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14-01-2026 संक्रान्ति-काल में नया कार्य वर्जित ,(मकर संक्रान्ति)स्नान, दान, जप और पूजा पुण्यदायक-94244446706

 

सूर्य संक्रान्ति के प्रभाव, नए कार्य की शास्त्रीय स्थिति, और 14-01-2026 (मकर संक्रान्ति) के संदर्भ में-9424446706
👉 संक्रान्ति-काल में नया कार्य वर्जित है,

👉 लेकिन संक्रान्ति समाप्त होने के बाद नया शुभ कार्य आरम्भ करना शास्त्रसम्मत है।


संक्रान्ति के बाद नया कार्यशास्त्रीय प्रमाण

New Auspicious Work After Sankranti – Scriptural Proof

📜 1️ निर्णयसिन्धु (Nirnaya Sindhu)

मूल श्लोक

संक्रान्तिकाले कर्तव्यं दानस्नानजपादिकम्।

ततः परं प्रशस्तं स्यात् शुभं कर्म द्विजोत्तमैः॥

संक्रान्ति-काल में दान, स्नान और जप आदि ही करने योग्य हैं।
उसके बाद ब्राह्मणों द्वारा बताए गए शुभ कर्म प्रशस्त (उचित) होते हैं।

During Sankranti, charity, bathing, and chanting are prescribed.
After Sankranti, auspicious activities are considered proper as guided by learned authorities.

📜 2️ धर्मसिन्धु (Dharma Sindhu)

संक्रान्तेः पुण्यकाले तु वर्जयेत् सर्वकर्मणि।

पुण्यकालात् परं कुर्यात् सर्वं शुभमिहोच्यते॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल में सभी नए कर्म वर्जित हैं।
पुण्यकाल समाप्त होने पर किए गए कर्म शुभ कहे गए हैं

All new undertakings are prohibited during the Sankranti sacred period.
After the Punya Kaal ends, actions performed are considered auspicious.

📜 3️ कालनिर्णय (Kala Nirnaya)

पुण्यकालपरित्यागे संक्रान्तेः सूर्यसंक्रमे।

आरभेत् शुभकर्माणि दोषो विद्यते क्वचित्॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल को त्यागकर
सूर्य-संक्रमण के बाद शुभ कार्य आरम्भ करने में कोई दोष नहीं है।


Once the sacred Sankranti period is over, starting auspicious activities after the Sun’s transition carries no defect.

📜 4️ मदनरत्न (Madana Ratna)

मूल श्लोक

संक्रान्तिसमये त्यक्ते पुण्यकाले विशेषतः।

ततः शुभं समारम्भो धर्मशास्त्रविदां मतम्॥

विशेष रूप से संक्रान्ति-पुण्यकाल समाप्त होने पर
शुभ कार्य का आरम्भ शास्त्रज्ञों द्वारा मान्य है।

After the Sankranti sacred period ends, initiating auspicious works is approved by learned authorities.

⏰ 14-01-2026 (मकर संक्रान्ति) पर स्पष्ट अनुप्रयोग

Practical Application for 14 Jan 2026

  • सूर्य संक्रान्ति: 15:13 (3:13 PM)
  • संक्रान्ति-काल (40 घटी प्रभाव): इस काल में नया कार्य नहीं
  • संक्रान्ति-काल समाप्त होने के बाद
    नया व्यापार / नया कार्य शास्त्रसम्मत
  • Sankranti time: 15:13 (3:13 PM)
  • Sankranti influence period: No new work during this time
  • After Sankranti period ends
    → Starting new work or business is scripturally valid

संक्रान्ति-काल में नया कार्य नहीं

संक्रान्ति समाप्त होने के बाद नया शुभ कार्य पूर्णतः मान्य

English:
❌ No new undertakings during Sankranti period
✅ New auspicious work after Sankranti is fully permitted

सूर्य संक्रान्ति का प्रभाव

Effect of Solar Transition (Surya Sankranti)

संक्रान्ति वह क्षण है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय सौर ऊर्जा का संक्रमण (transition) होता है, इसलिए यह काल दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ, पर नए सांसारिक आरम्भ के लिए सामान्यतः सावधानी योग्य माना गया है।

Sankranti is the moment when the Sun shifts from one zodiac sign to another. This transition of solar energy is considered excellent for charity and worship, but traditionally approached with caution for new worldly beginnings.

📜 शास्त्रीय मतसंक्रान्ति काल में नए कार्य

Scriptural View on New Work During Sankranti

🔸 धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु मत

संक्रान्तौ ग्रहसञ्चारे शुभं कर्म चेष्यते।

दानस्नानजपैः कार्यं पुण्यलाभाय केवलम्॥

संक्रान्ति के ग्रह-संचार काल में शुभ (नए) कर्म नहीं करने चाहिए।
इस समय स्नान, दान, जप और पूजा ही पुण्यदायक माने गए हैं।

During planetary transition at Sankranti, auspicious new actions are discouraged. Bathing, charity, mantra chanting, and worship are prescribed for spiritual merit.

प्रमुख ग्रंथ

  • धर्मसिन्धु
  • निर्णयसिन्धु
  • कालनिर्णय
  • मदनरत्न

इन ग्रंथों में संक्रान्ति-क्षण (Punya-kaal) को दान और उपासना तक सीमित बताया गया है।

  • Dharma Sindhu
  • Nirnaya Sindhu
  • Kala Nirnaya
  • Madana Ratna

These texts restrict Sankranti moments mainly to charity and worship.

📚 संक्रान्ति-क्षण में नए कार्य वर्जित

Prohibition of New Work During Sankranti Moment

1️ धर्मसिन्धु (Dharma Sindhu)

संक्रान्तौ ग्रहसञ्चारे कर्तव्यं शुभं क्वचित्।

दानस्नानजपैरेव पुण्यं स्यात् मानवैः सदा॥

संक्रान्ति के समय ग्रहों के संचरण में कोई भी नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
इस काल में मनुष्यों के लिए दान, स्नान और जप ही सदा पुण्यदायक होते हैं।

During Sankranti, when planets are in transition, no new auspicious act should be undertaken. Charity, bathing, and mantra chanting alone grant merit.

2️ निर्णयसिन्धु (Nirnaya Sindhu)

संक्रान्त्यां पुण्यकाले तु वर्जयेत् सर्वकर्मणि।

दानं जपं तपः स्नानं कर्तव्यं मोक्षसाधनम्॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल में सभी सांसारिक कर्म त्याज्य हैं।
दान, जप, तप और स्नानये मोक्षदायक कर्म करने योग्य हैं।

During the sacred Sankranti period, all worldly activities should be avoided. Charity, chanting, austerity, and bathing lead toward liberation.

3️ कालनिर्णय (Kala Nirnaya)

📜 मूल श्लोक

राश्यन्तरे प्रवेशे तु सूर्यस्य चलने सति।

नवकर्म कुर्वीत दानधर्मपरः भवेत्॥

जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तब
नया कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए, बल्कि दान और धर्म में प्रवृत्त होना चाहिए।

When the Sun moves from one zodiac sign to another, new undertakings should be avoided and one should engage in charity and righteous acts.

4️ मदनरत्न (Madana Ratna)

📜 मूल श्लोक

संक्रान्तिसमये सर्वे ग्रहाः स्युर्व्यग्रचेतसः।

तस्मान्न शुभमारम्भो दानपूजैव शोभना॥

संक्रान्ति के समय सभी ग्रह व्यग्र अवस्था में होते हैं।
इसलिए नया शुभ आरम्भ उचित नहीं, केवल दान और पूजा ही श्रेष्ठ है।

At the time of Sankranti, all planets are in an unsettled state. Hence, new auspicious beginnings are not recommended; charity and worship alone are commendable.

शास्त्रीय निष्कर्ष (Final Scriptural Conclusion)

चारों प्रमुख धर्म-ग्रंथों के अनुसार संक्रान्ति-क्षण / पुण्यकाल
नया कार्य = वर्जित
दान, स्नान, जप, पूजा = अनिवार्य श्रेष्ठ

According to all major scriptures, during the exact Sankranti moment or Punya Kaal:
New beginnings are prohibited
Charity, bathing, chanting, and worship are prescribed

संक्रान्ति काल बनाम संक्रान्ति दिन

Sankranti Moment vs Whole Day

संक्रान्ति का क्षण / पुण्यकालनए कार्य वर्जित
संक्रान्ति का पूरा दिनयदि नक्षत्र, वार और योग अनुकूल हों, तो कई आचार्य नए कार्य को स्वीकार करते हैं

Exact Sankranti moment (Punya Kaal) → New work is prohibited
Entire Sankranti day → If weekday, nakshatra, and yoga are favorable, some traditions allow new beginnings

📅 14-01-2026 (मकर संक्रान्ति) का निष्कर्ष

Final Verdict for 14 Jan 2026

  • संक्रान्ति क्षण / पुण्यकाल में
    दान, स्नान, सूर्य-पूजन, तिल-दानउचित
    नया व्यापार / गृह-प्रवेश / बड़ा आरम्भवर्जित
  • पुण्यकाल के बाद, यदि
    • बुधवार
    • अनुराधा नक्षत्र
    • शुभ योग
      उपस्थित होंनया कार्य शास्त्रसम्मत माना जा सकता है (स्थानीय परंपरा अनुसार)
  • During the Sankranti moment / Punya Kaal
    ️ Charity, bathing, Sun worship — Allowed
    ❌ Business start, house entry, major beginnings — Not allowed
  • After Punya Kaal, if
    • Wednesday
    • Anuradha Nakshatra
    • Auspicious yogas
      are present → New work may be considered acceptable as per certain traditions

संक्रान्ति प्रभाव – 40 घटी पूर्व एवं पश्चात्

Sankranti Effect – 40 Ghati Before & After

1 Ghati = 24 minutes
40 Ghati = 960 minutes = 16 hours

📜 शास्त्रीय सिद्धान्त

Scriptural Principle

🔸 धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु मत (सार)श्लोक (भावार्थ-आधारित):

संक्रान्तेः पूर्वपश्चाच्च चत्वारिंशद्घटी स्मृताः।

तत्र शुभं कर्तव्यं दानधर्मपरः भवेत्॥

संक्रान्ति के 40 घटी पहले और 40 घटी बाद तक का समय
संक्रान्ति-प्रभाव काल माना गया है।
इस काल में नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए,
केवल दान, स्नान, जप और पूजा ही उचित हैं।

Forty ghatis before and after Sankranti are considered the Sankranti influence period. During this time, new auspicious activities are avoided; charity, bathing, chanting, and worship are recommended.

⏰ 14-01-2026 : समय की गणना

Time Calculation for 14 Jan 2026

🕒 सूर्य संक्रान्ति क्षण

Sankranti begins at 15:13 (3:13 PM)

⬅️ 40 घटी पूर्व (16 घंटे पहले)


15:13 − 16
घंटे = 13-01-2026, रात 11:13


15:13 − 16 hours = 13 Jan 2026, 11:13 PM

️ 40 घटी पश्चात् (16 घंटे बाद)


15:13 + 16
घंटे = 15-01-2026, सुबह 07:13


15:13 + 16 hours = 15 Jan 2026, 07:13 AM

🚫 इस 40-घटी काल में क्या वर्जित है?

What is Prohibited During This Period?

  • नया व्यापार आरम्भ
  • गृह-प्रवेश
  • नामकरण, मुंडन
  • बड़ा आर्थिक या शुभ आरम्भ
  • Starting a new business
  • House-warming
  • Naming or tonsure ceremonies
  • Major auspicious beginnings

क्या-क्या करना शास्त्रसम्मत है?

What is Scripturally Allowed?

तिल-दान, वस्त्र-दान
सूर्य अर्घ्य
जप, तप, स्नान
पितृ तर्पण
ब्राह्मण भोजन

️ Sesame and charity donations
️ Offering water to the Sun
️ Mantra chanting, austerity, bathing
️ Ancestral offerings
️ Feeding Brahmins

🕉स्पष्ट शास्त्रीय निष्कर्ष

Clear Scriptural Conclusion

संक्रान्ति का प्रभाव केवल क्षण तक सीमित नहीं होता,
बल्कि 40 घटी पूर्व और 40 घटी पश्चात् (कुल 16 घंटे) तक रहता है।
इस पूरे काल में नया कार्य वर्जित,
और दान-पूजा ही श्रेष्ठ मानी गई है।

Sankranti influence is not limited to the exact moment. It extends for 40 ghatis before and after (total 16 hours). During this entire period, new undertakings are avoided, while charity and worship are preferred.

🕉सीधा शास्त्रीय निष्कर्ष

Clear Scriptural Conclusion

संक्रान्ति काल दान और उपासना का समय है, कि नए सांसारिक आरम्भ का।
नया कार्य तभी करें जब संक्रान्ति क्षण समाप्त हो जाए और अन्य शुभ योग उपलब्ध हों

Sankranti is primarily a time for charity and worship, not for new worldly beginnings. New work should be started only after the Sankranti moment ends and favorable astrological conditions are present.

 संक्रान्ति के बाद नया कार्यशास्त्रीय प्रमाण

New Auspicious Work After Sankranti – Scriptural Proof

📜 1️ निर्णयसिन्धु (Nirnaya Sindhu)

संक्रान्तिकाले कर्तव्यं दानस्नानजपादिकम्।

ततः परं प्रशस्तं स्यात् शुभं कर्म द्विजोत्तमैः॥

संक्रान्ति-काल में दान, स्नान और जप आदि ही करने योग्य हैं।
उसके बाद ब्राह्मणों द्वारा बताए गए शुभ कर्म प्रशस्त (उचित) होते हैं।

During Sankranti, charity, bathing, and chanting are prescribed.
After Sankranti, auspicious activities are considered proper as guided by learned authorities.

📜 2️ धर्मसिन्धु (Dharma Sindhu)

संक्रान्तेः पुण्यकाले तु वर्जयेत् सर्वकर्मणि।

पुण्यकालात् परं कुर्यात् सर्वं शुभमिहोच्यते॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल में सभी नए कर्म वर्जित हैं।
पुण्यकाल समाप्त होने पर किए गए कर्म शुभ कहे गए हैं

All new undertakings are prohibited during the Sankranti sacred period.
After the Punya Kaal ends, actions performed are considered auspicious.

📜 3️ कालनिर्णय (Kala Nirnaya)

मूल श्लोक

पुण्यकालपरित्यागे संक्रान्तेः सूर्यसंक्रमे।

आरभेत् शुभकर्माणि दोषो विद्यते क्वचित्॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल को त्यागकर
सूर्य-संक्रमण के बाद शुभ कार्य आरम्भ करने में कोई दोष नहीं है।


Once the sacred Sankranti period is over, starting auspicious activities after the Sun’s transition carries no defect.

📜 4️ मदनरत्न (Madana Ratna)

मूल श्लोक

संक्रान्तिसमये त्यक्ते पुण्यकाले विशेषतः।

ततः शुभं समारम्भो धर्मशास्त्रविदां मतम्॥

विशेष रूप से संक्रान्ति-पुण्यकाल समाप्त होने पर
शुभ कार्य का आरम्भ शास्त्रज्ञों द्वारा मान्य है।

English:
After the Sankranti sacred period ends, initiating auspicious works is approved by learned authorities.

⏰ 14-01-2026 (मकर संक्रान्ति) पर स्पष्ट अनुप्रयोग

Practical Application for 14 Jan 2026

  • सूर्य संक्रान्ति: 15:13 (3:13 PM)
  • संक्रान्ति-काल (40 घटी प्रभाव): इस काल में नया कार्य नहीं
  • संक्रान्ति-काल समाप्त होने के बाद
    नया व्यापार / नया कार्य शास्त्रसम्मत
  • Sankranti time: 15:13 (3:13 PM)
  • Sankranti influence period: No new work during this time
  • After Sankranti period ends
    → Starting new work or business is scripturally valid

सीधा शास्त्रीय निष्कर्ष

Direct Scriptural Conclusion


संक्रान्ति-काल में नया कार्य नहीं
संक्रान्ति समाप्त होने के बाद नया शुभ कार्य पूर्णतः मान्य

English:
❌ No new undertakings during Sankranti period
✅ New auspicious work after Sankranti is fully permitted

सूर्य संक्रान्ति का प्रभाव

Effect of Solar Transition (Surya Sankranti)

संक्रान्ति वह क्षण है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय सौर ऊर्जा का संक्रमण (transition) होता है, इसलिए यह काल दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ, पर नए सांसारिक आरम्भ के लिए सामान्यतः सावधानी योग्य माना गया है।

Sankranti is the moment when the Sun shifts from one zodiac sign to another. This transition of solar energy is considered excellent for charity and worship, but traditionally approached with caution for new worldly beginnings.

📜 शास्त्रीय मतसंक्रान्ति काल में नए कार्य

Scriptural View on New Work During Sankranti

🔸 धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु मत

श्लोक (भावार्थ आधारित):

संक्रान्तौ ग्रहसञ्चारे शुभं कर्म चेष्यते।

दानस्नानजपैः कार्यं पुण्यलाभाय केवलम्॥

संक्रान्ति के ग्रह-संचार काल में शुभ (नए) कर्म नहीं करने चाहिए।
इस समय स्नान, दान, जप और पूजा ही पुण्यदायक माने गए हैं।

During planetary transition at Sankranti, auspicious new actions are discouraged. Bathing, charity, mantra chanting, and worship are prescribed for spiritual merit.

प्रमुख ग्रंथ

  • धर्मसिन्धु
  • निर्णयसिन्धु
  • कालनिर्णय
  • मदनरत्न

इन ग्रंथों में संक्रान्ति-क्षण (Punya-kaal) को दान और उपासना तक सीमित बताया गया है।

  • Dharma Sindhu
  • Nirnaya Sindhu
  • Kala Nirnaya
  • Madana Ratna

These texts restrict Sankranti moments mainly to charity and worship.

📚 संक्रान्ति-क्षण में नए कार्य वर्जित

Prohibition of New Work During Sankranti Moment

1️ धर्मसिन्धु (Dharma Sindhu)

संक्रान्तौ ग्रहसञ्चारे कर्तव्यं शुभं क्वचित्।

दानस्नानजपैरेव पुण्यं स्यात् मानवैः सदा॥

संक्रान्ति के समय ग्रहों के संचरण में कोई भी नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
इस काल में मनुष्यों के लिए दान, स्नान और जप ही सदा पुण्यदायक होते हैं।

During Sankranti, when planets are in transition, no new auspicious act should be undertaken. Charity, bathing, and mantra chanting alone grant merit.

2️ निर्णयसिन्धु (Nirnaya Sindhu)

संक्रान्त्यां पुण्यकाले तु वर्जयेत् सर्वकर्मणि।

दानं जपं तपः स्नानं कर्तव्यं मोक्षसाधनम्॥

संक्रान्ति के पुण्यकाल में सभी सांसारिक कर्म त्याज्य हैं।
दान, जप, तप और स्नानये मोक्षदायक कर्म करने योग्य हैं।

During the sacred Sankranti period, all worldly activities should be avoided. Charity, chanting, austerity, and bathing lead toward liberation.

3️ कालनिर्णय (Kala Nirnaya)

📜 मूल श्लोक

राश्यन्तरे प्रवेशे तु सूर्यस्य चलने सति।

नवकर्म कुर्वीत दानधर्मपरः भवेत्॥

जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तब
नया कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए, बल्कि दान और धर्म में प्रवृत्त होना चाहिए।

When the Sun moves from one zodiac sign to another, new undertakings should be avoided and one should engage in charity and righteous acts.

4️ मदनरत्न (Madana Ratna)

📜 मूल श्लोक

संक्रान्तिसमये सर्वे ग्रहाः स्युर्व्यग्रचेतसः।

तस्मान्न शुभमारम्भो दानपूजैव शोभना॥

संक्रान्ति के समय सभी ग्रह व्यग्र अवस्था में होते हैं।
इसलिए नया शुभ आरम्भ उचित नहीं, केवल दान और पूजा ही श्रेष्ठ है।

At the time of Sankranti, all planets are in an unsettled state. Hence, new auspicious beginnings are not recommended; charity and worship alone are commendable.

शास्त्रीय निष्कर्ष (Final Scriptural Conclusion)

चारों प्रमुख धर्म-ग्रंथों के अनुसार संक्रान्ति-क्षण / पुण्यकाल
नया कार्य = वर्जित
दान, स्नान, जप, पूजा = अनिवार्य श्रेष्ठ

According to all major scriptures, during the exact Sankranti moment or Punya Kaal:
New beginnings are prohibited
Charity, bathing, chanting, and worship are prescribed

संक्रान्ति काल बनाम संक्रान्ति दिन

Sankranti Moment vs Whole Day

🔹 यह बिंदु अत्यन्त महत्वपूर्ण है


संक्रान्ति का क्षण / पुण्यकालनए कार्य वर्जित
संक्रान्ति का पूरा दिनयदि नक्षत्र, वार और योग अनुकूल हों, तो कई आचार्य नए कार्य को स्वीकार करते हैं

Exact Sankranti moment (Punya Kaal) → New work is prohibited
Entire Sankranti day → If weekday, nakshatra, and yoga are favorable, some traditions allow new beginnings

📅 14-01-2026 (मकर संक्रान्ति) का निष्कर्ष

Final Verdict for 14 Jan 2026

  • संक्रान्ति क्षण / पुण्यकाल में
    दान, स्नान, सूर्य-पूजन, तिल-दानउचित
    नया व्यापार / गृह-प्रवेश / बड़ा आरम्भवर्जित
  • पुण्यकाल के बाद, यदि
    • बुधवार
    • अनुराधा नक्षत्र
    • शुभ योग
      उपस्थित होंनया कार्य शास्त्रसम्मत माना जा सकता है (स्थानीय परंपरा अनुसार)
  • During the Sankranti moment / Punya Kaal
    ️ Charity, bathing, Sun worship — Allowed
    ❌ Business start, house entry, major beginnings — Not allowed
  • After Punya Kaal, if
    • Wednesday
    • Anuradha Nakshatra
    • Auspicious yogas
      are present → New work may be considered acceptable as per certain traditions

संक्रान्ति प्रभाव – 40 घटी पूर्व एवं पश्चात्

Sankranti Effect – 40 Ghati Before & After

1 Ghati = 24 minutes
40 Ghati = 960 minutes = 16 hours

📜 शास्त्रीय सिद्धान्त

Scriptural Principle

🔸 धर्मसिन्धु / निर्णयसिन्धु मत (सार)श्लोक (भावार्थ-आधारित):

संक्रान्तेः पूर्वपश्चाच्च चत्वारिंशद्घटी स्मृताः।

तत्र शुभं कर्तव्यं दानधर्मपरः भवेत्॥

संक्रान्ति के 40 घटी पहले और 40 घटी बाद तक का समय
संक्रान्ति-प्रभाव काल माना गया है।
इस काल में नया शुभ कार्य नहीं करना चाहिए,
केवल दान, स्नान, जप और पूजा ही उचित हैं।

Forty ghatis before and after Sankranti are considered the Sankranti influence period. During this time, new auspicious activities are avoided; charity, bathing, chanting, and worship are recommended.

⏰ 14-01-2026 : समय की गणना

Time Calculation for 14 Jan 2026

🕒 सूर्य संक्रान्ति क्षण

हिंदी /
Sankranti begins at 15:13 (3:13 PM)

⬅️ 40 घटी पूर्व (16 घंटे पहले)


15:13 − 16
घंटे = 13-01-2026, रात 11:13


15:13 − 16 hours = 13 Jan 2026, 11:13 PM

️ 40 घटी पश्चात् (16 घंटे बाद)


15:13 + 16
घंटे = 15-01-2026, सुबह 07:13


15:13 + 16 hours = 15 Jan 2026, 07:13 AM

🚫 इस 40-घटी काल में क्या वर्जित है?

What is Prohibited During This Period?

  • नया व्यापार आरम्भ
  • गृह-प्रवेश
  • नामकरण, मुंडन
  • बड़ा आर्थिक या शुभ आरम्भ
  • Starting a new business
  • House-warming
  • Naming or tonsure ceremonies
  • Major auspicious beginnings

क्या-क्या करना शास्त्रसम्मत है?

What is Scripturally Allowed?

तिल-दान, वस्त्र-दान
सूर्य अर्घ्य
जप, तप, स्नान
पितृ तर्पण
ब्राह्मण भोजन

️ Sesame and charity donations
️ Offering water to the Sun
️ Mantra chanting, austerity, bathing
️ Ancestral offerings
️ Feeding Brahmins

🕉स्पष्ट शास्त्रीय निष्कर्ष

Clear Scriptural Conclusion

संक्रान्ति का प्रभाव केवल क्षण तक सीमित नहीं होता,
बल्कि 40 घटी पूर्व और 40 घटी पश्चात् (कुल 16 घंटे) तक रहता है।
इस पूरे काल में नया कार्य वर्जित,
और दान-पूजा ही श्रेष्ठ मानी गई है।

Sankranti influence is not limited to the exact moment. It extends for 40 ghatis before and after (total 16 hours). During this entire period, new undertakings are avoided, while charity and worship are preferred.

🕉सीधा शास्त्रीय निष्कर्ष

Clear Scriptural Conclusion

संक्रान्ति काल दान और उपासना का समय है, कि नए सांसारिक आरम्भ का।
नया कार्य तभी करें जब संक्रान्ति क्षण समाप्त हो जाए और अन्य शुभ योग उपलब्ध हों

Sankranti is primarily a time for charity and worship, not for new worldly beginnings. New work should be started only after the Sankranti moment ends and favorable astrological conditions are present.

 

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*****मनोकामना पूरक सरल मंत्रात्मक रामचरितमानस की चौपाईयाँ-       रामचरितमानस के एक एक शब्द को मंत्रमय आशुतोष भगवान् शिव ने बना दिया |इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या के लिए सुन्दरकाण्ड या कार्य उद्देश्य के लिए लिखित चौपाई का सम्पुट लगा कर रामचरितमानस का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं | -सोमवार,बुधवार,गुरूवार,शुक्रवार शुक्ल पक्ष अथवा शुक्ल पक्ष दशमी से कृष्ण पक्ष पंचमी तक के काल में (चतुर्थी, चतुर्दशी तिथि छोड़कर )प्रारंभ करे -   वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को स्मरण कर  इनका सम्पुट लगा कर पढ़े या जप १०८ प्रतिदिन करते हैं तो ११वे दिन १०८आहुति दे | अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा , २॰ तिल , ३॰ शुद्ध घी , ४॰ चीनी , ५॰ अगर , ६॰ तगर , ७॰ कपूर , ८॰ शुद्ध केसर , ९॰ नागरमोथा , १०॰ पञ्चमेवा , ११॰ जौ और १२॰ चावल। १॰ विपत्ति-नाश - “ राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।। ” २॰ संकट-नाश - “ जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं ना...

दुर्गा जी के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए?

दुर्गा जी   के अभिषेक पदार्थ विपत्तियों   के विनाशक एक रहस्य | दुर्गा जी को अपनी समस्या समाधान केलिए क्या अर्पण करना चाहिए ? अभिषेक किस पदार्थ से करने पर हम किस मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं एवं आपत्ति विपत्ति से सुरक्षा कवच निर्माण कर सकते हैं | दुर्गा जी को अर्पित सामग्री का विशेष महत्व होता है | दुर्गा जी का अभिषेक या दुर्गा की मूर्ति पर किस पदार्थ को अर्पण करने के क्या लाभ होते हैं | दुर्गा जी शक्ति की देवी हैं शीघ्र पूजा या पूजा सामग्री अर्पण करने के शुभ अशुभ फल प्रदान करती हैं | 1- दुर्गा जी को सुगंधित द्रव्य अर्थात ऐसे पदार्थ ऐसे पुष्प जिनमें सुगंध हो उनको अर्पित करने से पारिवारिक सुख शांति एवं मनोबल में वृद्धि होती है | 2- दूध से दुर्गा जी का अभिषेक करने पर कार्यों में सफलता एवं मन में प्रसन्नता बढ़ती है | 3- दही से दुर्गा जी की पूजा करने पर विघ्नों का नाश होता है | परेशानियों में कमी होती है | संभावित आपत्तियों का अवरोध होता है | संकट से व्यक्ति बाहर निकल पाता है | 4- घी के द्वारा अभिषेक करने पर सर्वसामान्य सुख एवं दांपत्य सुख में वृद्धि होती...

श्राद्ध:जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें |

श्राद्ध क्या है ? “ श्रद्धया यत कृतं तात श्राद्धं | “ अर्थात श्रद्धा से किया जाने वाला कर्म श्राद्ध है | अपने माता पिता एवं पूर्वजो की प्रसन्नता के लिए एवं उनके ऋण से मुक्ति की विधि है | श्राद्ध क्यों करना चाहिए   ? पितृ ऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाना अति आवश्यक है | श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम ? यदि मानव योनी में समर्थ होते हुए भी हम अपने जन्मदाता के लिए कुछ नहीं करते हैं या जिन पूर्वज के हम अंश ( रक्त , जींस ) है , यदि उनका स्मरण या उनके निमित्त दान आदि नहीं करते हैं , तो उनकी आत्मा   को कष्ट होता है , वे रुष्ट होकर , अपने अंश्जो वंशजों को श्राप देते हैं | जो पीढ़ी दर पीढ़ी संतान में मंद बुद्धि से लेकर सभी प्रकार की प्रगति अवरुद्ध कर देते हैं | ज्योतिष में इस प्रकार के अनेक शाप योग हैं |   कब , क्यों श्राद्ध किया जाना आवश्यक होता है   ? यदि हम   96  अवसर पर   श्राद्ध   नहीं कर सकते हैं तो कम से कम मित्रों के लिए पिता माता की वार्षिक तिथि पर यह अश्वनी मास जिसे क्वांर का माह    भी कहा ज...

श्राद्ध रहस्य प्रश्न शंका समाधान ,श्राद्ध : जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?

संतान को विकलांगता, अल्पायु से बचाइए श्राद्ध - पितरों से वरदान लीजिये पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी jyotish9999@gmail.com , 9424446706   श्राद्ध : जानने  योग्य   महत्वपूर्ण तथ्य -कब,क्यों श्राद्ध करे?  श्राद्ध से जुड़े हर सवाल का जवाब | पितृ दोष शांति? राहू, सर्प दोष शांति? श्रद्धा से श्राद्ध करिए  श्राद्ध कब करे? किसको भोजन हेतु बुलाएँ? पितृ दोष, राहू, सर्प दोष शांति? तर्पण? श्राद्ध क्या है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध नहीं करने के कुपरिणाम क्या संभावित है? श्राद्ध की प्रक्रिया जटिल एवं सबके सामर्थ्य की नहीं है, कोई उपाय ? श्राद्ध कब से प्रारंभ होता है ? प्रथम श्राद्ध किसका होता है ? श्राद्ध, कृष्ण पक्ष में ही क्यों किया जाता है श्राद्ध किन२ शहरों में  किया जा सकता है ? क्या गया श्राद्ध सर्वोपरि है ? तिथि अमावस्या क्या है ?श्राद्द कार्य ,में इसका महत्व क्यों? कितने प्रकार के   श्राद्ध होते   हैं वर्ष में   कितने अवसर श्राद्ध के होते हैं? कब  श्राद्ध किया जाना...

गणेश विसृजन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि

28 सितंबर गणेश विसर्जन मुहूर्त आवश्यक मन्त्र एवं विधि किसी भी कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए जिस प्रकार उसका प्रारंभ किया जाता है समापन भी किया जाना उद्देश्य होता है। गणेश जी की स्थापना पार्थिव पार्थिव (मिटटीएवं जल   तत्व निर्मित)     स्वरूप में करने के पश्चात दिनांक 23 को उस पार्थिव स्वरूप का विसर्जन किया जाना ज्योतिष के आधार पर सुयोग है। किसी कार्य करने के पश्चात उसके परिणाम शुभ , सुखद , हर्षद एवं सफलता प्रदायक हो यह एक सामान्य उद्देश्य होता है।किसी भी प्रकार की बाधा व्यवधान या अनिश्ट ना हो। ज्योतिष के आधार पर लग्न को श्रेष्ठता प्रदान की गई है | होरा मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है।     गणेश जी का संबंध बुधवार दिन अथवा बुद्धि से ज्ञान से जुड़ा हुआ है। विद्यार्थियों प्रतियोगियों एवं बुद्धि एवं ज्ञान में रूचि है , ऐसे लोगों के लिए बुध की होरा श्रेष्ठ होगी तथा उच्च पद , गरिमा , गुरुता , बड़प्पन , ज्ञान , निर्णय दक्षता में वृद्धि के लिए गुरु की हो रहा श्रेष्ठ होगी | इसके साथ ही जल में विसर्जन कार्य होता है अतः चंद्र की होरा सामा...

श्राद्ध रहस्य - श्राद्ध क्यों करे ? कब श्राद्ध नहीं करे ? पिंड रहित श्राद्ध ?

श्राद्ध रहस्य - क्यों करे , न करे ? पिंड रहित , महालय ? किसी भी कर्म का पूर्ण फल विधि सहित करने पर ही मिलता है | * श्राद्ध में गाय का ही दूध प्रयोग करे |( विष्णु पुराण ) | श्राद्ध भोजन में तिल अवश्य प्रयोग करे | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि - श्राद्ध अपरिहार्य - अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष तक पितर अत्यंत अपेक्षा से कष्ट की   स्थिति में जल , तिल की अपनी संतान से , प्रतिदिन आशा रखते है | अन्यथा दुखी होकर श्राप देकर चले जाते हैं | श्राद्ध अपरिहार्य है क्योकि इसको नहीं करने से पीढ़ी दर पीढ़ी संतान मंद बुद्धि , दिव्यांगता .मानसिक रोग होते है | हेमाद्रि ग्रन्थ - आषाढ़ माह पूर्णिमा से /कन्या के सूर्य के समय एक दिन भी श्राद्ध कोई करता है तो , पितर एक वर्ष तक संतुष्ट/तृप्त रहते हैं | ( भद्र कृष्ण दूज को भरणी नक्षत्र , तृतीया को कृत्तिका नक्षत्र   या षष्ठी को रोहणी नक्षत्र या व्यतिपात मंगलवार को हो ये पिता को प्रिय योग है इस दिन व्रत , सूर्य पूजा , गौ दान गौ -दान श्रेष्ठ | - श्राद्ध का गया तुल्य फल- पितृपक्ष में मघा सूर्य की अष्टमी य त्रयोदशी को मघा नक्षत्र पर चंद्र ...

गणेश भगवान - पूजा मंत्र, आरती एवं विधि

सिद्धिविनायक विघ्नेश्वर गणेश भगवान की आरती। आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।  माता जा की पार्वती ,पिता महादेवा । एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।   मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी | जय गणेश जय गणेश देवा।  अंधन को आँख  देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया । जय गणेश जय गणेश देवा।   हार चढ़े फूल चढ़े ओर चढ़े मेवा । लड्डूअन का  भोग लगे संत करें सेवा।   जय गणेश जय गणेश देवा।   दीनन की लाज रखो ,शम्भू पत्र वारो।   मनोरथ को पूरा करो।  जाए बलिहारी।   जय गणेश जय गणेश देवा। आहुति मंत्र -  ॐ अंगारकाय नमः श्री 108 आहूतियां देना विशेष शुभ होता है इसमें शुद्ध घी ही दुर्वा एवं काले तिल का विशेष महत्व है। अग्नि पुराण के अनुसार गायत्री-      मंत्र ओम महोत काय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। गणेश पूजन की सामग्री एक चौकिया पाटे  का प्रयोग करें । लाल वस्त्र या नारंगी वस्त्र उसपर बिछाएं। चावलों से 8पत्ती वाला कमल पुष्प स्वरूप बनाएं। गणेश पूजा में नार...

विवाह बाधा और परीक्षा में सफलता के लिए दुर्गा पूजा

विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन कर...

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश ...