Sheetala Ashtami — शीतला अष्टमी वर्ष में चार शीतला अष्टमी ⭐ अनेक क्षेत्रों एवं तांत्रिक-लोक परम्पराओं में वर्ष में 4 प्रमुख शीतला पूजन माने गये हैं। ⭐ विभिन्न प्रदेशों में तिथि-मान्यता अलग हो सकती है। किन महीनों में मानी जाती हैं ⭐ चैत्र कृष्ण अष्टमी — मुख्य शीतला अष्टमी (होली बाद) ⭐ वैशाख कृष्ण अष्टमी — ग्रीष्म रोग शांति ⭐ ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी — दाह-ज्वर, जलजनित रोग रक्षा ⭐ आषाढ़/श्रावण कृष्ण अष्टमी — वर्षा संक्रमण एवं महामारी शांति इन महीनों का विशेष महत्व क्यों ⭐ चैत्र — ऋतु परिवर्तन, चेचक/त्वचा रोग काल ⭐ वैशाख — तीव्र गर्मी, पित्त-दाह वृद्धि ⭐ ज्येष्ठ — जल अशुद्धि, ज्वर, संक्रमण भय ⭐ आषाढ़/श्रावण — वर्षा जनित रोग, कीटाणु वृद्धि आयुर्वेदिक कारण ⭐ चरकसंहिता में ऋतु-संधि को रोगोत्पत्ति काल कहा गया। ⭐ ग्रीष्म एवं वर्षा पूर्व “पित्त”, “रक्तदोष”, “कृमि”, “त्वचा विकार” वृद्धि मानी गयी। ⭐ नीम, शीतल आहार, उपवास, स्वच्छता — रोग प्रतिरोध बढ़ाने हेतु लोकव्यवस्था बनी। पौराणिक एवं तांत्रिक आधार ⭐ स्कन्दपुराण — शीतला माहात्म्य ⭐ भविष्यपुराण — रोगशांति एवं ग्रामरक्षा संक...
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