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अस्थि-विसर्जन — वार, तिथि एवं नियम-13 दिनों

  अस्थि - विसर्जन — वार , तिथि एवं नियम ( शास्त्रीय प्रमाण सहित ) बुधवार — अस्थि - विसर्जन हेतु उचित ( प्रमाण ) धर्मसिन्धु ( पितृकर्म प्रकरण ) “ सौम्यवासरेषु पितृकर्म प्रशस्यते। ” सौम्य वार : सोमवार , बुधवार , गुरुवार , शुक्रवार ➡ बुधवार पितृकर्म हेतु शुभ एवं प्रशस्त। - अस्थि को अस्थायी रूप से रखना — शास्त्रीय विधि गरुड़ पुराण , प्रेतकल्प “ अस्थीनि शुद्धपात्रे स्थापयेत् यावत् तीर्थगमनम्। ” अर्थ : तीर्थ या विसर्जन तक अस्थियों को शुद्ध पात्र में सुरक्षित रखना चाहिए। वृक्ष पर टांगना ( पीपल आदि ) — प्रमाण गरुड़ पुराण ( प्रेतकल्प परंपरागत व्याख्या ) “ अश्वत्थमूले स्थितं तोयं पितृणां तृप्तिदायकम्। ” अश्वत्थ ( पीपल ) पितृसंबंधी वृक्ष माना गया। धर्मशास्त्रीय व्यवहार नियम : • अस्थि को मिट्टी या ताम्र पात्र में रखें। • लाल / सफेद वस्त्र से बांधें। • भूमि से ऊँचाई पर , शुद्ध स्थान में रखें। • पीपल या वट वृक्ष पर अस्थायी रूप से लटकाना परंपरागत रूप से स्वीकार...