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गुरु ग्रह मीन राशी- जन्म वर्ष से भविष्य जानिए ?

 


 




 गुरु ग्रह मीन राशी- जन्म वर्ष से भविष्य जानिए ?

                --पंडित वि.के.तिवारी”ज्योतिष-शिरोमणि”

   विशेषज्ञ-  वास्तु,जन्मकुंडली ,मुहूर्त,विवाह- मिलान,रत्न परामर्श ,कर्मकांड -1972 से

-प्रचलित नाम,जन्म राशी एवं आपकी कुंडली बिना बताये ,

कुंडली से भविष्य का विवरण प्रस्तुत -

 13 अप्रेल से वर्ष अंत तक -गुरु के मीन राशि पर परिवर्तन या प्रवेश से गोचर फल-

           चंद्रमा के आधार पर गुरु के मीन राशि पर प्रवेश करने से
       सर्वोत्तम- कर्क ,कन्या ,वृश्चिक, कुंभ राशि के लिए को प्राप्त होंगे ।
जैसे धर्म, पद ,प्रभाव ,शिक्षा ,ज्ञान, संतान, विवाह, दांपत्य सुख ,निर्णय आदि में अच्छे

फल प्राप्त होंगे।
मध्यम फल- मिथुन ,तुला ,मकर राशि को शुभ अशुभ दोनों प्रकार के फल प्राप्त होंगे।
अशुभ फल- मेष, सिंह ,धनु राशि वाली राशि के लिए संघर्ष एवं उक्त शुभ उल्लेखित

प्रभाव में या कार्यों में प्रतिकूलता या संघर्ष की स्थिति बनेगी।

           कर्क  कन्या ,वृश्चिक, मीन राशि का शनि गुरु, सूर्य हो तो गुरु के राशि

 परिवर्तन परिणामशुभ होंगे।  अशुभ प्रभाव नहीं होंगे।
            
शुभ प्रभाव या अच्छे प्रभाव में वृद्धि होगी 
       
यदि जन्म कुंडली में शनि, गुरु दोनों ही कर्क, कन्या ,वृश्चिक ,

मीन राशि  पर होंगे तो वर्ष अत्यंत सफल, सुखेश्वर, धन,संपदा ,पद प्रभाव ,रोजगार ,

व्यापार के लिए अति उत्तम सिद्ध होगा।
        
प्रचलित नाम से भविष्य -13अप्रेल से
(
देश, स्थान, वस्तु, कंपनी, व्यक्ति, संस्थान, दुकान)
               
जिन  के नाम प्रचलित( नाम जन्म राशि से संबंध नहीं है) -
1-
, ,, ,,, , , ड अक्षर से प्रारंभ होंगे उनके लिए भी सफलता के

अच्छे  योग बनेंगे ।
2-
प्रचलित नाम  ,, ,, ,, अ अक्षर से प्रारंभ नाम  के लिए गुरु

अनुकूल फल प्रदान नहीं करेगा।
3-
, ट नाम से यात्रा अधिक, कार्य अधिक, नये दायित्व, अधिकार वृद्धि, सुख मे कमी।

         
जन्म वर्ष के अनुसार:शुभ अनुकूल फल- निम्न अवधि मे हो

     1- शनी के अनुसार  के शुभ प्रभाव -
   यदि किसी का जन्म निम्न अवधि मे हुआ हो तो गुरु के मीन  राशि मे

   प्रवेश के शुभ फल ही मिलेंगे।
20.9 .50
से 25 .11.52;
25.4 .53- 21.6.53;
13  11 55
से 7.2.58;
13 . 11.55
से 8.2.58;
19.12.66
से 8.2.68;
9.4 .66- 13.11.66;
20.12 . 67
से 6.6.68;
25.9.68- 7.3.69;
2.11. 84
से 7.12  87;
23
जुलाई 75 से 7 सितंबर 77
27.7 .80
से 6.10.82;
2 .6.95- 17.4 98 ;
    2-
गुरु के अनुसार- गुरु के शुभ फल-
जन्म निम्न अवधि मे हुआ हो-
24
मार्च 51 से 31 .3.52;
10.9 54- 01.10.55 ;
15 3.56
से 21.5 .56;
29.10 .56
से17.4.57 ;
19.6.57
से 22 .11.57 ;
19 .5 .58- 20.7.58 ;
28 .12.58
से 22.6.59 ;
17.8 59- 21.1.60;
7.3.63- 15.3.64 ;
22.8  66- 14.9.67;
13.2.68
से 22.11.69;
12.12.70- 6.1.72;
19 .2.75- 18 . 7.75;
11.9 .75 - 18  . 2.76;
  27
सितंबर 80 से 27 अक्टूबर 81;
27.11 82
से 22  12.83;
3 .2.87
से 3.8.88;
30 . 7.2003- 28.8 .2003;
28.8.2004
से 28 . 9.2005;
28.10 .2006- 22 .11 .2007;
3
मार्च 2010 से 8 मार्च 2011:
    
3-सूर्य आधार पर ,गुरु मीन राशि पर फल-
सूर्य गुरु के अशुभ प्रभाव रोक देगा।यदि आपकी जन्म अवधि  निम्न  हो (वर्ष कोई भी हो) -
   16
मार्च से 15अप्रेल।
   16
जुलाई से 16अगस्त।
    17
सितम्बर से 16 अक्टुबर।
    17
नवम्बर से 16दिसंबर।
यदि लग्न मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु एवम मीन तो  उत्तम ।
6.8.12, 7
भाव मे सूर्य न हो तो अति उत्तम फल मीन राशि का गुरु देगा।
हरि ओम। शुभम अस्तु।

विशेष-      2- जन्म पत्री के ग्रह अनुसार फल-
कुंडली में प्रमुख रूप से शनि, गुरु, राहु ,मंगल आदि अधिक शुभ - अशुभ प्रभाव

उत्पन्न करते हैं।
          
इस दृष्टि से  जन्म कुंडली में -
1गुरु --शुभ फल के लिए, 3,6,812 स्थान या भाव में नहीं होना चाहिए।
2शनि 3 ,6 ,12 भाव में नहीं हो ।
3सूर्य जन्म कुंडली में 2,6,7,8 ,12 भाव में ना हो।

सरल उपाय -बृहस्पति या गुरु ग्रह गोचर या कुंडली में अशुभ

                   प्रति गुरूवार प्रयोग करे या 40 दिन दिन लगातार

-       -सभी के लिए उपयोगी उपाय परन्तु ,तुला,मकर  राशी /  नाम र,,,,से प्रारंभ नाम हो उनको निम्न उपाय विशेष उपयोगी होंगे (पूजा समय मुह की दिशा N-E होना चाहिए

ॐ गं गणपतये नमः। सर्व-विघ्न-विनाशनाय, सर्वारिष्ट निवारणाय, सर्व-सौख्य-प्रदाय, बालानां बुद्धि-प्रदाय, नाना-प्रकार-धन-वाहन-भूमि-प्रदाय, मनोवांछित-फल-प्रदाय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।।

ॐ गुरवे नमः, ॐ श्रीकृष्णाय नमः, ॐ बलभद्राय नमः, ॐ श्रीरामाय नमः, ॐ हनुमते नमः, ॐ शिवाय नमः, ॐ जगन्नाथाय नमः, ॐ बदरीनारायणाय नमः, ॐ श्री दुर्गा-देव्यै नमः।।

ॐ सूर्याय नमः, ॐ चन्द्रमसे नमः, ॐ भौमाय नमः, ॐ बुधाय नमः, ॐ गुरवे नमः, ॐ भृगवे नमः, ॐ शनिश्चराय नमः, ॐ राहवे नमः, ॐ पुच्छा नायकाय नमः, ॐ नव-ग्रह रक्षा कुरू कुरू नमः।।

1 स्नान - गुरुवार को , स्नान जल मे नदी या तीर्थ जल,-चमेली पुष्प,सफेद या पीली सरसों ,गूलर ,मुलेठी ,मिला कर स्नान करे ।

2-- दान-पीला अनाज ,चना,शकरपीले पुष्प .हल्दी,केसर।

        पीला वस्त्र पीला फल पपीता केला आदि दान करे।

3-दान किसको दे -गुरु,ज्ञानी पुरुष,ब्राह्मण,शिक्षा कर्मी याशिक्षण संस्था,उपदेशक,विष्णु,कृष्ण,राम मंदिर मे दान करना चाहिए ।

3- प्रस्थान पूर्व खाएं–––दही curd,जीरा ।

वैदिक मन्त्र 01 बार - ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।। (यजु. 26।3) ॥

या ब्रह्माण्डपुराण मन्त्र-11बार-देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:।

                        अनेक शिष्य सम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु: ।।

अर्थ-सर्वदा लोक कल्याण में निरत रहने वालेदेवताओं के मंत्रीविशाल नेत्रों वालेतथा अनेक शिष्यों से युक्त बृहस्पति मेरी पीड़ा को दूर करें ।।

या पौराणिक मंत्र -108 बार- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः ॥

किये जाने वाले कार्य - यज्ञ,धार्मिक, विद्या, गृह,औषधि, आभूषण, नए वस्त्र, वृक्षारोपण, 

जैन मंत्र-ॐ ह्रीं णमो आयरियाणं  ।ॐ ह्रीं गुरु ग्रहारिष्ट निवारक श्री महावीर जिनेन्द्राय नम: -देवमन्त्री विशालाक्ष: सदालोकहिते रत:।अनेक शिष्य सम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु: ।।सर्वशांतिं कुरु कुरु स्वाहा।मम (.अपना नाम ) दुष्ट ग्रह रोग कष्ट निवारणं सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

 

प्रश्न- एक ही राशि वालो को, किसी ग्रह के राशि parivartan के अलग अलग फल क्यो मिलते है ? 

    उत्तर- 

1-    राशि परिवर्तन करने वाले ग्रह की, 12 लग्न में ,जिन जन्म लग्नेश से मित्रता होगी,

 उन्हें अनुकूल अधिक, प्रतिकूल कम फल मिलेंगे । 

*जिन जन्म लग्न स्वामी से शत्रुता होगी ,उनको अनुकूल कम परन्तु

प्रतिकूल अधिक फल मिलते हें ।

2- जन्म कुंडली मे राशि परिवर्तन करने वाले ग्रह की शुभ अशुभ स्थिति। 

2-    प्रचलित नाम की राशि का प्रभाव दैनिक जीवन ,रोजगार स्थल,नए कार्य ,

भवन प्रवेश,Joining आदि में प्रमुख रूप से पड़ता है ।

*जन्म नक्षत्र की राशि का प्रभाव  स्थायी परिणाम एवं कार्य पर होता है

विशेष-एक ही राशी होने पर नाम अलग अलग होने पर शुभ –अशुभ

 प्रभाव में अंतर हो जायेगा ।

4- राशि एक ही हो , पर जन्म नक्षत्र अलग अलग होना। 

5- राशि एक ही हो , जन्म नक्षत्र भी एक हो परन्तु,जन्म नक्षत्र चरण पृथक पृथक हो। 

6- अष्टक वर्ग मे (राशि परिवर्तन करने वाले ग्रह) को 5 से कम रेखा मिलना। 

7- कुंडली मे, राशि परिवर्तन करने वाला ग्रहआत्म या अमात्य कारी होना। 

8- जन्म कुंडली में जिसकी दशा उत्तम ,अनुकूल चल रही हो,तो प्रतिकोल प्रभाव अति अल्प होंगे।

प्रयास करने से  कार्य हो जाएंगे । ग्रह दशा अशुभ होगी तो अशुभ फल अधिक होंगे ,

शुभ फल कम होंगे ।

किसी भी ग्रह का  का राशि परिवर्तन संभावित भविष्यफल के लिए (जो सामान्य रूप से,

 चंद्रमा की राशि से देखा जाता है) यह पूर्णरूपेण सटीक नहीं होता।
   *चंद्र राशि से , शुभ अशुभ प्रभाव    अधिक से अधिक तीस 30% ही होता है ।*
      -
सटीक फल ज्ञात करने  की विधि -
                -सूर्य ,शनि ,गुरु की स्थिति कुंडली मे शुभ हो।
  -
गोचर के फल के लिए तीनों विधियों का अवलोकन करे ।

       यदि तीनों विधियों में शुभ प्रभाव  है तो सर्वश्रेष्ठ फल प्राप्त होगा।
गुरु ग्रह के लिए -कुंडली मे गुरु या शनि शुभ हो। (3.6.8.12भाव मे न हो)। शत्रु राशि या लग्न के शत्रु गुरु न हो।
      
1-नाम से चन्द्र राशि । 2- जन्म राशी । 3- जन्म लग्न एवं  नक्षत्र ।



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पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी-ज्योतिष  शिरोमणि-  jyotish9999@gmail.com- 9424446706- Contact- Timings 09.30-12.30; 16.30-18.00; 21:00-21:45 

 

टिप्पणियाँ

  1. "कर्क कन्या ,वृश्चिक, मीन राशि का शनि गुरु, सूर्य हो तो गुरु के राशि
    परिवर्तन परिणामशुभ होंगे। अशुभ प्रभाव नहीं होंगे। शुभ प्रभाव या अच्छे प्रभाव में वृद्धि होगी ।

    यदि जन्म कुंडली में शनि, गुरु दोनों ही कर्क, कन्या ,वृश्चिक ,मीन राशि पर होंगे तो वर्ष अत्यंत सफल, सुखेश्वर, धन,संपदा ,पद प्रभाव ,रोजगार ,

    व्यापार के लिए अति उत्तम सिद्ध होगा।"



    जन्म कुंडली में गुरु के कन्या राशि में होने से यदि केंद्रधिपत्य दोष का कारक हो, तब भी यह गुरु का गोचर लाभदायक होगा ? ( यह प्रश्न मिथुन लग्न के सापेक्ष में है)

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विवाह में विलंब विवाह के लिए कात्यायनी पूजन । 10 oct - 18 oct विवाह में विलंब - षष्ठी - कात्यायनी पूजन । वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए - दुर्गतिहारणी मां कात्यायनी की शरण लीजिये | प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के समय , संकल्प में अपना नाम गोत्र स्थान बोलने के पश्चात् अपने विवाह की याचना , प्रार्थना कीजिये | वैवाहिक सुखद जीवन अथवा विवाह बिलम्ब   या बाधा को समाप्त करने के लिए प्रति दिन प्रातः सूर्योदय से प्रथम घंटे में या दोपहर ११ . ४० से १२ . ४० बजे के मध्य , कात्ययानी देवी का मन्त्र जाप करिये | १०८बार | उत्तर दिशा में मुँह हो , लाल वस्त्र हो जाप के समय | दीपक मौली या कलावे की वर्तिका हो | वर्तिका उत्तर दिशा की और हो | गाय का शुद्ध घी श्रेष्ठ अथवा तिल ( बाधा नाशक + महुआ ( सौभाग्य ) तैल मिला कर प्रयोग करे मां भागवती की कृपा से पूर्वजन्म जनितआपके दुर्योग एवं   व्यवधान समाप्त हो एवं   आपकी मनोकामना पूरी हो ऐसी शुभ कामना सहित || षष्ठी के दिन विशेष रूप से कात्यायनी के मन्त्र का २८ आहुति / १०८ आहुति हवन करिये | चंद्रहासोज्

कलश पर नारियल रखने की शास्त्रोक्त विधि क्या है जानिए

हमे श्रद्धा विश्वास समर्पित प्रयास करने के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं , क्योकि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ कोटी का विज्ञान सम्मत है ।इसकी प्रक्रिया , विधि या तकनीक का पालन अनुसरण परमावश्यक है । नारियल का अधिकाधिक प्रयोग पुजा अर्चना मे होता है।नारियल रखने की विधि सुविधा की दृष्टि से प्रचलित होगई॥ मेरे ज्ञान  मे कलश मे उल्टा सीधा नारियल फसाकर रखने की विधि का प्रमाण अब तक नहीं आया | यदि कोई सुविज्ञ जानकारी रखते हो तो स्वागत है । नारियल को मोटा भाग पूजा करने वाले की ओर होना चाहिए। कलश पर नारियल रखने की प्रमाणिक विधि क्या है ? अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए , उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै प्राची मुखं वित्त्नाश्नाय , तस्माच्छुभम सम्मुख नारिकेलम अधोमुखम शत्रु विवर्धनाए कलश पर - नारियल का बड़ा हिस्सा नीचे मुख कर रखा जाए ( पतला हिस्सा पूछ वाला कलश के उपरी भाग पर रखा जाए ) तो उसे शत्रुओं की वृद्धि होती है * ( कार्य सफलता में बाधाएं आती है संघर्ष , अपयश , चिंता , हानि , सहज हैशत्रु या विरोधी तन , मन धन सर्व दृष्टि से घातक होते है ) उर्ध्वस्य वक्त्रं बहुरोग वृद्ध्यै कलश पर -