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बिल्वपत्र और शमीपत्र अर्पण — कथा, मन्त्र और विधि

  शिव - बिल्वपत्र और शमीपत्र अर्पण — कथा , मन्त्र और विधि ११ बिल्वपत्र अर्पण मन्त्र ( प्रस्तुति एवं सरलीकरण : पंडित वी . के . तिवारी “ ज्योतिष शिरोमणि ”) एकादश रुद्र रूपों का प्रतीक माने जाते हैं , इसलिए ११ अर्पण करने से सम्पूर्ण रुद्रतत्त्व की पूजा मानी जाती है। पूर्वा भिमुखदीपस्तु यशो वृद्धिकरः स्मृतः। उत्तरा भिमुखो दीपः धन सिद्धि प्रदायकः ॥ दक्षिणस्थो हानिकरः पश्चिमः सुखदः स्मृतः॥ ·   उत्तरमुख वर्तिका → धन व सफलता ·   पूर्वमुख वर्तिका → यश व प्रतिष्ठा ऊर्ध्ववर्तिर्दीपशिखा त्यागिनां मोक्षसाधिका। गृहस्थानां न कर्तव्या स्थैर्यलाभो न जायते॥ ऊपर सीधी उठी हुई वर्तिका वाला दीप त्यागी और संन्यासी साधकों के लिए मोक्ष साधना में सहायक माना गया है। गृहस्थों को ऐसी वर्तिका नहीं रखनी चाहिए , क्योंकि इससे स्थिर फल और सांसारिक संतुलन की प्राप्ति नहीं होती। A lamp with a straight upward wick is regarded as supportive for ascetics and renunciates seeking liberation. It is not re...