, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका विशेष रूप से प्रभावित होंगे।
Rainfall and temperature distribution will be uneven globally. Some regions will receive excess rain while others less.
India, Africa, and South America may face agricultural planning challenges.

श्लोक:
वृष्टिः विषमफलदा लोके कालदोषसमुद्भवा
कालदोष से वर्षा का फल असमान होता है।
ग्रंथ: वराह संहिता


8️ कृषि में प्रचुरता | Agricultural Abundance


कृषि, फल-फूल और अन्न उत्पादन वर्ष 2026 में अनुकूल रहेगा। भारत, ब्राज़ील और अर्जेंटीना में अच्छी पैदावार होगी।
किसानों के लिए यह वर्ष आशाजनक रहेगा।
Agriculture will remain favorable in 2026. Countries like India, Brazil, and Argentina will witness increased crop yield.
Farmers may experience better income stability.

श्लोक:
गुरुदृष्ट्या धान्यवृद्धिः स्यात् राष्ट्रे राष्ट्रे शुभा
गुरु की दृष्टि से धान्य वृद्धि होती है।
ग्रंथ: कृषि ज्योतिष


9️ कंबल नाग वर्ष प्रभाव | Kambal Naag Year Effect

द्वादश नाग गणना के अनुसार 2026 कंबल नाग वर्ष है। इससे रोग, जलवायु जनित समस्याएँ और शासकीय मतभेद बढ़ सकते हैं।
स्वास्थ्य-सावधानी अत्यंत आवश्यक होगी।
According to the Twelve-Naag cycle, 2026 is the Kambal Naag year. Diseases and administrative conflicts may increase.
Preventive health measures are essential.

श्लोक:
नागवर्षे रोगवृद्धिः स्यात् मेघदोषप्रभावतः
नाग वर्ष में मेघ दोष से रोग बढ़ते हैं।
ग्रंथ: नाग शास्त्र

10️ जनहित और सहयोग | Public Welfare & Cooperation


शासक वर्ग जनकल्याण के लिए अधिक प्रयास करेगा। जनता में सहयोग और सामूहिक चेतना बढ़ेगी।
लोकतांत्रिक मूल्यों को बल मिलेगा।
Rulers will focus on public welfare. Cooperation and collective responsibility among citizens will grow.
Democratic systems will strengthen.

श्लोक:
राजा प्रजाहिते नित्यं यत्नं कुर्यात् यथाशक्ति
राजा को सदा प्रजा हित में प्रयास करना चाहिए।
ग्रंथ: मनुस्मृति

11️ पीली वस्तुओं की प्रचुरता | Abundance of Yellow Products


पीले रंग से संबंधित फल, अन्न, वस्त्र और मसालों का उत्पादन अधिक होगा। हल्दी, चना, मक्का आदि सुलभ रहेंगे।
इनके मूल्य अपेक्षाकृत कम रहेंगे।


Yellow-colored products like turmeric, pulses, and grains will be abundant.
Prices may remain stable or decrease.

श्लोक:
गुरौ पीतवस्तुवृद्धिः स्यात् भूमौ सर्वत्र दृश्यते
गुरु के प्रभाव से पीली वस्तुओं की वृद्धि होती है।
ग्रंथ: ज्योतिषरत्नाकर

12️ अपराध वर्ग पर प्रभाव | Effect on Criminal Activities


रुद्र नमक वर्ष में अपराधियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। फिर भी धोखाधड़ी और तस्करी पूर्णतः समाप्त नहीं होगी।
कानूनी कठोरता बढ़ेगी।
Criminal elements may face obstacles in 2026. However, fraud and smuggling may not completely stop.
Law enforcement actions will intensify.

श्लोक:
पापे बाधा भवेद् नाशः सर्वथा विनाशनम्
पाप कर्म में बाधा आती है, पर पूर्ण नाश नहीं होता।
ग्रंथ: स्कंद पुराण

13️ युद्ध और विखंडन | War & Fragmentation


ग्रह दोष के कारण देशों, समुदायों और परिवारों में विखंडन बढ़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।
कूटनीति का महत्व बढ़ेगा।
Planetary afflictions may increase fragmentation among nations and families.
Diplomatic efforts will be crucial to avoid conflicts.

श्लोक:
ग्रहदोषे कलहो लोके राज्यभेदश्च जायते
ग्रह दोष से कलह और राज्य भेद होता है।
ग्रंथ: महाभारत

14️ प्रशासनिक संकट | Administrative Instability


उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए यह वर्ष सावधानीपूर्ण है। पदच्युत होने या स्वयं पद छोड़ने की स्थितियाँ बन सकती हैं।
नीतिगत निर्णय कठिन होंगे।
High-ranking officials may face removal or resignation.
Policy decisions will require caution.
राज्ये ग्रहपीडया नृपाः पतनं यान्ति कदाचन
ग्रह पीड़ा से शासक पतन को प्राप्त होते हैं।
ग्रंथ: राजधर्म शास्त्र

15️ दुग्ध और गन्ना उत्पादन | Milk & Sugarcane Growth


दूध, दही और गन्ने का उत्पादन 30–40% तक बढ़ सकता है।
इन वस्तुओं के मूल्य स्थिर रहेंगे।
Milk and sugarcane production may increase by 30–40%.
Prices are likely to remain stable.

श्लोक:
शुक्रे दुग्धरसवृद्धिः स्यात् भूमौ सुखप्रदा
शुक्र के प्रभाव से दुग्ध और रस की वृद्धि होती है।
ग्रंथ: गोशास्त्र


16️ धर्म और बौद्धिक उन्नति | Spiritual & Intellectual Rise


गुरु-शुक्र-बुध के विशेष योग से धार्मिक आस्था, ज्ञान और अनुसंधान में वृद्धि होगी।
नए आविष्कार और शोध सामने आएँगे।
The Jupiter-Venus-Mercury alignment enhances spirituality and intellectual creativity.
Innovations and research outcomes will be significant.

श्लोक:
गुरुशुक्रबुधयोगे धर्मबुद्धिविवर्धनम्
इस योग से धर्म और बुद्धि बढ़ती है।
ग्रंथ: बृहज्जातक

17️     अक्षर आधारित बाधा | Name-Letter Based Obstruction


, , , , , , , , , , , , , से आरंभ नाम वाले देश, नगर या संस्थाएँ अपेक्षित सफलता से वंचित रह सकती हैं।
निर्णयों में भ्रम और विलंब हो सकता है।

Countries, cities, or organizations starting with specific letters may face reduced success.
Decision-making may suffer delays or confusion.

श्लोक:
नामाक्षरे ग्रहदोषः कर्मसिद्धिं निरोधति

नाम के अक्षर पर ग्रह दोष कर्म सिद्धि में बाधा डालता है।
ग्रंथ: नारद ज्योतिष

🔶 ग्रंथीय आधार | Scriptural Foundation


बृहद्संहिता, नारदसंहिता और वराहमिहिर के अनुसार ग्रह केवल व्यक्ति या राष्ट्र नहीं, बल्कि देश, नगर, खनिज, जलवायु और पृथ्वी के गर्भ तक को प्रभावित करते हैं।

ग्रहा देशान् नगराणि भूमिं विनियच्छन्तिबृहद्संहिता भावार्थ
अर्थात ग्रहों के परिवर्तन से देशों की दशा, नगरों की उन्नति-पतन और प्राकृतिक घटनाएँ नियंत्रित होती हैं।


Classical texts like Brihat Samhita and Narada Samhita state that planets govern not only humans but also nations, cities, minerals, and climate.
Planetary transitions directly influence geography, prosperity, and disturbances.


🌍 अफ्रीका (Africa – Complete Analysis)

वर्ष 2026 में अफ्रीका पर मंगल-राहु-शनि का त्रिकोणीय प्रभाव रहेगा, जिससे प्राकृतिक संसाधन, खनिज और जल-क्षेत्रों को लेकर संघर्ष की स्थिति बनेगी।
प्रमुख नगर काहिरा, लागोस, नैरोबी, जोहानेसबर्ग, अदीस अबाबा में जनसंख्या दबाव, रोग और प्रशासनिक तनाव बढ़ेगा।
स्थान-प्रसिद्ध क्षेत्र जैसे कांगो बेसिन, सहारा मरुस्थल, नील नदी क्षेत्र, दक्षिण अफ्रीका की स्वर्ण पट्टी वैश्विक राजनीति के केंद्र बनेंगे।
हालाँकि गुरु की दृष्टि से कृषि, हरित ऊर्जा और औषधीय संसाधनों में दीर्घकालीन संभावनाएँ प्रबल होंगी।

Africa in 2026 experiences strong Mars–Rahu–Saturn influence, increasing tension over minerals, water, and resources.
Cities like Cairo, Lagos, Nairobi, Johannesburg, Addis Ababa face population stress and health challenges.
Famous regions such as the Congo Basin, Sahara Desert, Nile Valley, South African gold belt gain global attention.
Jupiter’s aspect supports long-term growth in agriculture, green energy, and medicinal resources.


🇷🇺 रूस (Russia – Complete Analysis)


रूस पर शनि की प्रधानता रहेगी, जो कठोर शासन, सैन्य अनुशासन और दीर्घकालीन रणनीति को दर्शाती है।
मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग, साइबेरिया, व्लादिवोस्तोक जैसे नगरों में ऊर्जा, रक्षा और जलवायु नीति प्रमुख रहेगी।
उत्तर रूस में अत्यधिक शीत और पूर्वी क्षेत्रों में संसाधन-आधारित दबाव बढ़ेगा।
ग्रंथीय दृष्टि से यह शनि-प्रधान राष्ट्र का धैर्य काल होगाधीमी पर स्थायी शक्ति।


Russia remains under dominant Saturn influence, indicating strict governance and long-term strategic control.
Cities such as Moscow, Saint Petersburg, Siberian regions, Vladivostok focus on energy and defense.
Northern cold extremes and eastern resource pressure intensify.
Scripturally, this is a “Saturn-dominant endurance phase” — slow but enduring strength.


🇺🇸 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA – Complete Analysis)


अमेरिका पर शुक्र-मंगल-शनि का मिश्रित प्रभाव रहेगा, जिससे सामाजिक विभाजन, आर्थिक बहस और नीति संघर्ष बढ़ेंगे।
न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी, लॉस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो नवाचार के साथ-साथ विरोध आंदोलनों के केंद्र बनेंगे।
पश्चिमी तट पर प्राकृतिक आपदाओं और पूर्वी वित्तीय क्षेत्रों में अस्थिरता के संकेत हैं।
फिर भी बुध-गुरु प्रभाव से तकनीक, रक्षा और अनुसंधान में अमेरिका अग्रणी रहेगा।


The USA faces a mixed Venus–Mars–Saturn influence, intensifying social and economic debates.
Cities like New York, Washington DC, Los Angeles, San Francisco, Chicago remain hubs of innovation and protest.
Western regions face natural risks, eastern financial zones see volatility.
Jupiter–Mercury support keeps the USA strong in technology and research.


🇨🇦 कनाडा (Canada – Complete Analysis)


कनाडा पर गुरु-शनि का संतुलित प्रभाव रहेगा, जो नीति, शिक्षा और स्वास्थ्य में स्थिरता देगा।
टोरंटो, वैंकूवर, मॉन्ट्रियल, ओटावा, कैलगरी सुरक्षित और योजनाबद्ध विकास का उदाहरण बनेंगे।
उत्तर कनाडा में जलवायु परिवर्तन के कारण संसाधन-उत्खनन और पर्यावरण संघर्ष दोनों बढ़ेंगे।
कुल मिलाकर कनाडा 2026 में स्थिर, सुरक्षित और विवेकपूर्ण राष्ट्र बना रहेगा।


Canada benefits from balanced Jupiter–Saturn influence, ensuring policy and social stability.
Cities like Toronto, Vancouver, Montreal, Ottawa, Calgary remain models of structured growth.
Northern Canada faces climate-driven resource and environmental challenges.
Overall, Canada stays stable, secure, and pragmatic.


🌆 विश्व के अन्य प्रमुख नगर स्थान-प्रसिद्ध क्षेत्र


लंदन, पेरिस, बर्लिन, रोमआर्थिक दबाव के साथ प्रशासनिक सुधार।
टोक्यो, सियोल, बीजिंग, शंघाईतकनीकी और औद्योगिक प्रभुत्व।
दुबई, रियाद, दोहानिर्माण, निवेश और भू-राजनीतिक महत्व।
सिंगापुर, हांगकांगवित्तीय पुनर्संरचना और डिजिटल शासन।


London, Paris, Berlin, Rome — governance reforms under economic pressure.
Tokyo, Seoul, Beijing, Shanghai — technological and industrial dominance.
Dubai, Riyadh, Doha — infrastructure, investment, and geopolitics.
Singapore, Hong Kong — financial restructuring and digital governance.


🔔 समापन निष्कर्ष | Final Conclusion


वर्ष 2026 विश्व के लिए परिवर्तन, संघर्ष और नव-निर्माण का वर्ष है।
ग्रह स्पष्ट संकेत देते हैं कि जो राष्ट्र धैर्य, नीति और विज्ञान के साथ चलेंगे, वही स्थायी लाभ पाएँगे।


The year 2026 is a phase of transformation, challenge, and reconstruction for the world.
Nations guided by patience, policy, and knowledge will secure lasting success.

 

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श्राद्ध क्यों कैसे करे? पितृ दोष ,राहू ,सर्प दोष शांति ?तर्पण? विधि             श्राद्ध नामा - पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी श्राद्ध कब नहीं करें :   १. मृत्यु के प्रथम वर्ष श्राद्ध नहीं करे ।   २. पूर्वान्ह में शुक्ल्पक्ष में रात्री में और अपने जन्मदिन में श्राद्ध नहीं करना चाहिए ।   ३. कुर्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति अग्नि विष आदि के द्वारा आत्महत्या करता है उसके निमित्त श्राद्ध नहीं तर्पण का विधान नहीं है । ४. चतुदर्शी तिथि की श्राद्ध नहीं करना चाहिए , इस तिथि को मृत्यु प्राप्त पितरों का श्राद्ध दूसरे दिन अमावस्या को करने का विधान है । ५. जिनके पितृ युद्ध में शस्त्र से मारे गए हों उनका श्राद्ध चतुर्दशी को करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवारजनों पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं ।           श्राद्ध कब , क्या और कैसे करे जानने योग्य बाते           किस तिथि की श्राद्ध नहीं -  १. जिस तिथी को जिसकी मृत्यु हुई है , उस तिथि को ही श्राद्ध किया जाना चा...

रामचरितमानस की चौपाईयाँ-मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक (ramayan)

*****मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक रामचरितमानस की चौपाईयाँ-       रामचरितमानस के एक एक शब्द को मंत्रमय आशुतोष भगवान् शिव ने बना दिया |इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या के लिए सुन्दरकाण्ड या कार्य उद्देश्य के लिए लिखित चौपाई का सम्पुट लगा कर रामचरितमानस का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं | -सोमवार,बुधवार,गुरूवार,शुक्रवार शुक्ल पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष दशमी से कृष्ण पक्ष पंचमी तक के काल में (चतुर्थी, चतुर्दशी तिथि छोड़कर )प्रारंभ करे -   वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को स्मरण कर  इनका सम्पुट लगा कर पढ़े या जप १०८ प्रतिदिन करते हैं तो ११वे दिन १०८आहुति दे | अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा , २॰ तिल , ३॰ शुद्ध घी , ४॰ चीनी , ५॰ अगर , ६॰ तगर , ७॰ कपूर , ८॰ शुद्ध केसर , ९॰ नागरमोथा , १०॰ पञ्चमेवा , ११॰ जौ और १२॰ चावल। १॰ विपत्ति-नाश - “ राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।। ” २॰ संकट-नाश - “ जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं ना...

दुर्गा जी के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए?

दुर्गा जी   के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों   के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए ? अभिषेक किस पदार्थ से करने पर हम किस मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं एवं आपत्ति विपत्ति से सुरक्षा कवच निर्माण कर सकते हैं | दुर्गा जी को अर्पित सामग्री का विशेष महत्व होता है | दुर्गा जी का अभिषेक या दुर्गा की मूर्ति पर किस पदार्थ को अर्पण करने के क्या लाभ होते हैं | दुर्गा जी शक्ति की देवी हैं शीघ्र पूजा या पूजा सामग्री अर्पण करने के शुभ अशुभ फल प्रदान करती हैं | 1- दुर्गा जी को सुगंधित द्रव्य अर्थात ऐसे पदार्थ ऐसे पुष्प जिनमें सुगंध हो उनको अर्पित करने से पारिवारिक सुख शांति एवं मनोबल में वृद्धि होती है | 2- दूध से दुर्गा जी का अभिषेक करने पर कार्यों में सफलता एवं मन में प्रसन्नता बढ़ती है | 3- दही से दुर्गा जी की पूजा करने पर विघ्नों का नाश होता है | परेशानियों में कमी होती है | संभावित आपत्तियों का अवरोध होता है | संकट से व्यक्ति बाहर निकल पाता है | 4- घी के द्वारा अभिषेक करने पर सर्वसामान्य सुख एवं दांपत्य सुख में वृद्धि होती...

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें |

श्राद्ध क्या है ? “ श्रद्धया यत कृतं तात श्राद्धं | “ अर्थात श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म श्राद्ध है | अपने माता पिता एवं पूर्वजो की प्रसन्नता के लिए एवं उनके ऋण से मुक्ति की विधि है | श्राद्ध क्यों करना चाहिए   ? पितृ ऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाना अति आवश्यक है | श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम ? यदि मानव योनी में समर्थ होते हुए भी हम अपने जन्मदाता के लिए कुछ नहीं करते हैं या जिन पूर्वज के हम अंश ( रक्त , जींस ) है , यदि उनका स्मरण या उनके निमित्त दान आदि नहीं करते हैं , तो उनकी आत्मा   को कष्ट होता है , वे रुष्ट होकर , अपने अंश्जो वंशजों को श्राप देते हैं | जो पीढ़ी दर पीढ़ी संतान में मंद बुद्धि से लेकर सभी प्रकार की प्रगति अवरुद्ध कर देते हैं | ज्योतिष में इस प्रकार के अनेक शाप योग हैं |   कब , क्यों श्राद्ध किया जाना आवश्यक होता है   ? यदि हम   96  अवसर पर   श्राद्ध   नहीं कर सकते हैं तो कम से कम मित्रों के लिए पिता माता की वार्षिक तिथि पर यह अश्वनी मास जिसे क्वांर का माह    भी कहा ज...

श्राद्ध रहस्य प्रश्न शंका समाधान ,श्राद्ध : जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?

संतान को विकलांगता, अल्पायु से बचाइए श्राद्ध - पितरों से वरदान लीजिये पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी jyotish9999@gmail.com , 9424446706   श्राद्ध : जानने  योग्य   महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?  श्राद्ध से जुड़े हर सवाल का जवाब | पितृ दोष शांति? राहू, सर्प दोष शांति? श्रद्धा से श्राद्ध करिए  श्राद्ध कब करे? किसको भोजन हेतु बुलाएँ? पितृ दोष, राहू, सर्प दोष शांति? तर्पण? श्राद्ध क्या है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल एवं सबके सामर्थ्य की नहीं है, कोई उपाय ? श्राद्ध कब से प्रारंभ होता है ? प्रथम श्राद्ध किसका होता है ? श्राद्ध, कृष्ण पक्ष में ही क्यों किया जाता है श्राद्ध किन२ शहरों में  किया जा सकता है ? क्या गया श्राद्ध सर्वोपरि है ? तिथि अमावस्या क्या है ?श्राद्द कार्य ,में इसका महत्व क्यों? कितने प्रकार के   श्राद्ध होते   हैं वर्ष में   कितने अवसर श्राद्ध के होते हैं? कब  श्राद्ध किया जाना...

गणेश विसृजन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि

28 सितंबर गणेश विसर्जन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि किसी भी कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए जिस प्रकार उसका प्रारंभ किया जाता है समापन भी किया जाना उद्देश्य होता है। गणेश जी की स्थापना पार्थिव पार्थिव (मिटटीएवं जल   तत्व निर्मित)     स्वरूप में करने के पश्चात दिनांक 23 को उस पार्थिव स्वरूप का विसर्जन किया जाना ज्योतिष के आधार पर सुयोग है। किसी कार्य करने के पश्चात उसके परिणाम शुभ , सुखद , हर्षद एवं सफलता प्रदायक हो यह एक सामान्य उद्देश्य होता है।किसी भी प्रकार की बाधा व्यवधान या अनिश्ट ना हो। ज्योतिष के आधार पर लग्न को श्रेष्ठता प्रदान की गई है | होरा मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है।     गणेश जी का संबंध बुधवार दिन अथवा बुद्धि से ज्ञान से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों प्रतियोगियों एवं बुद्धि एवं ज्ञान में रूचि है , ऐसे लोगों के लिए बुध की होरा श्रेष्ठ होगी तथा उच्च पद , गरिमा , गुरुता , बड़प्पन , ज्ञान , निर्णय दक्षता में वृद्धि के लिए गुरु की हो रहा श्रेष्ठ होगी | इसके साथ ही जल में विसर्जन कार्य होता है अतः चंद्र की होरा सामा...

श्राद्ध रहस्य - श्राद्ध क्यों करे ? कब श्राद्ध नहीं करे ? पिंड रहित श्राद्ध ?

श्राद्ध रहस्य - क्यों करे , न करे ? पिंड रहित , महालय ? किसी भी कर्म का पूर्ण फल विधि सहित करने पर ही मिलता है | * श्राद्ध में गाय का ही दूध प्रयोग करे |( विष्णु पुराण ) | श्राद्ध भोजन में तिल अवश्य प्रयोग करे | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि - श्राद्ध अपरिहार्य - अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष तक पितर अत्यंत अपेक्षा से कष्ट की   स्थिति में जल , तिल की अपनी संतान से , प्रतिदिन आशा रखते है | अन्यथा दुखी होकर श्राप देकर चले जाते हैं | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि इसको नहीं करने से पीढ़ी दर पीढ़ी संतान मंद बुद्धि , दिव्यांगता .मानसिक रोग होते है | हेमाद्रि ग्रन्थ - आषाढ़ माह पूर्णिमा से /कन्या के सूर्य के समय एक दिन भी श्राद्ध कोई करता है तो , पितर एक वर्ष तक संतुष्ट/तृप्त रहते हैं | ( भद्र कृष्ण दूज को भरणी नक्षत्र , तृतीया को कृत्तिका नक्षत्र   या षष्ठी को रोहणी नक्षत्र या व्यतिपात मंगलवार को हो ये पिता को प्रिय योग है इस दिन व्रत , सूर्य पूजा , गौ दान गौ -दान श्रेष्ठ | - श्राद्ध का गया तुल्य फल- पितृपक्ष में मघा सूर्य की अष्टमी य त्रयोदशी को मघा नक्षत्र पर चंद्र ...

गणेश भगवान - पूजा मंत्र, आरती एवं विधि

सिद्धिविनायक विघ्नेश्वर गणेश भगवान की आरती। आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।  माता जा की पार्वती ,पिता महादेवा । एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।   मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी | जय गणेश जय गणेश देवा।  अंधन को आँख  देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया । जय गणेश जय गणेश देवा।   हार चढ़े फूल चढ़े ओर चढ़े मेवा । लड्डूअन का  भोग लगे संत करें सेवा।   जय गणेश जय गणेश देवा।   दीनन की लाज रखो ,शम्भू पत्र वारो।   मनोरथ को पूरा करो।  जाए बलिहारी।   जय गणेश जय गणेश देवा। आहुति मंत्र -  ॐ अंगारकाय नमः श्री 108 आहूतियां देना विशेष शुभ होता है इसमें शुद्ध घी ही दुर्वा एवं काले तिल का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण के अनुसार गायत्री-      मंत्र ओम महोत काय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। गणेश पूजन की सामग्री एक चौकिया पाटे  का प्रयोग करें । लाल वस्त्र या नारंगी वस्त्र उसपर बिछाएं। चावलों से 8पत्ती वाला कमल पुष्प स्वरूप बनाएं। गणेश पूजा में नार...

विवाह बाधा और परीक्षा में सफलता के लिए दुर्गा पूजा

विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन कर...

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश ...